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    जीवन का प्रत्येक क्षण शक्ति का पर्व है और प्रत्येक दिन महिलाओं का दिन- भावना वरदान शर्मा

    जीवन का प्रत्येक क्षण शक्ति का पर्व है और प्रत्येक दिन महिलाओं का दिन- भावना वरदान शर्मा

    महिला दिवस पर विशेष...

    जीवन का प्रत्येक क्षण शक्ति का पर्व है और प्रत्येक दिन महिलाओं का दिन है क्युकी महिला न केवल परिवार , समाज , राष्ट्र बल्कि इस सम्पूर्ण सृष्टि का केंद्र बिंदु है। हर महिला के संघर्ष की अलग गाथा है । हर महिला शक्ति का स्वरुप है। आज सभी क्षेत्रों में लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण के उदाहरण देखने को मिलते हैं। सम्पूर्ण विश्व में आज शिक्षा और कार्यस्थल पर लैंगिक भेद भाव को समाप्त करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इस महिला दिवस पर हम केवल उन महिलाओं का उदाहरण नहीं दे सकते जिन्होंने संघर्ष करके अपने सपनों और मंजिलों को प्राप्त किया बल्कि यहां उन महिलाओं का भी जिक्र करना अनिवार्य हो जाता है जिन्होंने रूढ़ियों और परिवार के चलते अपने सपनों को तिलांजलि दी और घर की चारदीवारी में रहना स्वीकार किया ।जिनके पास पंख तो थे और उड़ने के लिए एक असीमित आकाश भी था लेकिन उन्होंने अपनी उड़ान को केवल इसलिए विराम दिया क्योंकि परिस्थितियां उनके अनुकूल नहीं थी। 

    भावना वरदान शर्मा

    आज विश्व के सभी देश महिलाओ से सम्बंधित अपराध और विशेष रूप से बच्चियों के साथ होने वाले यौन उत्पीड़न आदि समस्याएं को समाप्त करने को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहे हैं। आंकड़ों को देखें तो महिलाओं की शिक्षा का रेशिओ पहले से बढ़ा है । बच्चियाँ अपने मनचाहे कैरियर चुन रही हैं आगे बढ़ रही हैं । आज प्रत्येक क्षेत्र में पहले से बहुत अधिक विकल्प हैं। शिक्षा भी पहले से कहीं अधिक सुलभ है। लेकिन जब बात आती है मौलिक अधिकारों की कहीं ना कहीं अभी भी हमारे समाज में बच्चियों पर कैरियर की अपेक्षा विवाह करने का प्रेशर रहता है। पढाई पूरी होने के बाद जल्दी से जल्दी शादी करके घर बसाना आज भी अनिवार्य फैसला है जो कई बार उसके केरियर में बाधक हो जाता है। महिला सशक्तिकरण की शुरुआत परिवारों में बचपन से ही होनी आवश्यक है। हमें चाहिए कि हम अपनी बच्चियों को पंख पसारने के लिए आकाश तो दें ही साथ ही उन्हें उनके सपनों को पूरा करने के लिए न केवल अनुमति बल्कि मार्गदर्शन भी दें। फिर चाहे अपनी मंजिलों को प्राप्त करते हुए उनके कदम लड़खड़ाए या वह चोट खाए । तब माता पिता और परिवार की भूमिका मार्गदर्शक की होनी चाहिए । बेटों की तरह उनको भी अपने कैरियर चुनने के लिए अवसर प्रदान करने की आवश्यकता है । 

     बहुत से परिवारों में महिलाएं के लिए आज भी एक बहुत बड़ी चुनौती है कि योग्यता होते हुए भी वे अपनी प्रतिभा का उपयोग नहीं कर पाती हैं और परिवार के लिए अपने सपनों को तिलांजलि दे देती हैं। उन पर जीवन भर यह दबाव रहता है कि वह घर परिवार की जिम्मेदारियों तक सीमित रहे ।  आज भी बहुत से ऐसे परिवार हैं और बहुत सी ऐसी महिलाएं हैं जिन्हें पारिवारिक दबाव के कारण बाहर जाकर कार्य करने की अनुमति नहीं है। इस ढांचे को बदलने की आवश्यकता है। घरेलू हिंसा के मामलो को रोकनेऔर महिलाओं को इन मानसिक बढियों से मुक्त होने की आवश्यकता है।

    स्त्री हो या पुरुष इस संसार में प्रत्येक व्यक्ति को अपने सपनों को साकार करने का अधिकार मिलना चाहिए जो जीवन के मौलिक अधिकारों में से एक है ।अभी महिलाओं को इन मौलिक अधिकारों की ये जंग लड़ना बाकी है।जिस दिन प्रत्येक स्त्री अपने अंदर की असीमित शक्ति के स्त्रोत को पहचान कर अपने जीवन को सम्पूर्णता में जिएं वही दिन वास्तव में महिलाओं का दिन होगा। 

    आप सब को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएं...


    लेखिका- भावना वरदान शर्मा

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