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    टीवी ग्रसित बच्चों को गोद लेने की पहल की शुरू, आगे आए 39 अफसर, 100 बच्चों को अपनाया

    टीवी ग्रसित बच्चों को गोद लेने की पहल की शुरू, आगे आए 39 अफसर, 100 बच्चों को अपनाया

    जनपद में कुल टीवी से ग्रसित मरीजो की संख्या पहुंची 800 के पार

    जिलाधिकारी के इस पहल से जिले के कुछ समाजसेवी संगठन भी जुड़े

    शाहजहांपुर। जिला प्रशासन ने टीवी (ट्यूबर क्लोसिस) से ग्रसित बच्चों के इलाज व उनके भविष्य को संवारने के लिए अनोखी पहल शुरू की है। सोमवार को जिलाधिकारी इंद्र विक्रम सिंह की अगुवाई में 39 अफसरों ने 100 टीवी ग्रसित बच्चों को गोद लिया है। डीएम की इस पहल में जनपद के जनप्रतिनिधि व समाजसेवी संगठन भी आगे आए हैं। डीएम इंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि टीवी से ग्रसित बच्चों को गोद लेने का सिलसिला लगातार जारी है। मकसद ये है कि, इन बच्चों का अच्छा इलाज हो सके। शाहजहांपुर में शून्य से 25 साल के करीब 800 युवाओं में ट्यूबर क्लोसिस की बीमारी पाई गई हैं जिसमे अभी तक लगभग करीब 800 मरीजों की सूची बनाई जा चुकी है 12 तारीख तक अभियान चलाकर संक्रमित लोगो की तलाश की जाएगी। 

    आपको बता दें कि  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2025 तक टीवी मुक्त भारत बनाने की अपील की है। इसी दिशा में जिलाधिकारी इंद्र विक्रम सिंह ने भी टीवी ग्रसित बच्चों के लिए गोदनामा के नाम से खास पहल शुरू कर दी है। 

    सोमवार को विकास भवन में इस बाबत बैठक हुई। जिसमें 60 अधिकारी मौजूद थे। सभी ने जिलाधिकारी की इस पहल का समर्थन किया था। इसके अलावा 39 अधिकारियों के द्वारा 100 ग्रसित बच्चों को गोद लिया गया है। जिला प्रशासन ने टीवी ग्रसित मरीजों की सूची को दो भागों में बनाया है। जिसमें 0 से 18 साल तक के मरीजो की संख्या 303 व 25 साल तक के मरीज की 480 हैं। इन सभी संक्रमित मरीजों की सूची तैयार की जा चुकी है। साथ ही अधिकारी खुद शहरी क्षेत्रों, ग्रामीण क्षेत्रों, मलिन बस्तियों और स्कूलों में जाकर इस बीमारी से ग्रसित बच्चों की तलाश करेंगे।

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    खान-पान व इलाज की जरुरत पूरा करेंगे अफसर....

    डीएम इंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि टीवी ग्रसित बच्चों को गोद लेने का सिलसिला लगातार जारी है। अधिकारी इस पहल को सराहना कर रहे हैं। आज 100 बच्चों को गोद दिया गया है। इन बच्चों का अच्छा इलाज हो सके।  कुछ मरीज ऐसे है जिनको खान पान की जानकारी नहीं है, कुछ बच्चे ऐसे है, जिनके पास पैसा नहीं है।

    इस कारण उनका इलाज नहीं हो पाता है। अधिकारी ऐसे गोद लेने वाले बच्चों को इलाज और खान पान के प्रति जागरूक करेंगे। जरूरत के मुताबिक उनकी आवश्यकताओं को पूरा करेंगे। खास ये है कि, किसी अधिकारी पर बच्चों को गोद लेने के लिए दबाव नहीं है।

    फ़ैयाज़ उद्दीन, शाहजहाँपुर

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