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    विवेक बैनारा पर फिर लगा फर्जीवाड़े का आरोप, बड़े स्तर पर फ्रॉड करने का आरोप

    विवेक बैनारा पर फिर लगा फर्जीवाड़े का आरोप, बड़े स्तर पर फ्रॉड करने का आरोप

    (इससे पहले भी करीब 8 करोड़ की आईटीसी चोरी का लग चुका है आरोप)

    आगरा। विवेक बैनारा, यानी कि फ्रॉड का पर्याय। या यूं कहें कि मार्केटिंग क्षेत्र की कंपनियों के साथ धोखा करने वालों का सबसे बड़ा सरगना। जी हां, एक बार फिर विवेक बैनारा पर कंपनी के साथ बड़ा फ्रॉड करने का मामला सामने आया है। जिसमें उसने कई तरह से फर्जीवाड़ा किया है। आगरा जिले के प्रोफेसर्स कॉलोनी, हरीपर्वत निवासी मुकेश बैनारा ने न्यायालय में प्रस्तुत दस्तावेज व कुछ साक्ष्यों के आधार पर बताया कि विवेक बैनारा ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर फर्जीवाड़ा कर बड़े स्तर पर फाइनेंशियल फ्रॉड किया है। मुकेश बैनारा ने बताया कि विवेक बैनारा अपने परिवार के साथ जयपुर में रहता है तथा मुकेश का रिश्तेदार व ट्रेड में साझेदार भी है। मुकेश की दो नामी कंपनियां बैनारा वाल्वस लिमिटेड(B.V.L.) व बैनारा स्पेयर्स प्रा. लिमिटेड(B.E.S.P.L.) हैं। जिनकी मार्किट में काफी अच्छी रेपोटेशन है। बताया कि विवेक बैनारा उसके चाचा का बेटा है और वह सन् 2015 में विवेक ने अपने पिता पी.एल. जैन व अपने एकाउंटेंट विपिन जैन के साथ मुकेश से मिलने आया और मुकेश की कंपनी B.E.S.P.L. व विवेक की कंपनी बैनारा बियरिंग्स एंड पिस्टन लिमिटेड(B.B.P.L.) की ज्वॉइंट मार्केटिंग करने का प्रस्ताव रखा, जिस पर मुकेश ने सहमति व्यक्त की। इसके बाद सन् 2016 में विवेक बैनारा ने मुकेश के सामने प्रस्ताव रखा कि मुकेश की कंपनी B.V.L. द्वारा निर्मित उत्पादन/प्रोडक्ट्स की बिक्री भी विवेक की कंपनी B.B.P.L. के निर्देशों व निगरानी में की जाए एवं उससे होने वाले लाभ को मुकेश व विवेक के बीच आधा-आधा हिस्सों में बांटा जाएगा। साथ ही विवेक ने यह भी कहा कि मुकेश की कंपनियों को प्रोडक्ट्स निर्मित करने से ज्यादा फायदा उनके ट्रेडनेम से ट्रेडिंग करने में होगा। इसके अलावा मुकेश से विवेक ने यह भी कहा कि वह अपनी एक अन्य नई कंपनी बैनारा सोलर प्रा. लिमिटेड(B.S.P.L.) में अपनी पत्नी व बेटे को 50 प्रतिशत की हिस्सेदारी देगा। विवेक ने अपनी कंपनी के लाभ में से मुकेश को 50 प्रतिशत हिस्सेदारी देने व मुकेश की कंपनी के लाभ से 50 प्रतिशत हिस्सेदारी लेने की बात रखी। इसके बाद जल्द ही विवेक ने हाल ही में शुरू की गई अपनी नई सोलर बिजनिश कंपनी (B.S.P.L.) में 50 फीसदी मुनाफा देने की बात कहकर मुकेश को गुड़गांव भेज दिया। उसके बाद विवेक ने मुकेश की कंपनियों पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया। इतना ही नहीं विवेक ने मुकेश की कंपनी में वर्षों से काम कर रहे कर्मचारियों को बाहर निकाल दिया। इसी बीच विवेक बैनारा ने कंपनी के दैनिक संव्यवहार की सुविधा की बात कहते हुए मुकेश व उसके परिवार वालों से कई खाली चेक्स, बिल बुक व फॉर्म्स पर दस्तखत करवाकर अपने पास रख लिए। विश्वास में आकर मुकेश व उसके परिवार वालों ने दस्तखत किए हुए चेक्स, बिल बुक व फॉर्म्स विवेक को दे दिए। इसके बाद वित्तीय वर्ष 2016-17 व 2017-18 में विवेक बैनारा ने मुकेश की कंपनियों से नुकसान होने की बात कहते हुए अपने शेयर वापस मांग लिए। जिस पर मुकेश ने उसके शेयर वापस कर दिए। दिसंबर 2018 में विवेक बैनारा की कंपनी (B.B.P.L.) पर जीएसटी विभाग ने छापेमारी की। जिसके बाद मुकेश को जानकारी मिली कि विवेक ने फर्जी तरीके से मुकेश की कंपनियों से अपनी व कुछ अन्य कम्पनियों के नाम सेल-इनवॉयस व बुक्स बना डालीं, जो असल में फर्जी थीं। इसी के सहारे उसने करोड़ों रुपयों की आईटीसी चोरी भी की। तब मुकेश को विवेक द्वारा की जाने वाली फर्जी राउंड ट्रिपिंग के बारे में जानकारी हुई। विवेक ने जिन कंपनियों व व्यक्तियों के साथ खरीद-बिक्री के जो बिल बनाये और खाते में ट्रांसेक्शन का जो विवरण दिखाया, वह सब फर्जी निकला।

