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    राष्ट्रीयकृत बैंकों के निजीकरण, कर्मचारियों की हड़ताल, ग्राहकों का दोहन ही, मोदी सरकार की पहचान - कांग्रेस

    राष्ट्रीयकृत बैंकों के निजीकरण, कर्मचारियों की हड़ताल, ग्राहकों का दोहन ही, मोदी सरकार की पहचान - कांग्रेस

    गया/बिहार| अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी के सदस्य सह मगध प्रमंडल कांग्रेस प्रवक्ता प्रो विजय कुमार मिठू, राम प्रमोद सिंह, अशोक सिंह, बाबूलाल प्रसाद सिंह, अमरजीत कुमार, टिंकू गिरी,अमित कुमार उर्फ रिंकू सिंह, विनोद बनारसी, अशरफ इमाम, मो अजहरुद्दीन, श्रवण पासवान, अरुण कुमार पासवान,सुरेन्द्र मांझी, विनय कुमार सिन्हा आदि ने कहा कि देश के राष्ट्रीयकृत बैंकों के निजीकरण, कर्मचारियों के हड़ताल, छटनी, ग्राहकों के दोहन से आमजन काफी परेशान है। नेताओ ने कहा की मोदी सरकार के कार्यकाल में राष्ट्रीयकृत बैंकों की संख्या को कम करने, निजीकरण करने, कर्मचारियों का छटनी करने, ग्राहकों से सेवा के नाम पर प्रतिवर्ष हजारों करोड़ की लूट करने, जन - धन एवम् मुद्रा योजना के नाम पर गरीबों से करोड़ों खाते खोलवा कर पैसा वसूलने, बैंकों के रिजर्व राशि को सरकार द्वारा लेने के काम में मशगूल है।

    नेताओ ने कहा, आज से चार दिनों तक बैंक बंद रहे, जिसमें 15 एवम् 16 मार्च को कर्मचारियों के हड़ताल उनके जायज मांग को लेकर शामिल है, कर्मचारी बैंकों को बंद करने, उनके एकीकरण, छटनी, पेंसन आदि को लेकर कर रहे है। नेताओ ने कहा की देश के पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जी ने देश के गरीब, मध्यवर्गीय परिवार को सुविधा देने, बिना कोई सेवा शुल्क  बैंकों द्वारा काम करने, कम ब्याज दर पर ऋण देने आदि के लिए बैंकों का राष्ट्रीयकरण की थी, जिसे आज सत्ता में बैठे लोग छिन्न - भिन्न करने, इसे लूटने, और बेचने को आतुर है। नेताओ ने कहा की मोदी सरकार में देश की आर्थिक स्थिति काफी दयनीय है, जबकि यह सरकार रिजर्व बैंक के आपातकालीन फंड को भी ले लिया, विश्व बैंक सहित अनेकों अंतरराष्ट्रीय प्राइवेट बैंकों से कर्ज ले रखी है, तो दूसरी ओर पेट्रोलियम पदार्थो से अपने अभी तक के कार्यकाल में 22 हजार लाख करोड़ एवं जी एस टी से लाखो करोड़ जनता की जेब से निकालने का काम किया है, सभी प्रकार के टैक्सो में पहले से बढ़ोतरी भी किया गया है। नेताओ ने कहा की मोदी सरकार जो नोटेबंदी कर देश के 83 हजार लाख करोड़ एक हजार और पांच सौ के नोट को रद्द करने की ऐतिहासिक गलती की है, उसी का यह सब देन है, किन्तु देश के भोली - भाली जनता को उल्टा - सीधा समझा कर, जुमलेबाजी कर गुमराह कर रही है।  नेताओ ने कहा कि रद्द किए गए नोटों को नये सिरे से छपवाने में लाखो करोड़ रुपए खर्च के बोझ से देश की आर्थिक स्थिति बदहाल है।

    प्रमोद कुमार यादव

    आईएनए न्यूज़ एजेंसी, गया, बिहार

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