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    सम्भल।कोरोना काल में दें मदरसों को जकात : मुफ़्ती आलम

    सम्भल।रमजान के मुकद्दस महीने में जकात व फितरा अल्लाह की राह में खर्च करने का सबसे अहम व आसान रास्ता है। ढाई फीसद जकात देकर मुसलमान अपनी माल की हिफाजत कर सकते हैं। जरुरी है कि जकात सबसे पहले अपने अजीज को दें, उसके बाद गरीब-मिस्कीन व मदारिस को जकात दें।

     मुफ़्ती आलम रज़ा नूरी (मुफ़्ती ए आज़म, सिरसी)

    अल्लाह पाक ने मुसलमानों पर पांच फर्ज नाजिल किए हैं। इनमें जकात भी शामिल है। मुकद्दस रमजान में जकात दी जाती है। कुल माली हालत का ढाई फीसदी पैसा जकात के तौर पर दिया जाता है। मसलन सालाना आमदनी का ढाई फीसदी पैसे की जकात निकाली जानी फर्ज है। जकात ऐसे साहिबे माल पर फर्ज की गई है जिसके पास मौजूदा दौर में साढ़े सात तौला सोना व साढ़े बावन तौला चांदी है। मुफ़्ती ए आज़म सिरसी मुफ़्ती आलम रज़ा नूरी बताते हैं कि जकात देकर मुसलमान अपने माल का सदका अदा करें। सबसे पहले अपने अजीज को दें तथा उसके बाद पड़ोसी को देखें कि कहीं वह इस हालत में तो नहीं कि उसे जकात की जरुरत है। उसके बाद गरीब-मिस्कीन को दी जाए। मदरसों को भी जकात दे सकते हैं। क्योंकि इस वक्त जो हालात चल रहे हैं उसे देखते हुए मदरसों को जकात देनी चाहिये।



    उवैस दानिश

    Initiate News Agency (INA), सम्भल

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