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    सांसद राजकुमार चाहर सिविल एन्‍कलेव के निर्माण को अबाध करवायेंगे

    सांसद राजकुमार चाहर सिविल एन्‍कलेव के निर्माण को अबाध करवायेंगे

    अधिक तथ्‍यपरक जानकारियाँ सुप्रीम कोर्ट में रखने का प्रयास होगा

    आगरा| फतेहपुर सीकरी लोकसभा क्षेत्र के सांसद राजकुमार चाहर ने कहा कि सिविल एन्‍कलेव की परियोजना को सुप्रीम कोर्ट में तथ्‍यपरक जानकारियाँ रखवाने का हर संभव प्रयास किया जायेगा, जिससे यह मामला अब और अधिक लंबित न हो, यह कहना है फतेहपुर सीकरी के सांसद राज कुमार चाहर का। 'सिविल सोसायटी आफ  आगरा' के प्रतिनिधि मंडल से सिविल एन्‍केलव के निर्माण पर चर्चा करते हुए उन्‍होंने कहा कि 'आगरा-फतेहपुर' सीकरी की पर्यटन आधारित अर्थव्‍यवस्‍था में सिविल एन्‍कलेव को वायुसेना परिसर से  बाहर लाया जाना एक सबसे अहम जरूरत है। उन्‍होंने कहा कि वर्तमान में कितनी भी फ्लाइटें हम चालू करवा लें किन्‍तु आम शहर वासियों की पहुंच से सिविल एन्‍कलेव बाहर होने के कारण वह लाभ नहीं मिल पाता जो कि नागरिक उड्डयन से जुडे शहर के लोगों को मिलना चाहिये|

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    32 मकान मालिकों को दिलवाया जाये मुआवजा...

     सिविल सोसायटी ऑफ़ आगरा ने चाहर से अनुरोध किया कि सिविल एन्‍कलेव के लिये चिन्‍हित जमीन पर बने हुए  जिन 36 मकानों का अधिग्रहण किया जाना है, उनके रह वासियों में से जिन 32 ने अधिग्रहण के लिये अपनी अनुमति दी हुई है, उन्‍हे मुआवजा राशि का भुगतान सुनिश्‍चित करवायें ।सांसद के संज्ञान में लाया गया कि शासन से इसके लिये मुआवजा राशि  आगरा प्रशासन को प्राप्‍त हो चुकी है। अगर चालू वित्‍तीय वर्ष के पूरा होने से पूर्व इन मकानों का अधिग्रहण हो गया तब तो कोई बात नहीं है,क्‍यों कि चालू वित्तीय वर्ष ही इसके लिये अवधि निर्धारित है। विलम्‍ब या अन्‍य कारणों से  अधिग्रहण की कार्यवाही को लेकर पेचीदगियां बढ सकती हैं, साथ ही शासन पर अधिक आर्थिक भार बढना तय है।

    शेष चार मकानों का मामला भी केवल आम सहमति की स्‍थिति न बन सकने के कारण ही अटका हुआ है। मध्‍यस्‍थ की प्रभावी भूमिका से इन मकानों के अधिग्रहण को संभव बनाया जा सकता है।सिविल सोसायटी ऑफ़ आगरा  किसी भी संपत्‍ति के फोर्स एक्‍यूजेशन के पक्ष में कभी नहीं है और न हीं चाहती है कि जब तक अन्‍य विकल्‍प हो तब तक इसका उपयोग नागरिकों से सपत्‍तियां अधिग्रहण करने में हो।

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     सुप्रीम कोर्ट में खडी की गयी शंकायें केवल काल्‍पनिक...

