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    सुखी परिवार से ही एक सशक्त समाज और राष्ट्र का निर्माण सम्भव- ए.एन.एस.एस.

    सुखी परिवार से ही एक सशक्त समाज और राष्ट्र का निर्माण सम्भव- ए.एन.एस.एस.

    (कोरोना काल में बहुत से परिवार अवसाद के कारण विघटन की स्थिति से गुजर रहे हैं। ऐसे में आशा की किरण बनकर परिवारों को विघटन से बचा रही है आगरा स्थित आदर्श नारी समाज समिति)

    आगरा| ए एन एस एस की संस्थापिका सुनीता सारस्वत ने बताया पिछले 10 वर्षों से संस्था आगरा में नारी सशक्तिकरण के लिए काम कर रही है और महिलाओं से जुड़े सभी मुद्दों पर समय समय पर कार्यक्रम करती रही है। हाल ही में कमला नगर स्थित एक परिवार में पति पत्नी के बीच तलाक की स्थिति उत्पन्न हो गई थी जिन्हें आपसी सहमति और काउंसलिंग के द्वारा फिर से एक दूसरे के साथ रहने पर राज़ी किया है ।महिला पिछले कुछ महीनों से अपने मायके में रह रही थी । महिला ने आरोप लगाया था कि पति और ससुराल वालों ने उसके 12 वर्ष के बच्चे को उससे दूर कर दिया है। पत्नी ने पति के खिलाफ पूर्व में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी । एफ आई आर के बाद मामला फैमिली कोर्ट तक भी जा पहुंचा उसके बाद भी कोई हल नहीं निकल रहा था। अंत में पत्नी के परिवार के लोग संस्था के पास शिकायत लेकर पहुंचे। संस्था की संस्थापिका सुनीता सारस्वत और लेखिका एवम समाजसेवी भावना वरदान द्वारा आपसी बातचीत और काउंसलिंग से पति-पत्नी अब साथ रहने को राजी है। 

    भावना वरदान शर्मा ने पति- पत्नी और परिवार के लोगों की काउंसलिंग की तथा उन्हें  साथ रहने के लिए परामर्श दिया ।भावना वरदान शर्मा ने संयुक्त परिवार की शक्ति के संदर्भ में परिवार को बताया और परिवार की वृद्ध मां को वर्षों से बिछड़े हुए बहू बेटे से मिलवाया ।साथ ही बच्चे को उसकी मां को सौंपा गया। परिवार अब एक साथ रहने पर सहमत हैं और इसके लिए संस्था का धन्यवाद किया है। काफी वर्षों से चल रहे विवाद को अंततः खत्म हुआ वहां उपस्थित सभी लोग लोगों की आंखों में खुशी के आंसू थे। 

    ऐसे ही एक घटना भैरों नाला बेलनगंज की है जहां  पति पत्नी दोनों काफी समय से अलग रह रहे थे  ।लेकिन संस्था द्वारा  परस्पर बातचीत और काउंसलिंग के बाद  परिवार अब एक साथ खुशहाल जीवन बिता रहा है। भावना वरदान शर्मा ने बताया  संस्था समय-समय पर उनका सहयोग लेती रही है और वे ऐसे कार्यों के लिए सदैव आगे बढ़कर परिवारों को टूटने से बचाने में सहयोग देती रहेंगी। उन्होंने कहा हम लोग आधुनिकता की दौड़ में अपने पारिवारिक और नैतिक मूल्यों को भूलते जा रहे हैं ।परिवारों में वृद्धों की अवहेलना हो रही है यही विघटन का मुख्य कारण है । जिन घरों में वृद्धों का सम्मान होता है वहां सकारात्मक ऊर्जा रहती है और परिवार के सदस्यों  के बीच आदर और प्रेम की भावना बनी रहती है । उन्होंने बताया ये महिलाएं पुलिस तथा हेल्पलाइन की सहायता ले चुकी है लेकिन उन्हें केवल मनोवैज्ञानिक रूप से काउंसलिंग की आवश्यकता है। 

    जो परिवार मनोवैज्ञानिक कारणों से एक दूसरे से सामंजस्य नहीं बिठा पा रहे हैं, वहां काउंसलिंग के द्वारा हल निकाला जा सकता है। काउंसलिंग के दौरान संस्था के पदाधिकारी हर्षिता जायसवाल ,पूनम श्रोत्रीय आदि भी उपस्थित रहे।

    आईएनए न्यूज़ एजेंसी, आगरा|

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