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    “टीकाकरण से ही मिल सकती है कोरोना से विश्वसनीय सुरक्षा”

    टीकाकरण से ही मिल सकती है कोरोना से विश्वसनीय सुरक्षा

    नई दिल्ली|    दो सीरोलॉजिकल सर्वेक्षणों और मॉडल अनुमानों के अनुसार भारत की एकबड़ी आबादी में इस समय सार्स-सीओवी-2 वायरस के खिलाफ प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमताविकसित हो चुकी है। हालांकि, मौजूदा प्रमाणों से पता चलता है कि एं टीबॉडिज की उपस्थिति के कारण बनने वाली यह रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक समय तकप्रभावीनहींरहेगी।इसकीतुलनामें टी-सेल द्वारा बनी रोग प्रतिरोधक क्षमता कहींलम्बेसमयतक प्रभावीरहती है।इसीलिएवैज्ञानिकोंकायहस्पष्टमतहैकिकोरोनावायरसकेविरुद्धदीर्घकालिकएवंविश्वसनीयसुरक्षा सिर्फ टीकाकरण से ही मिल सकती है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा जारी वक्तव्य में यह बात कही गई है।

    चेन्नई स्थित गणितीय संस्थान के निदेशक राजीव एल. करंदीकर, वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के महानिदेशक डॉ शेखर सी. मांडे और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), हैदराबाद के प्रोफेसर एम. विद्यासागर जैसे विशेषज्ञों की टिप्पणियों पर आधारित इस वक्तव्य में भारत में तेज गति से हो रहे टीकाकरण की तुलना शेष विश्वसे की गई है। इसमें कहा गया है कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा स्थापित कोविड-19 नेशनल सुपर मॉडल कमेटी के अनुमान के अनुसार मार्च, 2021 के अंत तक कोविड-19 के सक्रिय मामलों की संख्यागिरकर कुछ हजार में सिमट जाएगी।

    डॉ शेखर सी. मांडे (बाएं)प्रोफेसर एम. विद्यासागर (मध्य) औरराजीव एल. करंदीकर (दाएं)


    विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कहा है कि सार्स-सीओवी-2 वायरस के कारण फैल रही कोविड-19 महामारी में वृद्धि के सार्वजनिक रूप से उपलब्धआंकड़ों से संकेत मिलता है कि भारत में इसका संक्रमण सितंबर
    , 2020 में किसी समय अपने चरम पर था और उसके बाद से यह लगातार घट रहा है। 11 सितंबर, 2020 को जहां अधिकतम 97,655 प्रतिदिन नये मामले मिले थे, वहीं फरवरी, 2021 के पहले सप्‍ताह में यह संख्‍या घटकर 11,924 पर आ गई। इसमें से आधे मामले केरल में हैं। इस बात को सुनिश्चित करना जरूरी है कि संक्रमणकीदरकोदोबाराबढ़नेनदिया जाए। जैसा कि इटली, ब्रिटेन और अमरीका जैसे कई देशों में हुआ है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि टीकाकरण से प्राकृतिक संक्रमण के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता मिलती है, जो इस महामारी के नियंत्रण के लिए एक अचूक अस्त्रहै।हालांकिकुछ शोधकर्ता मानते हैं कि पिछले संक्रमणों के कारण बनी एंटीबॉडिज की मौजूदगी, टीकाकरण के मुकाबले वायरस के रूपांतरण से दोबारा होने वाले संक्रमण के खिलाफ कम सुरक्षा देती हैं। इसीलिए, कहा जा रहा है कि मान्यवैक्सीनके जरिये राष्ट्रव्यापीटीकाकरण कार्यक्रम को शीघ्रतासेपूरा किया जाना अनिवार्यहै।

    टीकों से संबंधित एक रोचकपहलू मृत वायरस से तैयार कियेगएटीके से बनी एंटीबॉडिजऔरस्पाइकप्रोटीन से तैयार टीके से बनी एंटीबॉडिज को लेकर है।यह उल्लेखनीय है कि मृत वायरस से तैयार टीके से बनी एंटीबॉडिज, स्पाइक प्रोटीन से तैयार टीके से बनी एंटीबॉडिज के मुकाबले रूपांतरित वायरस के विरुद्धकहींअधिकप्रभावीहैं।देशव्यापी टीकाकरण की आवश्यकताके संदर्भ मेंभारत के नियामक प्राधिकारों ने दोवैक्सीनों को मंजूरी दी है उनमें से एक (कोविशील्‍ड) को बिना शर्त और दूसरी (कोवैक्‍सीन) को क्लिनिकलट्रायल मोड में मंजूरी मिली है। विशेषज्ञों की समिति इस बात से सन्तुष्टहै कि दोनों वैक्सीनसुरक्षित हैं और कोरोनावायरसकेविरुद्धप्रभावीप्रतिरक्षा उत्पन्नकरती हैं।

    इन दोनों वैक्सीन को लेकर शुरू किए गए टीकाकरण अभियान को कुछ लोगों ने जल्दबाजी में उठाया गया कदम बताकर इसके महत्व को कम करने का प्रयास किया। हालांकि, डब्‍ल्‍यूएचओ ने कहा है कि किसी वैक्सीन को आपात स्थिति में मंजूरी देने के पहले भी यह देखना जरूरी है कि वह 50 प्रतिशत तक प्रभावी अवश्यहो। कभी-कभी 40 प्रतिशत की प्रभावशीलता वाली वैक्सीन भीकुछ हद तक संरक्षण दे देती हैं। लेकिन, कभी-कभी 80 प्रतिशत की प्रभावशीलता वाली वैक्सीन लगने के बादभीव्यक्तिसंक्रमणकीचपेटमेंआसकताहै। ऐसेमें,यहअपेक्षाकीजातीहैकिनियामक प्राधिकार इस दिशा-निर्देश से बंधे न रहकरविवेकपूर्णनिर्णय लेंगे। इसके साथ ही, यह भी आवश्यक है कि बेशक लक्षित आबादी में हर किसी का (18 वर्ष से अधिक उम्र) टीकाकरण हो जाए, तब भी लोगों को सुरक्षा मानदंडोंका पालन करते रहना होगा।

    वायरस के प्रसार के साथ-साथ इसके रूपांतरण को रोकने पर भीजोर दिया जा रहा है। इसके लिए सिर्फ किसीएकदेशकेप्रत्येकव्यक्तिका टीकाकरण हीपर्याप्तनहीं है। महामारी का अंत करने के लिए दुनिया भर के लोगों का शीघ्रतासेटीकाकरण किया जाए। भारत सिर्फ अपनी टीकाकरण जरूरतों को पूरा करने में ही सक्षम नहीं है, बल्कि वह इस मामले में पूरे विश्वकी मदद कर सकता है। वैक्सीनकीवैश्विकमांगकोपूराकरनेमेंअपनायोगदानदेकरऔर वैश्विक समुदाय में इस महामारी से लड़ने की उम्मीद बँधाकरभारत नेमहामारी जन्यसंकटकालमेंविश्वमंचपरअपनीअग्रणीउपस्थितिदर्जकरायीहै।

    INA NEWS(Initiate News Agency)

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