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    हैलीपोर्ट का कार्य तेजी से चल रहा है, 2022 से उड़ानें शुरू होने की उम्मीद

    हैलीपोर्ट का कार्य तेजी से चल रहा है, 2022 से उड़ानें शुरू होने की उम्मीद

    नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरने वाले हैलीकाप्‍टर से आगरा आ सकेंगे

    आगरा : सिविल सोसायटी ऑफ़ आगरा ताज सिटी में हैलीपोर्ट बनाये जाने के प्रयासों को अंतिम चरण में पहुंचाया जाने को आगरा प्रशासन की दक्षता और उ.प्र. शासन की मंशा का परिचायक मानती है। सिविल सोसायटी ऑफ़ आगरा मानती है कि  हेलीपोर्ट के बनजाने से टूरिस्ट ट्रैफिक और  टूरिस्टों रात्रि प्रवास सहित ठहरने की अवधि पर असर पडेगा ,यह कितना अनुकूल या प्रतिकूल और दीर्घकाल में जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट बन जाने के बाद किस प्रकार का होगा इसका आंकलन टूरिज्‍म और हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री पर छोडती है।

    हमारी प्राथमिक दिलचस्पी  महज यह जानने में है कि सीमित पर्यटक जरूरतों  को दृष्‍टिगत अगर हैलीपैड  के स्थान पर जब पूरा हैलीपोर्ट बन सकता है और वह भी एक दम ताजमहल (लगभग 4 कि मी एरियल डिस्‍टैंस पर)  के एक दम  निकट । तो फिर शहरवासियों की   सहज जरूरत पूरा करवाने को धनौली एयरपोर्ट (सिविल एन्क्लेव ) प्रोजेक्‍ट को पूरा करवाये जाने में क्या दिक्कत है। वह भी तब जबकि  हैलीपोर्ट एक दम नया ग्रीनफील्‍ड प्रोजेक्‍ट है, वहीं  सिविल एन्क्लेव को धनौली शिफ्ट किया जाना  विशुद्ध रूप से संचालित एयरपोर्ट का शिफ्टिंग प्रोजेक्ट है।

    आगरा में हर छोटी बडी परियोजनाओं के क्रियान्वन के सम्बन्ध में सुप्रीम कोर्ट के द्वारा गठित 'ताज ट्रिपेजियम जोन अथार्टी' तथा 'सुप्रीम कोर्ट मानीटरिंग कमेटी ' जैसे विधिक रूप से सशक्‍त विधिक सर्जित नोटीफायड  निकाय हैं। उनको भी इस प्रोजेक्‍ट को वांचने और समझने का काम्‍  नहीं मिला। यह बात अलग है कि पब्लिक इंटरेस्ट categarization के आधार पर नोटीफाड हुए इन विधिक निकायों में भी सरकारी तंत्र के अधिकारियों की ही बहुलता है किन्तु   नागरिकों के प्रतिनिधियों के रूप में भी कुछ सुधीजन मनोनीत किये हुए हैं। सिविल सोसायटी ऑफ़ आगरा की इन दोनों ही निकायों से अपेक्षा है कि  वह बतायें कि हैलीपोर्ट से उडान भरने वाले हैलीकाप्‍टरों से तो ताजमहल के अत्यधिक नजदीकी होने के बावजूद वायु प्रदूषण क्यों  नहीं होगा जबकि  सिविल एन्क्लेव के वायुसेना परिसर से बाहर आते ही वायुप्रदूषण होने लगेगा। कुल मिलाकर यह प्रथम दृष्‍टय:  दोहरे मापदंड का ही परिचायक है।

    सबसे ज्यादा कष्ट  सिविल एन्क्लेव  के शिफ्टिंग प्रोजेक्‍ट को ग्रीन फील्‍ड प्रोजेक्‍ट बनाकर पेश -करने वालों की पेशागत विश्वनीयत को लेकर   है, जिनके कारण सर्वोच्‍च न्यायलय तक सही जानकारी नहीं पहुंच पायी। सरकार जितने रोडे धनौली प्रोजेक्‍ट को लेकर लगे हैं उनमें से उनतक को दूर नहीं करवा पायी जिससे कम से कम एन्क्लेव के निर्माण का रास्ता तो साफ होगया होता.

