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    किसान आंदोलन को धार देने के लिए राकेश टिकैत पहुंचे बलिया

    किसान आंदोलन को धार देने के लिए राकेश टिकैत पहुंचे बलिया

    बोले, यह क्रांतिकारियों की धरती है, सहजानन्द सरस्वती मंगल पांडे, चंद्रशेखर की धरती है, यहां के आंदोलनकारियों अच्छे, अच्छो भाया है।

    बलिया| किसान नेता राकेश टिकैत किसान आंदोलन को धार देने के लिए बलिया पहुंचे राकेश टिकैत सिकंदरपुर के चेतन भगत मैदान से जनता को संबोधित करते हुए कहा की बलिया अपने विचारों से चलने वाला जिला है यहां के क्रांतिकारियों ने अच्छे-अच्छे के छक्के छुड़ा हैं और देश छोड़ने पर मजबूर कर दि यह सहजानंद सरस्वती की धरती है चंद्रशेखर के देती है मंगल पांडे की धरती है यह की क्रांतिकारी धरती समय आवाहन करता हूं के सारे किसान एक हो जाओ ना हमारा कोई झंडा नहीं है जिसके पास जमीन है वह हमारा अपना है चाहे वह पश्चिम का हो उत्तर प्रदेश का हो चाहे वह बंगाल का हो।

    किसान नेता राकेश टिकैत

    राकेश टिकैत ने कहा कि या पूरे देश का किसान खड़ा हो चुका है देश का नौजवान खड़ा हो चुका है और यह तीन कृषि दिन वापस करनी पड़ेगी। किसान नेता राकेश टिकैत ने किसानों को चेतावनी देते हुए कहा, यह सिर्फ तीन बिल की बात नहीं है अभी और भी से ज्यादा खतरनाक आने वाली है। आपने सोचा था कि बिजली के थाने बनेंगे, बिजली अमेंडमेंट बिल आएगी आपने नहीं सोचा था न ,लेकिन अब सोच रहा पड़ेगा, क्योंकि लुटेरे आ गए हैं ,अभी बिजली ही नहीं बीजों के भी थाने बनेएंगें ,और किसानों को बाध्य किया जाएगा, आप इस कंपनी की ही बीज ले , और अगर आपने इस कंपनी का नहीं लिया तो आप पर जुर्माना लगाया जाएगा ।

    अगर किसी के पास दो जानवर हैं दो जानवर है तो उसे कमर्शियल माना जाएगा और आप दूध भी नहीं भेज पाओगे आपको आपको कमर्शियल मानकर कमर्शियल कनेक्शन दिए जाएंगे । तो अब आप दूध भी नहीं बेच पाओगे, अब यह कंपनियां निर्धारित करेंगे आप कौन सा बीज बोओगे बीज भी कंपनी से पूछ कर ही बोलना पड़ेगा, आंदोलन शुरू हो चुका है आप जाग जाओ इन कंपनियों के पहुंच पीएमओ तक है ,आपने देखा कंपनी की पालिसी पहले बनी, कानून बाद में आया, तो अब आपको जागना पड़ेगा घरों से निकलना , पड़ेगा एक गांव, एक ट्रेक्टर, 15 आदमी और 10 दिन की तैयारी कर लीजिए और आपको बताया जाएगा कि कब कहां पहुंचना है ,अपने ट्रैक्टरों में तेल पानी डाल लो, और अपनी जमीनों को बचाने के लिए अपने बालों को का भविष्य बचाने के लिए और रोजगार बचाना है तो आपको निकलना पड़ेगा बगैर निकले काम नहीं चलेगा लुटेरे आ गए हैं इन को भगाना पड़ेगा|

    यह इनका आखरी भाषा साबित होगा इसको नई दिल्ली से भगाना पड़ेगा दिल्ली की गद्दी सेन को भगाना पड़ेगा इनके लिए हम बंगाल भी जाएंगे वोट मांगने के लिए नहीं किसानों के साथ हो रही जाति से निपटने के लिए तो भाइयों संगठित होकर मजबूती से लड़ाई लड़नी है और यह नहीं देखना है किया झंडा किसका है इसको छोड़ना पड़ेगा और संयुक्त मोर्चा के साथ होकर लड़ना पड़ेगा यह लड़ाई बड़ी मजबूती से लड़नी है समझ लो यह किसान कि नहीं किसान के सम्मान के साथ साथ मजदूर किसान के आत्म सम्मान की भी लड़ाई है अगर किसान हारा तो देश हारा इसलिए भाइयों संगठित होकर इस लड़ाई को बड़ी मजबूती से लड़ना है।

    वॉइस सभा में पहुंचे कुछ अलग टाइप के आंदोलनकारी जो दूर दूर से आए थे इसी में 18 से बनी भंवरी के मालिक को अपने गले में पहने हुए सरकार की नीतियों को अपना विरोध दर्ज करा रहा था।

    आसिफ हुसैन जैदी
    आई एन ए न्यूज़ बलिया, उत्तर प्रदेश|

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