Header Ads

  • INA BREAKING NEWS

    अयोध्या मे त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की गूंज, मतदाताओं को रिझाने मे जुटे दावेदार

    अयोध्या मे त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की गूंज, मतदाताओं को रिझाने मे जुटे दावेदार

    पंचायत चुनाव को लेकर प्रत्याशियों और मतदाताओं में जबरदस्त उत्साह

    अयोध्या। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर आरक्षण का रास्ता अभी साफ नहीं हो पाया है  सरकार और प्रशासन ने  जो आरक्षण की सूची तैयार किया था  उसके खिलाफ माननीय उच्च  न्यायालय में वाद प्रस्तुत किया गया था जिस पर न्यायालय ने रोक लगाकर  नए सिरे से आरक्षण सूची तैयार करके  जारी करने का आदेश दिया है। जिसके चलते चुनाव अब  अप्रैल के स्थान मई में  होंगे  उसके चलते  यूपी बोर्ड परीक्षा भी प्रभावित हो सकती है  और कई  संभावित प्रत्याशियों के खेल बन बिगड़ सकते हैं। जनपद के लगभग सभी ब्लॉकों में त्रिस्तरीय ग्राम पंचायत चुनाव के लिए जारी हुई आरक्षण की अंतरिम सूची ने गांवों का माहौल पूरी तरह बदल दिया है। घर-आंगन के साथ गांव की गलियों से लेकर चौराहे और चौपाल तक सिर्फ ग्राम पंचायत चुनाव की ही चर्चाएं हैं। गांव में मतदाताओं की संख्या के अनुसार समीकरण साधने का प्रयास हो रहा है। गांव में होने वाली हर सुख-दुख की घटनाओं में भी दावेदार बिन बुलाए मेहमान बन रहे हैं। आरक्षण की अंतरिम सूची ने गांव-देहात की राजनीति में  हलचल ला दी है। किंतु वहीं पर अब  कहीं खुशी में गमी तो कहीं गमी में खुशी हो सकती है । क्योंकि पहले  पंचायत चुनाव को आधार 1995 से माना गया था जो अब 2015 से माना जाएगा।  ऐसे में नए सिरे से जो आरक्षण की सूची तैयार हो रही है उसके अनुसार  समीकरण बन बिगड़ सकते हैं। आशा है कि आरक्षण सूची जारी होने के बाद पंचायत चुनाव की तिथि मार्च के अंत तक  घोषित हो जाएंगे।

    ग्राम पंचायत सदस्य से लेकर जिला पंचायत सदस्य के पद को लेकर तमाम राजनीतिक समीकरण उलझ गए हैं। जबकि तमाम लोग इस बार चुनाव में अपनी दावेदारी मजबूत करने के लिए पिछले काफी समय से ग्राम सेवक बने हुए थे। अब पलटी बाजी के बाद फिर से नए समीकरण तैयार करने पर मंथन शुरू हो गया है। गांव में दावेदारों के साथ मतदाता भी आरक्षण सूची आने के बाद अपने नफे नुकसान का आकलन कर रहे हैं। उधर ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में अपनी दावेदारी पक्की करने के साथ माहौल पूरी तरह अपने पक्ष में करने के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ रहे हैं। छोटे स्तर पर ही सही गांवों में दावतों का दौर भी शुरू हो गया है। गांव में तैनात किए मुखबिर, जिला पंचायत चुनाव की तैयारियों में जुटे दावेदारों ने अपने वार्ड के गांवों में अपने सहयोगी यानी मुखबिर तैनात कर दिए हैं। मुखबिर का काम गांव में होने वाली हर घटना की सूचना समय से दावेदार तक पहुंचाना है। दावेदार भी सूचना मिलते ही गांव पहुंच रहे हैं और दुखद घटना में ग्रामीणों के साथ पूरी हमदर्दी जता रहे हैं। गांव पहुंच रहे रिश्तेदार, जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में उतरने की तैयारी कर रहे दावेदार हर मोर्चे को मजबूत कर रहे हैं। गांवों में अपनी रिश्तेदारी तलाशी जा रही हैं और रिश्तेदारों को माहौल बनाने के लिए गांव भेजा जा रहा है। कई ऐसे लोग भी गांव पहुंच रहे हैं, जिन्होंने दशकों पहले क्षेत्र के कालेज से शिक्षा पूरी की और अब अपने साथ पढ़ने वालों से संपर्क कर अपने रिश्तेदार दावेदार को समर्थन देने की बात कही जा रही है।

     इस बार पंचायत चुनाव में कई गांव पंचायतों के अस्तित्व समाप्त हो गए हैं। जिस कारण वहां पर पंचायत चुनाव नहीं हो पाएंगे क्योंकि कई गांव पंचायतें नगर निगम में शामिल हो गई हैं तो कई ग्राम पंचायतें नगर पालिका में शामिल हो गई हैं। कई गांव नई नगर  पालिका बनने से उसमें समाहित हो गए हैं। ऐसे में अब वहां पर पंचायत के चुनाव नहीं होंगे जिसको लेकर वहां मायूसी है। जनपद में इस बार पंचायत चुनाव को लेकर खास उत्साह लोगों में देखने को मिल रहा है लोग नए-नए तरीकों से मतदाताओं को अपने पक्ष में जोड़ने की जुगत में लगे हुए इस बार पंचायत चुनाव में सोशल मीडिया का भी अहम रोल देखा जा रहा है प्रत्याशियों द्वारा अपने पक्ष माहौल बनाने के लिए ज्यादा से ज्यादा लोगों के सोशल मीडिया अकाउंट से अपने पक्ष में पोस्ट कराने का क्रम भी शुरू हो चुका है प्रत्याशी अपने क्षेत्रों के नाम से अलग-अलग व्हाट्सएप ग्रुप का गठन कर भी युवा मतदाताओं तक पहुंचने का भी प्रयास कर रहे हैं चुनावी ऊंट किस करवट बैठता है यह तो वक्त बताएगा लेकिन प्रत्याशी अपनी तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते कुल मिलाकर पूरे जनपद में पंचायत चुनाव का रंग छाया हुआ है।

    देव बक्श वर्मा
    आई एन ए न्यूज़ अयोध्या - उत्तर प्रदेश

    Post Top Ad


    Post Bottom Ad


    Blogger द्वारा संचालित.