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    मिश्रित क्षेत्र में 84 कोसीय धार्मिक होली परिक्रमा शुरू, गंगन भेदी जयकारो के साथ माहौल हुआ भक्तिमय

    मिश्रित क्षेत्र में 84 कोसीय धार्मिक होली परिक्रमा शुरू, गंगन भेदी जयकारो के साथ माहौल हुआ भक्तिमय

    मिश्रित/सीतापुर| मिश्रित क्षेत्र का 84 कोसीय धार्मिक होली परिक्रमा भोर होते ही नैमिषारण्य के चक्र तीर्थ में स्नानोपरान्त पहला आश्रम से डंका बजाते ही सुबह ब्रम्ह मुहूर्त में रामाध्वनि के गंगन भेदी जयकारो के साथ शुरू हो गया है। आश्रम से डंका बजने के बाद घोड़े पर सवार संत ने डंका बजाते हुए पूरे नैमिष का भ्रमण किया है । डंके की आवाज सुनकर आश्रमों , मन्दिरों धर्मशालाओं और सड़कों के किनारे रात्रि से विश्राम कर रहे परिक्रमार्थी परिक्रमा पथ पर निकल पडे़ है । परिक्रमा पथ पर रामादल के पहुंचते ही गंगन भेदी राम नाम के जयकारे गूंजने लगे है । सीताराम सीताराम कहते हुए परिक्रमार्थी परिक्रमा के पहले पड़ाव कोरौना की ओर प्रस्थान कर रहे है ।  सिर पर सामान की गठरी उठाए महिलाएं, बच्चे व बुजुर्गों में परिक्रमा के प्रति गहरी आस्था दिखाई दे रही है । पहला आश्रम के महंत व संत मंडल अध्यक्ष बाबा भरतदास भव्य रथ पर सवार होकर इस धार्मिक परिक्रमा की अगुवाई कर रहे है । कई अखाड़ों के संत उनका सहयोग कर रहे है।

    गाजे बाजे के साथ पहुंचे महंत ने चक्रतीर्थ का पूजन किया । मां ललिता मंदिर चौराहे पर एसडीएम गिरीश कुमार झा , तहसीलदार चंद्रकांत त्रिपाठी, सीओ एमपी सिंह , अधिशाशी अधिकारी आरपी सिंह आदि ने सभी संत , महंतो और श्रद्धालुओं पर फूल बरसाकर भब्य स्वागत किया है तथा पुलिस को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रखने का निर्देश दिया है । सभी परिक्रमार्थी प्रथम पडाव कोरौना पहुंच कर भगवान व्दारिकाधीश के दर्शन करेगे वहीं रात्रि विश्राम करेगें । सुबह होते ही अगले पड़ाव हर्रैया के लिए प्रस्थान करेगे । 

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    आदि काल से होता चला रहा है यह धार्मिक होली परिक्रमा...

    सतयुग में महर्षि दधीचि के द्वारा यह परिक्रमा की गई थी । त्रेतायुग में भगवान श्रीराम ने अपने कुटुंबजनों के साथ यह 84 कोसीय परिक्रमा की थी । द्वापरयुग में श्रीकृष्ण के अलावा पाण्डवों द्वारा इस क्षेत्र की धार्मिक परिक्रमा की गई थी । आज सभी लोग उसी का अनुशरण करके यह धार्मिक परिक्रमा करते है । 

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    नैमिष से हुई थी शृष्टि की रचना...

    यह क्षेत्र विश्व का केन्द्र बिन्दु माना जाता है । यहीं से सृष्टि की रचना का भी आरम्भ होना बताया जाता है । यहीं पर आदि गंगा गोमती नदी के तट पर मनु  सतरूपा द्वारा हजारों वर्षों तक कठोर तप किया गया था । इस 84 कोस की भूमि पर 33 कोटि देवी देवताओं ने वास किया है । यहीं पर 88 हजार ऋषियों ने अपने-अपने आश्रम बनाकर कठिन तपस्या की है । जिसके प्रमांण मिश्रित और नैमिषारण्य में आज भी मौजूद है । 

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    यह है परिक्रमा मेला 2021 की तिथियां...

    13 मार्च शनिवार अमावस्या नैमिषारण्य ,14 मार्च रविवार प्रथम पडाव कोरौना , 15 मार्च सोमवार हर्रैया , 16 मार्च मंगलवार नगवा कोथांवा , 17 मार्च बुधवार गिरधरपुर उमरारी  , 18 मार्च गुरुवार साक्षी गोपालपुर , 19 मार्च सुक्रवार देवगवां , 20 मार्च शनिवार मडेरुवा , 21 मार्च रविवार जरिगवां , 22 मार्च सोमवार नैमिषारण्य , 23 मार्च मंगलवार कोल्हुवा बरेठी , 24 मार्च बुधवार से मिश्रित का पंचकोसी परिक्रमा तथा 28 मार्च को सभी परिक्रमार्थी दधीचि कुंड तीर्थ में बुडकी स्नान कर अपने अपने ग्रह जनपदों को वापस चले जाएगे|

    संदीप चौरसिया, मिश्रिख

    आईएनए न्यूज़ एजेंसी, सीतापुर, उत्तरप्रदेश

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