    विवेक ने अपने अकाउंटेंट विपिन जैन के साथ मिलकर यह सब फर्जीवाड़ा किया। विवेक ने फर्जी तरीके से खाली दस्तावेजों का दुरुपयोग कर अमर कुमार, भावेश, चंद्रिका, मुकेश, पारिचेम रेस, आर टी सुपर टेक आदि को भुगतान कर दिया। जब कि असल में यह सब फर्जी है। जिस रकम का भुगतान विवेक द्वारा दिखाया गया था, वह रकम उक्त व्यक्तियों द्वारा विवेक की ही कंपनी B.B.P.L. के आईपीओ/शेयर्स खरीदने के लिए प्रयोग की गई थी। इस प्रकार विवेक ने मुकेश की कंपनी से अन्य व्यक्तियों को भुगतान किया और इन्हीं लोगों से विवेक ने अपनी कंपनी के शेयर ख़रीदवाये। मुकेश ने विवेक बैनारा के विश्वास में आकर जो दस्तखत किए हुए चेक उसे दिए थे, उसमें से विवेक ने मुकेश की कंपनी B.B.L. के खाता संख्या 917020056285155 के 442926 से 442950, 484926 से 485025, 485026 से 485125 एवं 485126 से 485225 तथा B.E.S.P.L. के खाता संख्या 918020006144315 के 477701 से 477725, 485026 से 485125, 485126 से 485225 व 485226 से 485325 के चेक्स अपने पास अवैध रूप से रखे हुए है और मांगे जाने पर भी वापस नहीं किए हैं। जबकि मुकेश द्वारा 7 जून 2020 को एक नोटिस प्रेषित कर यह मांग की गई थी कि मुकेश के सारे चेक्स वह लौटा दे। मुकेश की कंपनियों की प्लांट व मशीनरीज, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 1 करोड़ रुपए है, को भी विवेक ने अपनी फैक्ट्री शैड 11 केएम माइल स्टोन, अरतोनी, आगरा में रख रखा है। विवेक ने मुकेश द्वारा दी गई चेक्स में से चेक नंबर 484978 को 4 जून 2020 को 5,21,51,490 की राशि पेयी में B.B.P.L. भरकर बैंक में लगा दिया। जबकि मुकेश दिसंबर 2019 के बाद से ही आगरा या गुड़गांव नहीं गया तथा जयपुर में रह रहा है। इसी प्रकार विवेक ने मुकेश की दूसरी कंपनी B.E.S.P.L. के खाते का चेक नंबर 485228 को दिनांक 8 जून 2020 को 47,27,800 रुपए की रकम भरकर बैंक में लगा दिया। इसके अलावा भी विवेक बैनारा द्वारा मुकेश को रुपए ऐंठने की नीयत से धमकाया जा रहा है। मुकेश व उसके परिवार को जीएसटी विभाग द्वारा विवेक के प्रति किए गए कार्यों के लिए नोटिस दिया गया। 4 मार्च 2021 को मुकेश विवेक की फैक्ट्री 11 किमी. माइल स्टोन अरतौनी, आगरा गया ताकि विभिन्न विभागों को नोटिसों का जबाव देने के लिए वहां के लिए दस्तावेज मिल सकें लेकिन वहां मौजूद गार्ड ने धमकाते हुए फैक्ट्री के अंदर जाने नहीं दिया और कहा कि मालिक विवेक बैनारा ने तुम्हें और तुम्हारे परिवार के किसी भी व्यक्ति को अंदर जाने से मना किया है। अब कभी यहां आओगे तो जान से जाओगे। इसके बाद मुकेश थाना सिकंदरा, आगरा में अपनी रिपोर्ट लिखवाने गया लेकिन रिपोर्ट नहीं लिखी गई। बोला गया कि बिना अधिकारियों के आदेश के ऐसे मुकदमे दर्ज नहीं होते। बहरहाल, मुकेश ने उच्चाधिकारियों को पत्र देकर न्यायालय में भी याचिका दाखिल कर कार्रवाई की मांग की है।

    मुकेश बैनारा ने यह भी बताया कि  नकली या प्रबंधित आईपीओ लाने के कारण, विवेक ने भारतीय नागरिक होने के साथ-साथ भारतीय धन का उपयोग करके धोखाधड़ी / धोखा किया है। साथ ही अपने फर्जी टर्नओवर के साथ उसने भारत के बैंकिंग संस्थानों जैसे बंधन बैंक से भारी ऋण का प्रबंधन किया है। जैसे- आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक, आदि। यह सब नकली चालान, नकली बिक्री और जीएसटी के 100 से अधिक मूल्य के राउंड ट्रिपिंग द्वारा ही संभव था, जोकि विवेक ने किया है।

    आईएनए न्यूज़ एजेंसी, आगरा|

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