    कोई  भी सहजता के साथ विचार कर तय कर सकता है कि-

    (1) हवाई जहाजों में एयर टबाईन फ्यूल (ATF) का इस्तेमाल होता है, जो अत्यंत  न्‍यून प्रदूषणकारी होता है।मिट्टी के तेल के शोधन से इसे तैयार किया जाता है।प्रदूषण कारी न होने से भारत सरकार की प्रमुख एजैंसी नीरी और सी पी सी बी तक पर इससे जनित प्रदूषण के आंकडे अब तक उपलब्‍ध नहीं हैं।

    (2)  आगरा में टेकआफ करते ही हवाई जहाजों का एलीवेशन 35000फुट होता है और इस ऊंचाई पर पहुंचने के साथ ही वे बादलों की ऊंचाई से भी ऊपर होते हैं।क्‍यो कि आगरा में जमीन से बादलों की ऊंचाई सामान्‍यत:6500 फुट होती है। (Cloud level in AGRA : - Low-level Clouds:  6,500 ft. Mid-level Clouds: 6,500 to 23,000 ft. High-level Clouds: 16,500 to 45,000 ft.)

    सामान्यता  हवाई जहाज टेकआफ कर 1.5 मिनट में, फनल एरिया से गुजरने के साथ ही स्ट्रैटोस्फ़ीयर  (Stratosphere) यानि  18000फुट से अधिक ऊंचाई पर पर होता है। देश में सिविल एवियेशन के लिये निर्धारित हवाई मार्ग ( एयरकोरीडोर ) इसी स्ट्रैटोस्फ़ीयर में हैं।स्ट्रैटोस्फ़ीयर  (Stratosphere) परत में आर्द्रता, जलकण, धूलकण, वायुधुन्ध आदि नहीं होते हैं और न हीं इनका कोई  असर नहीं पडता है। क्यूँ कि इन सभी वायुमंडल  पर प्रतिकूल असर डालने वाले अपशिष्‍टकारियों  के प्रभाव . क्षोभ मंडल (Troposphere)यानि निचली परत तक ही सीमित रहते हैं।

    (3) अब तक के ताज ट्रैपीजियम जोन अथार्टी संबधी किसी भी नोटिफिकेशन में वायु मार्ग के लिये इस्तेमाल होने वाली इस परत ' स्ट्रैटोस्फ़ीयर (Stratosphere) ' का न तो अध्यन   करवाया गया है,नहीं या निर्देश जारी किये गये हैं।

    दरअसल ताजमहल पर असर पड सकने वाले आर्द्रता, जलकण, धूलकण, वायुधुन्ध आदि 12000 फुट तक की ऊचाई ट्रोपोस्फ़ीयर (troposphere) वाली वायुमंडलीय परत के अधिकतम ढाई हजार फीट तक की घटनाओं तक ही सीमित रहते हैं।

    क्षोभमण्डल या ट्रोपोस्फ़ीयर (troposphere) पृथ्वी के वायुमंडल का सबसे निचला हिस्सा है। इसी परत में आर्द्रता, जलकण, धूलकण, वायुधुन्ध तथा सभी मौसमी घटनाएं होती हैं। यह पृथ्वी की वायु का सबसे घना भाग है ।स्‍वभाविक है कि  वायुयान आवा-गमन  का प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष ताजमहल और  पर्यावरण पर कोई नकारात्मक असर पडने का प्रकटन अब तक नहीं हो सका है तब भी सुप्रीम कोर्ट में प्रतिविदयों के द्वारा खडे किये गये उन काल्पनिक प्रश्‍नों के  जबाब सरकारी अफसरशाही अब तक नहीं दे सकी हैं।जिनमें से प्रत्येक में आगरा के स्वाभाविक  आर्थिक विकास पर प्रत्यक्ष  रूप से असर डलना ही निहित है।

