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    पलवल: 6-6 फिट लम्बी पिचकारियों से बरसाया 10 क्विंटल रंग

    पलवल: 6-6 फिट लम्बी पिचकारियों से बरसाया 10 क्विंटल रंग 

    पलवल| पलवल के गाँव सोंध , बंचारी में धुलेंडी के दूसरे दिन फूलडोल मेले का आयोजन किया गया  इसमें 4  से 6 फिट की पिचकारियों से लोगों ने 10  क्विंटल रंग बरसाया ! गांव सोंध में 18 चौपालों रंग  बरसाया गया तो वहीँ गाँव बंचारी में 7 चौपालों पर रंग बरसाया गया !  सोंध गाँव व्रज के सबसे बड़े गावों में से एक है इन गावों में यहां  रंग  कृष्ण काल के समय से ही बरसता है ! गांवों में लाखों रुपए का रंग  बरसाया जाता  है और इस रंग का खर्च गाँव की पंचायत करती है ! रंग में लोग हुए सराबोर लोग  हुए रंग के कारन अनपहचान हो जाते है|

    होडल व्रज भूमि ( छेत्र ) के सोंध और बंचारी गाँव एक  इतिहासिक गाँव हैं जिनका नाम पुराणों से चला आ रहा है  आज के दिन गाँव सोंध में 18  चौपालों पर  पिचकारियों से रंग बरसाया जाता है तो गाँव बंचारी में 7  चौपालों पर और लोगों के बीच एक बड़ा कम्पटीशन होता है ! यह कम्पटीसन 2  बजे से लेकर 6  बजे तक होता है ! ! लोग पिचकारियों को पेट से दबाकर चलाते हैं और एक दूसरे पर रंग से प्रहार करते हैं ! इन गांवों  का इतिहास भगवान कृष्ण के समय से जुड़ा हुआ हे इन गांवों में फागुन मॉस सुरु होते ही रंग बरसने लगता है और धुलेडी के दो दिन बाद तक गांव  में रंग बरसता है ! गांव  में होरियारे  की टोलियाँ गली गली में जाकर महिलाओं पर रंग व् गुलाल बरसाती है और धुलेडी के दो दिन बाद यह होरियारे इन गावों की सभी चौपालों पर एक दुसरे पर रंग व् गुलाल बरसाते हैं इनकी टोलियाँ होती हैं एक टोली चौपाल के ऊपर से व् दूसरी टोली चौपाल के नीचे से एक दुसरे पर रंग व् गुलाल बरसाती है ! यह इनका कम्टीशन होता हे की कोन सो टोली कोन सी हरा सकती है ! इन चौपालों पर गाँव की पंचायत व् ग्रामीण बड़े बड़े ड्रामों में रंग घोलते हैं|

    सभी होरियारों के हाथों में बड़ी बड़ी पिचकारियाँ होती है  जिनकी लम्बाई लगभग 3 से 4 फिट होती है और वजन 8 से 10 किलो के बीच होता हे इन पिचकारियों को पेट के बल से चलाया जाता  है ! यह एक दुसरे के मुहं पर हराने के लिए पिचकारियों से रंग बरसाते हैं एक टोली चौपाल के ऊपर होती है और दूसरी टोली चौपाल के नीचे होती है ! गावों के सभी चौपालों पर यह टोलियाँ रंग  व् गुलाल बरसाती है !गावों की महिलाऐं इनको छतों से देखती हैं इस दिन यह महिलाओं पर रंग व् गुलाल नहीं डालते हैं यह दो दिन तक आपस मे ही एक दुसरे पर रंग व् गुलाल बरसाते   हैं ! व्रज में होली के इस  त्यौहार कि सुरुआत  बंसत पंचमी से शुरू  हो जाती है और इसी दिन से व्रज छेत्र में होली खेलते हैं ! आज होली के बाद  गांव  सौन्ध  देखने को मिला जहाँ गाव गांव के बुजुर्ग लोगों ने चौपालों पर एकत्रित होकर  होली के पर्व कि  चौफईयों गाई गईं ! इस होली में संस्कृति की झलक  वहीं साहित्य और संस्कारों के विषय पर पर चौपाइयां गाई गईं|

    इस तरह से गावों के सभी नोजवान व् बुजुर्ग गावों की सभी चौपालों पर इस तरह से पिचारियों से एक दुसरे पर रंग व् गुलाल बरसाकरभाईचारे को दरसाता है की इनके अन्दर आपस में कितना प्रेम है की जो एक दुसरे के मुहूँ पर पिचारियां चलाते है और रंग व् गुलाल बरसाते हैं इनका यह प्रेम व्रज के प्रेम को दर्शाता है गाँव के हजारों नोजवान व् बुजुर्ग एक साथ मिलकर हर चौपाल पर सीस तरह से पिचकारियों से रंग बरसाते हैं इन गावों के इस मेले को देखने के  लिए दुरदराजों से लोग आते हैं और इस मेले का आनद लेते है| तस्वीरों में दिखाई दे रहे यह इन गावों के नोजवान आपस में एक दुसरे के मुहूँ पर किस तरह से बड़ी बड़ी पिचकारियों  से रंग बरसा रहे हैं ! जस्ब इस बारे में गाँव के सरपंच व् ग्रामीणों से बात की तो इन्होने इस मेले के बारे में व् रंग के बारे में जानकारी  देते हुए बताया की किस तरह से इस मेले के आयोजन किया  जाता हे !

    ऋषि भारद्वाज
    आईएनए न्यूज़ एजेंसी, पलवल

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