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    रमजान विशेष : बुराईयों से न रुकने वाले का रोजा-रोजा नहीं, फाका होगा- उलमा

    रमजान विशेष : बुराईयों से न रुकने वाले का रोजा-रोजा नहीं, फाका होगा- उलमा

    देवबंद : रोजा क्या है, रोजेदार को किन बातों का ख्याल रखना चाहिए और रोजेदार को किन चीजों का ख्याल रखना चाहिए। मौलाना कारी मुस्तफा ने इस पर रोशनी डालते हुए कहा कि रमजान का महीना मुसलमानों के लिए बेहद खास होता है। जिसमें अल्लाह ताआला अपने बंदों पर रहमतें और बरकतें नाजिल फरमाता है।

    मौलाना कारी मुस्तफा ने कहा कि रमजान मुबारक महीना है और अल्लाह ने रमजान के रोजे फर्ज किए हैं। जिनका बहुत सवाब है। नमाज, हज, जकात के साथ रोजा भी अहम फर्ज है। इस माह की बहुत बरकतें हैं जो अल्लाह अपने बंदों को अता करता है। उन्होंने कहा कि रोजा नाम है सुबह से शाम तक खाने पीने से परहेज करने, भूख प्यास बर्दाश्त करने, झूठ न बोलने, धोखा न देने, गाली न देने, गुस्सा और बईमानी न करने आदि का। जो आदमी सुबह से शाम तक भूखा रहे, लेकिन झूठ बोलना न छोड़े, और वो बुरे काम करता रहे, नमाजें न पढ़े तो उसका रोजा-रोजा नहीं बल्कि फाका है जो अल्लाह को पसंद नहीं है। मौलाना नूरुलहुदा ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति किसी ऐसी मजबूरी की वजह से रोजा नहीं रख पा रहा है जिसकी इजाजत शरीयत में दी हुई है तो ऐसे आदमी को चाहिए कि वह खुलेआम खाना पीना न करे, रोजेदारों का अहतराम (इज्जत) करे। जो आदमी जानबूझकर रोजा नहीं रखता वो बडा गुनाहगार है। उसको या तो लगातार 60 रोजे रखने होंगे या फिर 60 आदमियों को खाना खिलाना होगा। साथ ही कहा कि यदि कोई मजबूरी में रोजा छोड़ता है तो रमजान के बाद उसे छोड़े हुए रोजे रखने होंगे।

    शिबली इक़बाल 
    आईएनए न्यूज़ एजेंसी  सहारनपुर उत्तर प्रदेश

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