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    सतपुड़ा डेम में चाइनीस झालर से परेशान मछुवारे

    सतपुड़ा डेम में चाइनीस झालर से परेशान मछुवारे
    रोजी रोटी का संकट आ गया सामने,नाव उतारने से भी लगता है डर,शिकायत लेकर पहुँचे कलेक्टर के पास 
    बैतूल। मध्यप्रदेश के बैतुल से लगे  सारणी के सतपुड़ा जलाश्य में  पता नही कहा से कुछ वर्षों से चायनीज झालर  उग आई है जिसके चलते लोकल मछुआरों के लिए बड़ी  मुसीबत खड़ी हो गई है  यंहा तक कि मछुआरे मछली पकड़ने डेम में जा नही पा रहे है जिससे मछुआरों के सामने रोजी रोटी की समस्या भी बनी हुई है | साथ ही मछली पकड़ने जाने वाले मछुआरों की जान को भी खतरा बढ़ने लगा है जिसके कारण जिला कलेक्ट्रेट पंहुचकर इन मछुआरों ने कलेक्टर को ज्ञापन  भी सौंपा।
    बता दें कि सतपुड़ा ताप विद्युत गृह द्वारा चाइनीज झालर की सफाई करने को लेकर करोड़ों रुपए के टेंडर जारी किए जाते है इसके बाद भी सतपुडा तवा जलासय में चायनीज झालर फलफूल रही है | इतना ही नही इस जलाशय में मछलियों पर खतरा मंडरा रहा है चायनीज झालर पूरे डेम में फैली है और पानी की गहराई तक इसकी जड़ें फैली है जिनमे फंसकर मछलिया मर रही है|
     मछुआरों ने बताया की वार्ड नम्बर 10 के करीब दो सौ मछुआरों के परिवारों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है|मोहन मोरे ने बताया कि मछुआरों के लिए दस वर्षों के लिए पट्टा स्वीकृत हुआ है जिसका वह 85 हजार रुपये टेक्स सालाना देते है उसे माफ किया जाए।
    वंही मछुआरे असीम का कहना है कि जब तक डेम से चायनीज झालर साफ नही हो जाती तब तक तो टेक्स माफ् किया जाना चाहिए डेम में चयनिज झालर होने की वजह से मछुआरे अपनी नाव लेकर भी अंदर नही जा पा रहे और न ही जाल लगा पा रहे है इतना ही नही डेम का पानी भी प्रदूषित हो रहा है यही पानी पेयजल के लिए सप्लाई होता है जो कि पीने योग्य नही है | ताप विद्युत गृह द्वारा इस चायनीज झालर को साफ करने के लिए करोड़ो रूपये का ठेका दिया हुआ है जिसके बावजूद इसके ठेकेदार सफाई का काम नही कर रहा है|

    बैतुल से शशांक सोनकपुरिया की खास रिपोर्ट

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