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    कानपुर। कोविड- 19 का बढ़ता प्रकोप सरकारी संसाधन की कमी

    कानपुर। कोरोना संक्रमण की मौजूदा लहर कई राज्यों में बड़ी दिक़्क़त की वजह बनती जा रही है. बीमारों के इलाज के लिए संसाधन की कमी पड़ रही है. वहीं कोरोना संक्रमण की वजह से जान गंवाने वालों के अंतिम संस्कार में भी दिक़्क़तें आ रही हैं. तस्वीरे उत्तर प्रदेश के कानपुर की है जहाँ दिन रात चिताए जलाई जा रही है घाट पर चिता जलाने के लिए जगह कम पड़ती जा रही है और लोगो को अंतिम संस्कार के लिए घंटों इंतज़ार करना पड़ रहा है। बात अगर सरकारी सुविधाओं की करी जाए तो घाटो पर किसी प्रकार की कोई भी सुविधा नहीं मुहैया कराई गई है जिसके चलते यहाँ पर चिता जलाने वाले व आने वाले लोगो को काफी ज्यादा समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। 


    उत्तर प्रदेश के कानपुर में कोरोना से हालात बद से बदत्तर होते जा रहे है आलम यह है कि कानपुर में कोरोना मरीजो में संख्या बढ़ती जा रही और लोगो को जनपद में सरकारी सुविधा नही मिल पा रही है और लोग सड़कों पर दम तोड़ते हुए दिखाई दे रहे है। वही मरने वालो का भी आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। पिछले चार दिन में कोरोना से  48 लोगो की मौत हो चुकी है शव के अंतिम संस्कार के लिए लोगो को लंबी लंबी कतारो का   

    इंतजार करना पड़ रहा है और भैरवघाट में रोज लगभग 100 के ऊपर लोगो का अन्तिम संस्कार किया जा रहा है वही शवो की बढ़ती संख्या को देखते हुए घाटो पर दिन रात चिताए जलाई जा रही है। 

    कोरोना से मारने वालो की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है घाटो का आलम यह है कि दिन रात चिताए जलाई जा रही है उसके बाद भी लोगो को लंबी लंबी कतारो का इंतजार करना पड़ रहा है शव जलाने वाले लड़के की बात मानी जाए तो घाट के हालात बहुत ज्यादा खराब है पहले घाट पर रोज 15 से 25 लोगो का अंतिम संस्कार किया जाता था मगर कोरोना से मरने वालो के आकड़ो के चलते अब रोज लगभग 100 से अधिक शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। वही जिम्मेदार अधिकारियों द्वरा किसी प्रकार की कोई भी सुविधा मुहैया नही कराई गई है।

    आकाश -( चिता जलाने वाला)

    कोरोना के बढ़ते कहर के चलते जहा मरने वालों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है आलम यह है कि लोगो को न तो अस्पताल में इलाज मिल पा रहा है वही अब चिता जलाने के लिए लकडियो की कमी पड रही है बात अगर घाट पर लकड़ी बेचने वाले कि मानी जाए तो बीमारी की वजह से लकड़िया कम पड़ रही है कोरोना के चलते बाहर से लकड़िया आने में दिक्कत हो रही है।

    मोहित त्रिपाठी (पंडा )

    राहुल (लकड़ी बेचने वाला )


    एक तरफ जहां उत्तर प्रदेश के कानपुर में इलाज के अभाव के चलते लोगों की मौत होती जा रही है वहीं कानपुर के घाटों में भी स्थिति काफी ज्यादा दयनीय होती दिखाई दे रही है आलम यह है कि शवो का अंतिम संस्कार करने के लिए लोगों को लंबी लंबी लाइनों का सामना करना पड़ रहा है और घाटों में चिता जलाने के लिए जगह कम पड़ती जा रही है जिसके चलते कानपुर के घाटों में दिन रात चिताए जलाई जा रही है वहीं अगर बात की जाए सरकारी सुविधाओं की तो घाटों में किसी प्रकार की कोई सरकारी सुविधा लोगों को नहीं मिल पा रही है जिसके चलते लोगों को काफी ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है अब देखने वाली बात यह होगी कि सरकार द्वारा घाटों पर किस तरह के प्रबंध किए किए जाएंगे ताकि घाटों पर आने वाले लोगों को लंबी-लंबी कतारों का सामना ना करना पड़े और शवों का अंतिम संस्कार किया जा सके।


    इब्ने हसन ज़ैदी 

    आईएनए न्यूज़ एजेंसी, कानपूर 

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