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    शताब्दी का सफर बन सकता हैं हादसों का घर

    शताब्दी का सफर बन सकता हैं हादसों का घर

    कानपुर| शहर की नामी ट्रैवल्स कंपनी आम जनमानस की जान को जोखिम में डालते हुए अपनी गाढ़ी कमाई में लगी हुई है। आपको बताते चलें कि शताब्दी ट्रैवल्स कंपनी के द्वारा लगातार रूप से अपनी तमाम बसों में परिवहन विभाग के नियमों और मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ाये जाने का काम किया जा रहा है। जिसकी वजह से हर दिन के साथ इसमें सवार होने वाले हजारों की तादाद में यात्रियों पर किसी भी वक्त जान का खतरा मंडराता रहता है। 

    दिन का उजाला हो या रात का अंधेरा... 24 घंटे आपको शताब्दी और समय शताब्दी की ये सैकड़ों बसें बड़ी ही आसानी से शहर की मुख्य सड़कों पर यात्रियों की ढुलाई करते हुए नजर आ जाएंगी। बावजूद इसके मानकों को ठेंगा दिखाती हुई ये बसें आरटीओ विभाग की कार्यवाही वाली नजरों से कोसों दूर प्रतीत हो रही है। यही कारण है कि आरटीओ विभाग आम जिंदगियों को लेकर जरा सी भी सतर्कता नहीं बरत रहा। इतना ही नहीं सैकड़ों की तादाद में मौजूद इन बसों की फिटनेस में भी सेटिंग-गेटिंग का बोलबाला है जिसका खामियाजा आम जनमानस को किसी भी वक्त एक बड़े हादसे के रूप में भुगतना पड़ सकता है।

    करीब एक वर्ष पूर्व कन्नौज में ऐसी ही एक ट्रैवेल्स कम्पनी की मानक विहीन बस के कारण हुए दर्दनाक हादसे में 20 लोगों की सांसें थम गई थी। तब भी उस बस के संचालन में एआरटीओ कार्यालय की मिलीभगत की बात सामने आ रही थी। हालांकि उस दौरान कई बसों के विरुद्ध कार्यवाही देखने को मिली थी लेकिन उन 20 लोगों की चिता की आग ठंडे पड़ते-पड़ते आरटीओ विभाग की कार्यवाही की रफ्तार भी ठंडे बस्ते में चली गई। ऐसे में बड़ा सवाल ये उठता है कि क्या अब एक बार फिर कानपुर आरटीओ तमाम ऐसी मानक विहीन बसों पर ताबड़तोड़ कार्यवाही करने का बीड़ा उठाता हैं या उससे पहले किसी अप्रिय घटना के इंतजार में हाथ पर हाथ धरे शांत बैठा रहता है?

    इब्ने हसन जैदी
    आईएनए न्यूज़ एजेंसी, कानपुर उत्तर प्रदेश

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