    श्री चाहर से 'एम सी मेहता बनाम संघ सरकार'  याचिका को लेकर भी चर्चा हुई तथा इस बात पर वेदना जतायी गयी कि अब तक इस याचिका के तहत जो भी आदेश आगरा मे क्रियान्‍वित करवाये गये है उनके परिणाम स्‍वरूप न तो आगरा का पर्यावरण ही सुधर सका है और नहीं ताजमहल के अनुरक्षण की स्‍थिति में तब्‍दीली आयी है।सिविल सोसायटी ऑफ़ आगरा  ने इस वाद में हवाई यातायात बढने से वायु प्रदूषण पर प्रतिकूल प्रभाव पडने की आशंका उठाये जाने को औचित्‍य हीन और काल्‍पनिक  बताया । सिविल सोसायटी ऑफ़ आगरा की ओर से कहा गया कि केन्‍द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और ताज ट्रिपेजियम जोन अथार्टी इस वाद में पक्षाकार है और उन्‍हें इस प्रकार की आपत्‍तियों का अपने हलफनामों में प्रतिवाद करना चाहिये। सोसायटी की ओर से बताया गया कि ताजमहल का एयर कवर 'नो फ्लाइंग जोन है और हवाई जहाज सामान्‍यता एयरपोर्ट अथार्टी के द्वारा चिन्‍हित एयर  कॉरीडोर में होकर ही उडता है। जिसकी   ऊंचायी बादलों की निचली परत से भी कहीं ऊपर (31 से 40 हजार फुट) के बीच होती होती है।  जबकि वायु मंडल की निचली परत जिसमें ताजमहल(73 मीटर या 239ण्‍5 मीटर ) की ऊंचाई महज 73 मीटर ही है। हवाई जहाज  वायु मंडल की दूसरी परत पर उडते हैं।  इतनी ऊंचाई की वायु प्रदूषण स्थिति का अध्‍ययन करना ताज ट्रिपेजियम जोन अथार्टी का कभी अध्‍ययन विषय नहीं रहा।न हीं प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और एयरपोर्ट अथार्टी के पास हवाई जहाज के  इंधन से प्रदूषण फैलने के कोई आंकड़े उपलब्‍ध नहीं हैं।

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    एयर टर्बाइन फ़्यूल से प्रदूषण होता ही नहीं...

    एयर टर्बाइन फ़्यूल (जेट ईंधन ) एक केरोसिन-प्रकार का ईंधन है जो हाइड्रोकार्बन अणुओं से बना होता है और एक रंगहीन, दहनशील, सीधे चलने वाला तरल पेट्रोलियम डिस्टिलेट है. आमतौर पर एक रंगहीन या भूरे रंग का तरल होता है, दो सबसे व्यापक रूप से उपयोग किये  जाने वाली श्रेणियां जेट ए और जेट ए -1 हैं। जेट ईंधन इसका मुख्य उपयोग जेट इंजन ईंधन के रूप में किया जाता है। दुनिया भर के देशों के समान ही भारत में भी जेट ए-1 को इस्‍तेमाल में लाया जाता है। इसके इस्‍तेमाल से आगरा ही नहीं दिल्‍ली तक में प्रदूषण पर प्रतिकूल असर पडना  नहीं आंका गया। (इसी के परिणाम स्‍वरूप सफ़दरजंग एयरपोर्ट, पालम एयरपोर्ट, इन्‍दिरा गांधी एयरपोर्ट और हिंडन एयरपोर्ट बनने के बाद अब एन सी आर में ही नोयडा में एक और एयरपोर्ट बनाने की अनुमति भी मिल गयी है।

    सांसद राजकुमार चाहर ने कहा कि वह उपरोक्‍त जानकारियों को वह अत्‍यंत गंभीर मानते हैं और समझते हैं कि कही न कहीं सिविल एन्‍कलेव आगरा के संबंध में सही प्रकार से जानकारियाँ नहीं रखी गयी हैं । सांसद के रूप में  पर्यावरण वन एवं मौसम परिवर्तन मंत्रालय से इनके बारे में आधिकारिक रूप से जानकारी मांगेंगे और  सरकार की ओर से दाखिल होने वाले हलफनामों में इनका उल्‍लेख सुनिश्‍चित करवाने को कहेंगे।

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    मुख्‍यमंत्री की प्राथमिकता का प्रोजेक्‍ट...

