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    तहसीलदार की मनमानी कार्य प्रणाली और निरंकुशता जारी

    तहसीलदार की मनमानी कार्य प्रणाली और निरंकुशता जारी

    मिश्रित/सीतापुर| तहसील में तहसीलदार की मनमानी कार्य प्रणाली को लेकर उनके और अधिवक्ताओं के मध्य खिची जंग की तलवारें म्यान में जाने का नाम ही नहीं ले रही है। बीते जनवरी माह से अधिवक्ताओं की हड़ताल जहां निरंतर जारी है। वहीं 'हम किसी से कम नहीं' वाली कहावत को चरितार्थ करते हुए तहसीलदार की निरंकुशता अब आम जनता के लिए सिर चढ़कर बोलने लगी है। वादों का निस्तारण समयबध्द ढंग से नहीं हो पा रहा है और लोग बेवजह तहसील की दौड़ लगाने को मजबूर हो रहे है। मामले में उपजिलाधिकारी की भूमिका भी कुछ कम दिलचस्प नही है। प्रदेश में सत्तारूढ़ राजनैतिक दल का यह नारा जनता की सरकार जनता के द्वार यहां बेअसर साबित हो रहा है। ज्ञातव्य हो, यहां तहसील में लम्बे समय से कार्यरत तहसीलदार चंद्रकांत त्रिपाठी की कार्य शैली भू राजस्व नियमों के विपरीत अपनी निरंकुशता के रिकार्ड तोड़ रही है। भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन देने का दावा करने वाली प्रदेश की सत्तारूढ़ सरकार के कार्यकाल के चलते यहां तहसील में विभिन्न स्तरों पर हावी है । तहसील के विभिन्न पटलो पर भ्रष्टाचार पूरी तरह से हावी है| पटलो का कार्य देखने वाले जिम्मेदारों के संरक्षण में बगैर सुविधा शुल्क के कोई भी कार्य संभव नहीं हो पा रहा है।

    जैसे बैनामा और वसीयतनामा के आधार पर दाखिल खारिज खेतौनी फीडिंग व नाम दुरुस्ती करण मृतक आश्रितों के नाम वरासते इतना ही नहीं बल्कि आय, जाति, निवास प्रमाण पत्रों के आवेदक जब तक संबंधित को मुंह मांगा चढ़ावा नहीं चढ़ाते| तब तक उनका कार्य हो पाना मिश्रित तहसील में बिल्कुल संभव नहीं है। इतना ही नहीं तहसीलदार यहां तैनाती स्थल पर आवास होने के बावजूद निवास न करके रोजाना जिला मुख्यालय से आवागमन करके सरकारी वाहन का जहां खुले आम दुरुपयोग कर रहे है। वही इस कार्य में अनावश्यक रूप से व्यय होने वाले डीजल का चूना लगा रहे है। तहसीलदार की हिटलर शाही के बारे में सब कुछ जानते हुए भी तहसील के सुपरविजन अधिकारी एवं उपजिलाधिकारी का चुप्पी साध कर बैठे रहना दाल में काला होने की तरफ खुले आम इशारा कर रहा है । तहसील में सक्रिय अधिवक्ताओं के संगठन दि मिश्रित बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राम बख्श सिंह ने अधिवक्ताओं की मंशा रूप बैठक करके तहसीलदार के स्थानांतरण तक उनके  न्यायालय के बहिष्कार की घोषणा बीते 14 जनवरी को एक ज्ञापन देकर की थी । यह हड़ताल 2 माह से अधिक समय गुजर जाने के बावजूद भी दिए गए ज्ञापन पर कोई कार्यवाही न होने के चलते तहसीलदार न्यायालय का बहिष्कार निरंतर जारी है । वहीं गेहूं के साथ घुन की तरह पीस रहे वादकारी और जरूरतमंद लोग जिसकी तरफ गंभीरता से ध्यान देकर प्रदेश शासन और जिला प्रशासन को कड़े दंडात्मक कदम उठाने की आवश्यकता है । ताकि सबका साथ सबका विकास वाला नारा  समुचित रूप से साकार हो सके।

    संदीप चौरसिया, मिश्रिख

    आईएनए न्यूज़ एजेंसी, सीतापुर, उत्तरप्रदेश

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