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    अयोध्या: गांवों में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की बहने लगी बयार, जनता नेता, प्रत्याशी, अधिकारी सब सुझाव मे व्यस्त

    अयोध्या: गांवों में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की बहने लगी बयार, जनता नेता, प्रत्याशी, अधिकारी सब सुझाव मे व्यस्त 

    अयोध्या। अयोध्‍या जनपद ही नही पूरे उत्तर प्रदेश मे  गांव गांव  में  पंचायत चुनाव की सरगर्मी दिखाई पड़ी रही  है  अभी आरक्षण की सूची नही आई है।फिर भी संभावित प्रत्याशी  अपना चुनाव प्रचार  सोशल मीडिया होल्डिंग बैनर के माध्यम से  घर घर पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं  और लुभावने वादे अभी से  करना शुरू कर दिए हैं! अयोध्या जनपद में कुल 794 ग्राम पंचायतों में से 523 ग्राम पंचायत आरक्षित और 271 ग्राम पंचायत से अनारक्षित है किंतु अभी तक यह नहीं पता है कि कौन सी गांव सभा आरक्षित है कौन सी नहीं इसका अंदाजा फरवरी के अंत या मार्च तक पता चलेगा ।अपुष्ट  जानकारी  के अनुसार  अनुसूचित जाति  के लिए 179 जिसमे  महिला  के लिए 65 सीट शामिल  है। 114 सीट पुरूष  के लिए  और पिछले जाति के लिए 214  सीट आरकछित है। कुल महिला के लिए 130सीट है।  चुनाव  की तैयारियों में जुटे उम्मीदवार सोशल मीडिया पर  बधाईयों का  दौर अपना वोट साधने में नहीं चूक रहे हैं|

      त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव न्यायालय  के आदेश के अनुसार  होगा मार्च-अप्रैल  में पंचायत चुनाव हो जाएंगे जैसा कि पंचायत चुनाव नवंबर दिसंबर 2020 में ही हो जाने थे किंतु कोरोना संकट के चलते पंचायत चुनाव की तैयारी नहीं हो सकी थी और ना ही चुनाव हो सके जिस कारण  पंचायत चुनाव कराने की तैयारियां अब तेज हो गई है अनुमान लगाया जा रहा है। उसी के मद्देनजर गांव गांव में खासतौर से मलाईदार पद ग्राम प्रधान के लिए लोग एड़ी चोटी एक करना शुरू कर दिए हैं। सुप्रभात और शुभ रात्रि करके अपने वोटरों को साधने में जूटा है. इतना ही नहीं कुछ ऐसे भी उम्मीदवार हैं जो गांव में विकास से संबंधित मुद्दा भी वायरल कर रहे हैं जिससे गांव में रहने वाले लोगों को अपने पक्ष में कर सकेंं. वैसे भी अभी तक जो माहौल देखने को मिल रहा है उससे एक बात तो स्पष्ट है की फेसबुक‚  व्हाट्सएप‚ टि्वटर पर लोग समूह बनाना शुरू कर दिया और अपना प्रचार प्रसार करने में जुटे हुए हैं|

    एक समय था जब पंचायत चुनाव के आते ही गांव के दीवारों पर वॉल पेंटिंग कराई जाती थी, उसके बाद घरों के दरवाजे पर और दीवारों पर प्रत्याशियों के पोस्टर चिपका दिए जाते थे ,यहां तक की विद्युत पोल और सरकारी  आवास भी इससे अछूते नहीं रहते थे लेकिन गुजरते दौर में पंचायत चुनाव के प्रचार में भी बदलाव देखने को मिल रहा है।  सोशल मीडिया पर प्रत्याशियों की सक्रियता बता रही है कि इस बार डिजिटल रूप से प्रचार करने की तरफ अधिक लोगों का रुझान है. ऐसा इसलिए भी किया जा रहा है क्योंकि डिजिटल मीडिया पर प्रचार करने का खर्च ना के बराबर है| आगामी पंचायत चुनाव  में युवाओं की एक अच्छी खासी भागीदारी देखी जाएगी! ग्राम प्रधान के कार्यकाल में आने वाले सरकारी खजाने के पैसे तथा तमाम सुविधाओं ने युवाओं को आकर्षित किया है। इस सिक्के का दूसरा पहलू यह भी है कि पढ़ाई लिखाई करने के बाद कहीं नौकरी न लग पाने या रोजगार न मिल पाने के कारण युवा वर्ग राजनीति की तरफ भी आकर्षित हो रहा है.  गंवई राजनीति में युवाओं की भागीदारी होने के चलते गांव का भी काफी अच्छा विकास हो सकता है।

    देव बक्श वर्मा
    आई एन ए न्यूज़ अयोध्या - उत्तर प्रदेश

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