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    परीक्षा देने आगरा से बैतूल आई महिला ने एक बेटी को दिया जन्म, महिला बोली, बैतूल हमेशा याद रहेगा

    परीक्षा देने आगरा से बैतूल आई महिला ने एक बेटी को दिया जन्म, महिला बोली, बैतूल हमेशा याद रहेगा

    (प्रसव पीड़ा हुई तो दिया बेटी को जन्म, खुशी के इस अविस्मरणीय क्षण को यादगार बनाने रख दिया बेटी का नाम ‘ बैतूल’)

    बैतूल| मध्यप्रदेश के बैतूल में एक ताजा मामला सामने आया है| जहां एक नर्सिंग की छात्रा आगरा से परीक्षा देने बैतुल आयी थी महिला  गर्भवती थी जिसकी डिलेवरी बैतूल में हो गई और उसने अपनी बच्ची का नाम "बैतूल" रख दिया। आपने भारत, नेपाल और ऐसे ही कई देशों के नाम पर बच्चों के नाम सुने होंगे लेकिन एक मां ने इन सबसे अलग अपनी बेटी को  बैतूल में जन्म देने के बाद उसका नाम" बैतूल" ही रख दिया।

    आपको बता दें कि आगरा निवासी यह महिला नर्सिंग की परीक्षा देने बैतूल आई थी। प्रसव वेदना होने पर जिला अस्पताल में उसे भर्ती किया गया। जहां महिला ने एक स्वस्थ बालिका को जन्म दिया। महिला बैतूल से अपने बैतूल को लेकर आगरा रवाना हो गई है। बैतूल के जिला अस्पताल में उनकी बेटी की किलकारी पहली बार गूंजी इसलिए उन्होंने अपनी बेटी का नाम बैतूल को हमेशा याद रखने के लिए बैतूल ही रख दिया। जिले के लिए भी यह गर्व के साथ-साथ रोचक है कि अब जिले के नाम एक बालिका का नाम बार-बार आगरा में गूंजता रहेगा।

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    कुसमा ने बेटी को दिया बैतूल बघेल नाम...

    17 फरवरी को सुबह आगरा से टे्रन से बैतूल पहुंची कुसमा पति मनोज बघेल ने सांझवीर टाईम्स से चर्चा में बताया कि वह नर्सिंग की परीक्षा देने राजा भोज कॉलेज बैतूल आई थी। कुसमा 9 माह से गर्भवती थी। परीक्षा के बाद वह एक दिन रुक गई। 18 फरवरी को जब उन्हें प्रसव पीड़ा प्रांरभ हुई तो जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टर द्वारा चेकअप के बाद प्रसव में समय होना बताया गया। जिसके बाद कुसमा को अस्पताल से वापस ला लिया गया। दो घंटे बाद जब फिर से प्रसव पीड़ा हुई तो कुसमा को जिला अस्पताल में भर्ती कर दिया गया। 18 फरवरी को दोपहर 2.55 पर कुसमा ने स्वस्थ बालिका को जन्म दिया। बैतूल ने उसका दामन खुशियों से भर दिया। पहली बेटी के जन्म पर परिवार और कुसमा इतनी अधिक खुश हुई कि उन्होंने बैतूल को हमेशा याद रखने के लिए अपनी बेटी का नाम ही बैतूल रख दिया।

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    बैतूल हमेशा यादों में रहेगा बैतूल...

    कुसमा ने बताया कि भले ही वह परीक्षा देने बैतूल आई थी, लेकिन बैतूल में उनकी बेटी का जन्म हुआ है इसलिए यह शहर उन्हें हमेशा याद रहेगा। अपनी बेटी का नाम बैतूल भी उन्होंने इसलिए रखा है कि वे चाहकर भी इस शहर को न भूले। आगरा शहर में रहने वाली कुसमा बैतूल से आज आगरा लौट रही है, लेकिन वह बैतूल से बैतूल को लेकर लौट रही है इसलिए वह बेहद उत्साहित है।

    बैतूल से शशांक सोनकपुरिया की खास रिपोर्ट

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