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    विज्ञान दिवस पर विशेष- आंख का फड़कना कोई शगुन- अपशगुन नहीं...

    विज्ञान दिवस पर विशेष-  आंख का फड़कना कोई शगुन- अपशगुन नहीं...


    हर घटना के पीछे कुछ कारण होते हैं। इन्हीं कारणों का विश्लेषण वैज्ञानिक समझ का विकास है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण के विचार को आचरण में लाने के लिए इसी कार्य - कारण भाव को जानना जरूरी है। इस हेतु प्रश्न करना और तर्क शक्ति द्वारा समाधान जरूरी शर्त है। समाज में व्याप्त अंधविश्वासों एवं मिथकों को भी वैज्ञानिक समझ के साथ दूर करने के प्रयास निरंतर जारी रखे जाने की जरूरत है। हमारा संविधान भी समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास करना; हर नागरिक का कर्तव्य बताता है। सीखने की प्रक्रिया में आंख सबसे महत्वपूर्ण अंग है जो सबसे पहले हिस्सा लेती है।

    आंख फड़कना (Eyelid Twitches) शगुन-अपशगुन के कारण नहीं बल्कि मेडिलाइन प्लस में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार नर्वस सिस्टम (तंत्रिका संबधी विकारो) से संबंधित प्रॉब्लम की वजह से होने वाली परेशानी है।

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    आंख का बार-बार फड़कना (Eyelid Twitches) क्या है? 

        ‌       आंख का बार-बार फड़कना एक सामान्य परेशानी है। मेडिकल टर्म में आंख का बार-बार फड़कना मायोकेमिया (Myokymia) कहा जाता है। आईलिड ट्विचिंग होने पर आंख की निचली पलक तेजी से फड़कने लगती है और इसी कारण से आंख का ऊपरी हिस्सा भी फड़कने लगता है। कई बार तो आंख कुछ मिनटों या सेकंड्स तक फड़कने के साथ ही अपने आप रुक भी जाता है, लेकिन कभी-कभी आईलिड ट्विचिंग लगातार कई सप्ताह तक फड़कने लगती है। अगर कई दिनों तक सिर्फ आईलिड ट्विचिंग हो, तो इससे कोई नुकसान नहीं हो सकता है। लेकिन अगर आईलिड ट्विचिंग के साथ-साथ दर्द, जलन या चुभन जैसी तकलीफ होती है, तो ऐसी स्थिति में डॉक्टर से कंसल्ट करना चाहिए।

     आंखों के फड़कने के कई कारण हो सकते हैं। जैसे: 


     तनाव (Tension)- 

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            जब कोई व्यक्ति तनाव में रहता है, तो उस दौरान बॉडी भी अलग-अलग तरह से रिस्पॉन्ड कर सकती है। नैशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नॉलजी इन्फॉर्मेशन (NCBI) में छपी एक रिपोर्ट पर के मुताबिक आईलिड ट्विचिंग तनाव, एंग्जाइटी या फिर थकावट की वजह से होने वाली परेशानी है।


     अनिंद्रा (sleeplessness)- 

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             अनिंद्रा यानी नींद ना आना भी आंख फड़कने के कारणों में से एक है। इसलिए रोजाना 7 से 8 घंटे की नींद जरूरी है।


     आंख पर ज्यादा दबाव पड़ना- 

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    अगर हम लगातार कंप्यूटर पर काम करते हैं, ज्यादा से ज्यादा वक्त फोन पर बिताते हैं या जरूरत से ज्यादा टीवी देखते हैं, तो इससे आंखों पर दबाव पड़ता है। ऐसी स्थिति में भी आईलिड ट्विचिंग होने की संभावना बढ़ जाती है।


     एलर्जी (Allergy)- 

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           आंखों में खुजली की समस्या रहना, आंख से पानी आना या सूजन होने की वजह से भी आंखें फड़क सकती हैं। ऐसी स्थिति में आंखों मलने से नुकसान पहुंचने के साथ-साथ आईलिड ट्विचिंग का खतरा बना रहता है। यही नहीं जिन लोगों को ड्राई आइज की समस्या रहती है, उन्हें भी आंख फड़कने की समस्या हो सकती है।


