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    शौक ने कबाड़ को बागवानी में कर दिया तब्दील, अनुपयोगी प्लास्टिक का ऐसा उपयोग देखा नही होगा

    शौक ने कबाड़ को बागवानी में कर दिया तब्दील, अनुपयोगी प्लास्टिक का ऐसा उपयोग देखा नही होगा 

    पर्यावरण बचाने का बेहतरीन उदाहरण बना वेस्ट मटेरियल से सजा दी बागवानी, कबाड़ में फलने फूलने लगे फल फूल, सब्जी भी होने लगी पैदा ,अनुपयोगी प्लास्टिक के साथ जूता कप भी बन गए गमले

    बैतूल| मध्यप्रदेश के बैतूल में एक महिला ने अपने शौक पूरे करने के लिए वेस्ट मटेरियल का ऐसा उपयोग किया कि अब देखते ही बनता है । महिला ने घर से निकले कबाड़ को बागवानी में तब्दील कर दिया है । खास बात यह है कि अनुपयोगी प्लास्टिक जो पर्यावरण को नुकसान करता है उससे ही पर्यावरण को बचाने का नायाब तरीका निकाला गया है । अब इस बागवानी की चर्चा होने लगी है ।

    बैतूल के गर्ग परिवार की बहू नेहा गर्ग ने घर से निकलने वाला वेस्ट मटेरियल को बेहतरीन तरीके से उपयोग किया । कबाड़ को उन्होंने अपनी बागवानी में तब्दील कर दिया है । घर में पड़े टायर मटका पुराने कप प्लास्टिक की बॉटल मच्छरदानी की रिंग आरो की बॉडी और ऐसे अन्य अनुपयोगी प्लास्टिक सामान को उन्होंने फेंकने की बजाय उसे अपनी बागवानी में उपयोग कर लिया ।

    दरअसल नेहा को बागवानी का शौक है और अपनी बागवानी के लिए वह नए नए प्रयोग करती रहती हैं । बागवानी के लिए बाजार से महंगे गमले लाने की जगह उनके दिमाग में यह विचार आया कि क्यों ना जो कबाड़ हम फेंक देते हैं उसको गमले की जगह यूज़ किया जाए । बस ये विचार आते ही उन्होंने घर के कबाड़ में पड़े सामान को साफ करके और उसे सजा कर उस में मिट्टी डालकर सब्जी फल और फूल के पौधे लगाना शुरू कर दिए । सुबह शाम इस बागवानी की देखरेख पानी और खाद देने से बागवानी मैं फल फूल और सब्जी फलने लगे है ।नेहा की बागवानी में गमलों की जगह अब टायर मटका जूता  प्लास्टिक की बॉटल मच्छरदानी की रिंग आरओ की बॉडी में कहीं सब्जी लगी है तो कहीं फूल के पौधे तो कुछ तो शोबर प्लांट बागवानी की शोभा बढ़ा रहे हैं ।

    वैसे तो प्लास्टिक पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है और लोग अनुपयोगी प्लास्टिक को फेंक देते हैं जिसके कारण पर्यावरण को बहुत नुकसान होता है । इस अनुपयोगी प्लास्टिक का जिस तरह नेहा ने उपयोग किया है उससे अब पर्यावरण को बचाने में सहयोग हो रहा है । नेहा का शौक भी पूरा हो रहा है और इस प्रयोग से बागवानी के शौकीनों को भी प्रेरणा मिलेगी कि वे पर्यावरण में अपना कैसे सहयोग कर सकते हैं और घर से निकले अनुपयोगी प्लास्टिक के सामान या कबाड़ को अपने चौक में कैसे शामिल कर सकते हैं ।

    शशांक सोनकपुरिया
    आईएनए न्यूज़ एजेंसी, बैतूल, मध्यप्रदेश

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