    श्री चाहर ने कहा कि धनौली,बल्‍हेरा और अभयपुरा  में सिविल एन्‍कलेव बनाये जाने का काम अब रुकना नहीं चाहिये , यह प्रोजेक्‍ट एक शिफ्टिंग प्रोजेक्‍ट है और  मुख्‍यमंत्री जी की प्राथमिकता में है अगर कोई व्‍यवधान आता है तो उसका समाधान करना क्षेत्रीय सांसद होने के नाते उनका दायित्‍व है।वैसे भी अवस्‍थापना सुविधाओं संबंधी कार्यों के लिये ताज ट्रिपेजियम जोन में अनुमति नियम संबंधी नियमों में बदलाव किया गया है। एयर फोर्स कैंट राजकुमार चाहर का मानना है कि धनौली, अभयपुरा, बल्‍हेरा और धनौली जनपद का एक विशिष्‍ठ क्षेत्र है,देश का सबसे महत्‍वपूर्ण एयर फोर्स स्‍टेशन , पैराशूट ट्रेनिंग स्‍कूल(पी टी एस) और उसका ड्रापजोन  जैसी महत्‍वपूर्ण अवस्‍थापनाये यहीं हैं । अब सिविल एन्‍कलेव भी यही बनाया जा रहा है। राष्‍ट्रीय सुरक्षा तथा किसानों के हित में इस क्षेत्र को एयर फोर्स कैंट के रूप में विकसित किया जाये। उन्‍होंने कहा कि नगर निगम के सीमा विस्‍तार में क्षेत्र के गांव नगर निगम का वार्ड भर बनकर रह जाने से अच्‍छा है क्षेत्र अलग निकाय बने।

    सिविल सोसायटी ऑफ़ आगरा  के जनरल सैकेट्री अनिल शर्मा ने कहा कि पूरे क्षेत्र में अधिक नागरिक अवस्‍थापना सुविधाओं को विकसित करने के लिये अधिक संसाधन जरूरी हैं जो छावनी बनने मात्र से ही संभव हो जायेगा। श्री शर्मा ने बताया कि इस संबंध में एयरफोर्स स्‍टेशन आगरा के स्‍टेशन कमांडर को सोसायटी की ओर से पत्र लिखा जा चुका है ।इनके अलावा डिफेंस स्‍टेट सेंट्रल कमांड, तथा संयुक्‍त सचिव रक्षा मंत्रालय को संभावना अध्‍ययन करवाने को प्रस्‍ताव भेजे जा चुके हैं।

    श्री चाहर ने कहा कि प्रथम दृष्‍टयत: तो यह प्रस्‍ताव उन्‍हें पूरे क्षेत्र के हित में ही लग रहा है।धनौली तो पहले से ही सेंसस टाउन है। इस संबंध में वह मंत्रालय से भी वार्ता करेंगे।शहरी सीमा विस्‍तार में  गाँवों के नगर निगम सीमा में विलीनी करण कर एक या दो वार्ड वालर क्षेत्र बनाये जाने की अपेक्षा तो इस क्षेत्र को अलग निकाय बनाया जाना ही अधिक उपयुक्‍त मानते हैं।

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    सिविल सोसायटी ऑफ़ आगरा  के सदस्‍यों को अधिकारियों से मिलवायेंगे...

    सिविल सोसायटी ऑफ़ आगरा के प्रतिनिधि मंडल में अनिल शर्मा, पार्षद डा शिरोमणि सिह तथा राजीव सक्‍सेना शामिल थे। सांसद ने सोसायटी के प्रतिनिधि मंडल को यह भी अश्‍वस्‍त किया कि अगर जरूरत पडी तो वह उनकी सीधी मुलाकात नागरिक उड्डयन मंत्रालय और पर्यावरण ,वन एवं मौसम परिवर्तन मंत्रालय के अधिकारियों से भी करवा देंगे।

    आईएनए न्यूज़ एजेंसी  

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