    जहां तक रही हैलीपोर्ट की बात हम अपनी ओर से कुछ भी नहीं कहना चाहते किन्तु यह जरूर संज्ञान में लाना चाहते हैं कि हैलीकाप्‍टर ,हवाई जहाज की तरह जैट के थ्रस्‍ट से न उडकर प्रोपलरों (पंखों ) से हवा में उडता है। भारत में सामान्य तौर पर 500फुट से 10,000 फुट इसका ( हैलीकाप्‍टर)  एलीवेशन रहता है। यानि इसकी समस्त उडान प्रक्रिया वायुमंडल की सबसे निचली परत क्षोभमण्डल या ट्रोपोस्फ़ीयर (troposphere) की जमीन से लगी  आधार परत तक ही सीमित है। यही वह परत है ,जिसमें आर्द्रता, जलकण, धूलकण, वायुधुन्ध,रोड  ट्रैफिक  उत्‍सर्जित प्रदूषण आदि का सबसे अधिक असर रहता है। लगता है कि ताजमहल के रूप और निखार को सक्रिय रहने वाले जागरूक जन काल्पनिक  कारण खडे कर केवल सिविल एन्क्लेव    शिफ्टिंग प्रोजेक्‍ट को रुकवाने तक ही अपना दायित्व पूरा हुआ मानते हैं। फिलहाल हैलीपोर्ट बन कर तैयार होने को है, 2022 तक इससे उडान कार्य शुरू हो जायेगा। नोयडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट घोषित रूप से इंदिरा गांधी इंटरनेशनल  एयरपोर्ट के लोड को कम करने के लिये ही बन रहा है किन्तु दरअसल मे इसके बनजाने का सबसे प्रत्‍यक्ष नकारात्‍मक असर आगरा की टूरिज्‍म ट्रेड आधारित विकास संभावनाओं पर ही पड़ेगा । पी पी मॉड्यूल पर विकसित किये जा रहे इस एयरपोर्ट का असली निवेशक स्विट्ज़रलैंड  की  Zurich International Airport AG कंपनी है।एयरपोर्ट आपरेशन के लिये इसके द्वारा सब्‍सिडरी कंपनी  Yamuna International Airport Pvt. Ltd (YIAPL) गठित की गयी है और अब समस्त  आप्रेशन इसी के द्वारा देखा जा रही है।

    हैलीपोर्ट का निर्माण प्रत्यक्ष  तौर पर तो ताजमहल सहित आगरा की एतिहासिक इमारतों के हवाई दर्शन के लिये भी किया जा रहा है किन्‍तु इसका भावी उपयोग हैलीकाप्‍टर टैक्‍सी पॉइट के रूप में ही होना है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरने वाले हैलीकाप्‍टर से आगरा आ सकेंगे तथा लक्षित भ्रमण या अन्य कार्य कर हैलीकाप्‍टर से ही वापस  लौट सकेंगे।सीधी वायुसेवा न होने से  आगरा में अब तक प्रदेश की सबसे ज्‍यादा चार्टर फ्लाइटें आती हैं। लेकिन हैलीपोर्ट के बनजाने के बाद चार्टर फ्लाइटों का इतेमाल करने वाले वर्ग को हेलीकाप्‍टर सेवा के रूप मे शसक्त विकल्‍प मौजूद होगा।


    काफी दमदारी से लॉच किया गया था 'हेलीपोर्ट' प्रोजेक्‍ट...

    यमुना एक्सप्रेस वे को आगरा एक्सप्रेस वे ( लखनऊ-आगरा एक्‍सप्रेस वे) से जोडने वाली आगरा विकास प्राधिकरण की रिंग रोड के बांयी ओर  लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे के आगरा छोर पर यह हैलीपोर्ट बना है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निर्माण का काम 2019 मे शुरू हुआ था|, इस हैलीपोर्ट की पट्टिका भी 2019 में स्थापित कर दी गयी थी। पट्टिका में आंकित विविरण के अनुसार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, तत्कालीन राज्यपाल राम नायिक तथा उप मुख्यमंत्री  डा. दिनेश शर्मा इसके अनावरण के अवसर पर मौजूद थे। एक बात जरुर है कि लोक निर्माण विभाग के द्वारा इसे बनाने का कार्य पूरी मुस्तेदी  के साथ करवाया जा रहा है। निर्माण कार्य में गुणवत्ता का पूरा ध्‍यान रखा जा रहा है।

    आईएनए एजेंसी, आगरा

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