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    रानी अवंती बाई के बलिदान को नहीं बुलाया जा सकता- मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

    रानी अवंती बाई के बलिदान को नहीं बुलाया जा सकता- मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

    राजनांदगांव| मुख्यमंत्री भूपेश बघेल रानी अवंती बाई के बलिदान दिवस पर शामिल हुए| हालांकि यह एक सामाजिक कार्यक्रम था लेकिन मुख्यमंत्री ने केंद्र में बैठे मोदी सरकार को जमकर घेरा| उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार पहले 64 मेट्रिक टन चावल लेने की बात की थी लेकिन मात्र 24000 मैट्रिक तन चावल ही खरीद रही है उसके बाद भी हमने अपने मेनिफेस्टो में किए हुए घोषणा के अनुसार किसानों का धान ₹25 कुंटल में खरीद रहे हैं हालांकि मुख्यमंत्री ने लोधी समाज की एवं देश के प्रथम शहीद महिला वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी के बलिदान को याद करते हुए कहा कि अंग्रेजों से लड़ाई लड़ते हुए अपनी मातृभूमि की रक्षा करते हुए एक महारानी होते हुए उन्होंने अपने प्राणों की आहुति दे दी लेकिन समाज में हमें उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि 2018 में विधानसभा चुनाव में खैरागढ़ विधानसभा क्षेत्र आपकी समाज की बहुलता है|

    दोनों राष्ट्रीय पार्टी ने आपके समाज के व्यक्ति को मैदान में उतारा था लेकिन कोई अन्य कोई व्यक्ति आपके क्षेत्र का जनप्रतिनिधि बनकर आपके संबंधों का कुठाराघात कर रहा है हालांकि मुख्यमंत्री के इस बयान से सामाजिक जनों ने नाराजगी जाहिर किया है लेकिन गौरतलब बात यह है कि छत्तीसगढ़ के लोधी समाज के प्रदेश अध्यक्ष कमलेश वर्मा मई 2007 में खैरागढ़ के उपचुनाव में कांग्रेस पार्टी से बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़ कर 24000 मत पाकर भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी को लाभ दिलाया था इसी तरह 2014 के लोकसभा चुनाव में समाज की बहुलता को देखते हुए कांग्रेस पार्टी ने लोकसभा से चुनाव टिकट देकर समाज को उपकृत करने का कोशिश किया था लेकिन लोधी समाज के प्रदेश अध्यक्ष के ऊपर सत्ता पक्ष की है|

    तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह के सुपुत्र अभिषेक सिंह से सांठगांठ कर चुनावी मैदान से सरेंडर करने की बात आई थी जिसका जवाब लोधी समाज के प्रदेश अध्यक्ष कमलेश्वर वर्मा ने आज तक नहीं दिया इसी तरह आज के इस कार्यक्रम में जिला लोधी समाज के जिला स्तर के पदाधिकारी भी इस कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराना महत्वहीन समझा राजनांदगांव के एक पूर्व पार्षद एवं संगठन की पूर्व पदाधिकारी ने आरोप लगाते हुए कहा कि समाज के आड़ में उन्हें लाल बत्ती की लालसा है हम ऐसे लोगों का साथ नहीं दे सकते उन्होंने यह बात बताई कि छत्तीसगढ़ में समाज को किस किसी पार्टी विशेष का प्रथम तो नहीं करना चाहिए उल्लेखनीय है कि कमलेश्वर वर्मा कांग्रेस पार्टी से संबंध रखते हैं हालांकि इनकी बागी होने के बहुत सारे आरोप समय-समय पर लगी है और वह प्रमाणित हो गए हैं तत्कालीन जोगी सरकार में खैरागढ़ के एक भविष्य में ऐसे ही एक शानदार आयोजन 2002 में करवाया था उसके बाद से लेकर अब तक राज्य स्तर पर यह कार्यक्रम 15 साल की रमन सरकार के बाद पहली बार अपने गांव जो कि दिल्ली में कराया गया|

    जबकि पूर्व में भी वह लगातार प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं सवाल लाजिमी है कि उन्होंने ऐसा भव्य आयोजन पहले की सरकारों में क्यों नहीं कराया जाहिर सी बात है समाज की आड़ में शक्ति प्रदर्शन कर अपनी राजनीतिक रोटी सेकने एवं मुख्यमंत्री को यह आभास कराने यह हमारे समाज में जबरदस्त सामाजिक समरसता एवं एकता है कम से कम एक लाल बत्ती आयोग की जिम्मेदारी तो बनती है गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में दूसरी पंक्ति में आयोग निगम वरिष्ठ नेताओं को तरजीह दी जानी है हालांकि अभी फिलहाल स्थगित है लेकिन असम चुनाव के निपटने के बाद इसकी विधिवत घोषणा की जानी है लेकिन मुख्यमंत्री की बातों से नहीं लगता कि समाज को किसी आयोग का प्रतिनिधित्व मिले क्योंकि मुख्यमंत्री ने पूर्व में समाज को मौका देने पर भी मौका  अवसर में बदलने की क्षमता को ताल गए हालांकि आज के कार्यक्रम में ऐतिहासिक भीड़ को देखकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आयोजन समिति की जमकर तारीफ की है|

    हेमंत वर्मा
    आईएनए न्यूज़, 
    राजनांदगांव, छत्तीसगढ़

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