     बेल्स पाल्सी (Bell’s palsy)- 

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     ‌‌        आधे फेस (Half of the face) की मांसपेशियां को अस्थाई रूप से कमजोर पड़ना या पैरालिसिस होना बेल्स पाल्सी कहलाता है। चेहरे को कंट्रोल करने वाले नर्व के दबने या सूजने की वजह से भी हो सकता है। ऐसा होने पर चेहरे का एक साइड दूसरे साइड की मुकाबले ज्यादा कड़ा या सूज सकता है। कभी-कभी बेल्स पाल्सी भी आंख फड़कने का कारण हो सकते हैं।


     कैफीन का सेवन- 

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             ज्यादा मात्रा में कैफीन के सेवन से भी आंख फड़कने की समस्या हो सकती है। इसलिए कैफीन युक्त खाद्य पदार्थ जैसे कॉफी, चाय और चॉकलेट जैसे खाद्य पदार्थों या पेय पदार्थों का सेवन कम से कम करें।


     एल्कोहॉल का सेवन- 

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              अगर आप नशीले पदार्थों जैसे एल्कोहॉल या कोई अन्य पदार्थों का सेवन करते हैं, तो इससे भी आपकी आंखें फड़क सकती हैं।


     पोषक तत्वों की कमी- 

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                शरीर में पोषक तत्वों की कमी कई सारी शारीरिक परेशानियों को पैदा करती हैं। ठीक वैसे ही अगर मैग्नीशियम जैसे तत्वों की कमी वजह से आंख फड़कने की समस्या हो सकती है।


     दवाओं का सेवन- 

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     कुछ खास तरह की दवाएं जैसे एंटीएपीलेप्टिक(Antiepileptic एंटीसाइकोटिक(Antipsychotic) की वजह से आंख फड़कने की समस्या हो सकती है। अगर आपके हेल्थ एक्सपर्ट ने एंटीपीलेप्टिक या एंटीसाइकोटिक जैसी दवाओं को लेने की सलाह दी है, तो उतने ही दवाओं का सेवन करें जितना डॉक्टर द्वारा आपको प्रिस्क्राइब किया गया है। जरूरत से ज्यादा डोज लेने पर शारीरिक परेशानी बढ़ सकती है।


     आईलिड ट्विचिंग से बचने के घरेलू उपाय क्या है? 

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               अगर आप बार-बार आंख फड़कने (Eyelid Twitches) की समस्या से परेशान रहते हैं, तो कुछ घरेलू उपायों को फॉलो कर इस परेशानी को दूर किया जा सकता है। इन घरेलू उपायों में शामिल है:

     ‌      नियमित रूप से हेल्दी डायट फॉलो करना। जैसे सुबह ब्रेकफास्ट में दूध, अंडा, ओट्स और फलों का सेवन करना। लंच के दौरान दाल, हरी सब्जी, रोटी, चावल और सलाद खाएं। स्नैक्स के दौरान हेल्दी स्नैक्स का विकल्प ढूंढें जैसे फ्रूट सैंडविच या उबले अंडे। वहीं डिनर के दौरान रोटी, हरी सब्जी, दाल और सलाद का सेवन करें और साथ ही रोजाना दो से ढ़ाई लीटर पानी का सेवन करें।

    तनाव से बचें। आप चाहें तो स्ट्रेस फ्री रहने के लिए अपने दोस्तों से बात कर सकते हैं या अपने पसंदीदा कामों को भी कर सकते हैं। ध्यान रखें तनाव की वजह से कई अन्य गंभीर शारीरिक परेशानी शुरू हो सकती है। इसलिए तनाव से बचकर रहें।

    रेग्यूलर 7 से 8 घंटे सोने की आदत डालें। सोने के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल न करें। यह भी ध्यान रखें की सोने से 3 से 4 घंटे पहले कैफीन जैसे चाय या कॉफी का सेवन न करें।

    इन छोटी-छोटी बातों को फॉलो करने से आप बार-बार आंख फड़कने की समस्या से बचने के साथ ही अन्य शारीरिक या मानसिक परेशानियों से भी बच सकते हैं। अगर इन उपायों से आपकी तकलीफ ठीक नहीं होती है, तो डॉक्टर के पास जाना ही सर्वोत्तम विकल्प है।

    लेखक- सैयद समीना खालिद 

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