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    बचाव ही एड्स का सबसे बेहतर इलाज : डा. एस.पी गौतम

    बचाव ही एड्स का सबसे बेहतर इलाज : डा. एस.पी गौतम
    सामान्य मेलजोल से नहीं फैलता एड्स ..
    • विश्व एड्स दिवस पर गोष्ठी का  आयोजन
    • जन जागरूकता के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने दिए संदेश
    शाहजहांपुर। विश्व एड्स दिवस पर मंगलवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय पुराना जिला अस्पताल शाहजहाँपुर में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. एस.पी गौतम की अध्यक्षता में कोविड-19 के प्रोटोकॉल का पालन करते हुए जन जागरूकता गोष्ठी का आयोजन किया गया  | मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने गुब्बारे उड़ाकर गोष्ठी का शुभारम्भ किया |
    गोष्ठी के बाद हस्ताक्षर अभियान चलाया गया, जिला क्षय रोग अधिकारी डा. नरेश पाल ने सर्व प्रथम हस्ताक्षर किये तत्पश्चात उपस्थित सभी के द्वारा हस्ताक्षर कर अभियान में सहभागिता कर कार्यक्रम को सफल बनाने का संकल्प लिया गया | 
     मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने गोष्ठी के दौरान उपस्थित लोगों को बताया कि बचाव ही एड्स का सबसे बेहतर इलाज है | एड्स का मतलब है उपार्जित प्रतिरक्षी अपूर्णता सहलक्षण (Acquired Immune Deficiency syndrome)। एड्स HIV मानवीय प्रतिरक्षी अपूर्णता विषाणु (Human immunodeficiency virus) से होता है,  जो कि मानव की प्राकृतिक प्रतिरोधी क्षमता को कमजोर करता है।  इसके परिणाम स्वरुप एड्स पीड़ित लोग भयानक बीमारियों जैसे क्षय रोग और कैंसर आदि से पीड़ित हो जाते हैं | जब गंभीर रोग शरीर को घेर लेते हैं तो उनका इलाज कराना कठिन हो जाता है और ऐसी अवस्था में मरीज की जान को बहुत खतरा हो जाता है | साथ ही उन्होंने कोविड 19 से बचाव के लिए लोगों को जागरूक किया और कोविड-19 से बचाव के लिए जन जागरूकता पर विशेष जोर दिया है |  
     जिला क्षय रोग अधिकारी ने बताया कि एड्स कंट्रोल सोसाइटी से प्राप्त दिशा निर्देशानुसार जनपद के अल्हागंज, कलान, बंडा और खुटार के प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइजर और सीनियर लैब टेक्निसियन द्वारा स्टाल लगाकर एड्स से बचाव के लिए जन समुदाय को प्रेरित किया गया और लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण भी किया गया  |  उन्होंने बताया जनपद में अभी आठ  लोग  एच.आई.वी.संक्रमित है जिनका उपचार किया जा रहा है | 

    एड्स कैसे फैलता है –

    अगर एक सामान्य व्यक्ति एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के वीर्य, योनि स्राव अथवा रक्त के संपर्क में आता है तो उसे एचआईवी/ एड्स हो सकता है। आमतौर पर लोग एच.आई.वी. पॉजिटिव होने को एड्स समझ लेते हैं, जो कि गलत है। बल्कि एचआईवी पॉजिटिव होने के 8-10 साल के अंदर जब संक्रमित व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता क्षीण हो जाती है तब उसे घातक रोग घेर लेते हैं और इस स्थिति को एड्स कहते हैं। एड्स ज्यादातर चार माध्यमों से होता है। 

    1. पीड़ित व्यक्ति के साथ असुरक्षित यौन सम्बन्ध स्थापित करने से।
    2. दूषित रक्त से।
    3. संक्रमित सुई के उपयोग से।
    4. एड्स संक्रमित माँ से उसके होने वाली संतान को। 

    एड्स के कुछ प्रारम्भिक लक्षण हैं- 

    वजन का काफी हद तक काम हो जाना, लगातार खांसी बने रहना, बार-बार जुकाम का होना, बुखार, सिरदर्द, थकान, शरीर पर निशान बनना (फंगल इन्फेक्शन के कारण) ,हैजा, भोजन से अरुचि, लसीकाओं में सूजन आदि | हालांकि इनमें से कुछ ध्यान रहे कि ऊपर दिए गए लक्षण अन्य सामान्य रोगों के भी हो सकते हैं। एच.आई.वी. की उपस्थिति का पता लगाने हेतु मुख्यतः एंजाइम लिंक्ड इम्यूनोएब्जॉर्बेंट एसेस यानि एलिसा टेस्ट किया जाता है।

    एड्स से बचाव के लिए सामान्य जानकारी -

    1. पीड़ित साथी या व्यक्ति के साथ यौन सम्बन्ध स्थापित नहीं करना चाहिए, अगर कर रहे हों तो सावधानीपूर्वक कंडोम का प्रयोग करना चाहिए। लेकिन कंडोम इस्तेमाल करने में भी कंडोम के फटने का खतरा रहता है। अपने जीवनसाथी के प्रति वफादार रहें, एक से अधिक व्यक्ति से यौन संबंध न ना रखें।
    2. खून को अच्छी तरह जांचकर ही उसे चढ़ाना चाहिए। कई बार बिना जांच के खून मरीज को चढ़ा दिया जाता है जोकि गलत है। इसलिए डॉक्टर को खून चढ़ाने से पहले पता करना चाहिए कि कहीं खून एच.आई.वी. दूषित तो नहीं है। 
    3. उपयोग की हुई सुई ओं या इंजेक्शन का साझा प्रयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि यह ये एच.आई.वी. संक्रमित हो सकते हैं।  
    4. दाढ़ी बनवाते समय हमेशा नाई से नया ब्लेड उपयोग करने के लिए कहना चाहिये। 
    5. एड्स से जुड़ी हुई भ्रांतियों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। एड्स पीड़ित व्यक्ति के साथ बैठने, हाथ मिलाने से नहीं फैलता है |

    फ़ैयाज़ उद्दीन, शाहजहाँपुर

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