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    विज्ञान फिल्मों से जुड़े आयामों पर चर्चा कर रहे हैं देश-दुनिया के फिल्मकार

    विज्ञान फिल्मों से जुड़े आयामों पर चर्चा कर रहे हैं देश-दुनिया के फिल्मकार

    नई दिल्ली (इंडिया साइंस वायर)|भारत एक ऐसा देश है, जहाँ बहुत-से किफायती और जमीनी नवाचार हो रहे हैं। इनकी संरचना मजबूत है, और वे स्थानीय लोगों की जरूरतों को पूरा करने के अनुकूल हैं। ऐसे नवाचार बुनियादी विज्ञान फिल्में बनाने के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं। भारत में मुझे कुछ ऐसे की नवाचारों पर काम करने का मौका मिला, जो नई जानकारियों से समृद्ध हैं।नीदरलैंड के फिल्म निर्माता ए.जी.ए. वैन डे लार ने ये बाते कही हैं। वह इंटरनेशनल साइंस फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (आईएसएफएफआई) के दौरान 'ट्रेंड्स इन साइंस फिल्म मेकिंग' विषय पर आयोजितएक ऑनलाइन मास्टर क्लास को संबोधित कर रहे थे।

    वैन डे लारने कहा कि भारत स्मार्ट और उद्यमशील लोगों का देश है। यूरोपीय देशों में लोग व्हाइट कॉलर पेशे को सबसे अधिक पसंद करते हैं। कोविड-19 के प्रकोप के दौरान जब समस्या बढ़ी, तो इस तरह के काम-धंधों को छोड़कर दूसरे कामकाज करने की चुनौती को स्वीकार करना उनके लिए कठिन था। लेकिन, फ्रीलांस तौर पर काम करना या फिर अपने उद्यमीय नवाचारों के जरिये जीवन-यापन के तरीके ढूंढ लेना, भारत के लोगों की एक अहम विशेषता है। उनका मानना था कि लोगों की नवाचारी प्रवृत्ति पर केंद्रित फिल्मों के विषय समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने में मददगार हो सकते हैं।

    इंटरनेशनल साइंस फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (आईएसएफएफआई), 22 से 25 दिसंबर तक चलने वाले इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल (आईआईएसएफ)-2020 का एक महत्वपूर्ण घटक है। वर्चुअल रूप से आयोजित इस चार दिवसीय आयोजन के दूसरे दिन दुनियाभर की विज्ञान फिल्में ऑनलाइन प्रदशर्शित की जा रही हैं। इसके साथ-साथ विज्ञान फिल्म निर्माण पर केंद्रित मास्टर क्लासेज और समूह परिचर्चाएं भी आयोजित की जा रही हैं। इन परिचर्चाओं को देश-विदेश के विशेषज्ञ और विज्ञान फिल्मकार संबोधित कर रहे हैं।



    इस दौरान वैन डे लारनेनिशुल्क रूप से उपलब्ध कई एडिटिंग सॉफ्टवेयर्स और ऐप्स के बारे में बताया, जो फिल्म बनाने में रुचि रखने वाले लोगों के लिए उपयोगी हो सकते हैं। इनमें Adobe Premiere Rush, FilmoraGo, FunimateऔरInShot जैसे ऐप्स प्रमुखता से शामिल हैं। उन्होंने बताया कि ये ऐप्स बेहतर क्वालिटी के हैं, और प्ले-स्टोर में आसानी से मिल जाते हैं। कुछ ऐप्स के एडवांस्ड वर्जन के लिए नाममात्र भुगतान करना होता है। लार ने कहा कि कॉपीराइट के कारण गैर-पेशेवर एवं नये फिल्मकारों को अपनी फिल्मों में उपयुक्त म्यूजिक का उपयोग करने में कठिनाई होती है। इस मुश्किल से निपटने में Twitch.com वेबसाइट मदद कर सकती है, जहाँ कॉपीराइट-मुक्तम्यूजिक के विकल्प मिल सकते हैं।

    आईएसएफएफआई के दूसरे दिन कुल तीन मास्टर क्लासेज आयोजित की गईं। इनमें शामिल दूसरी मास्टर क्लास का विषय विज्ञान फिल्में बनाने और स्टोरी-टेलिंग पर केंद्रित था। इस सत्र को मुंबई की वृत्तचित्र निर्माता आरती श्रीवास्तव ने संबोधित किया। उन्होंने पर्यावरण एवं वन्यजीव फिल्म निर्माणऔर कहानी बयां करने व उसके विभिन्न स्वरूपों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा - प्रामाणिक स्क्रिप्ट तैयार करने के लिए अनुसंधान और डेटा का उपयोग एक महत्वपूर्ण पहलू है, जहाँ विज्ञान फिल्म निर्माताओं को जोर देना चाहिए। शोध पत्र ठोस तथ्य उपलब्ध कराते हैं, जो अंततः अच्छी फिल्मों का आधार बन सकते हैं। इसके लिए कुछ अच्छे स्रोतों की जरूरत होती है, जो स्क्रिप्ट को मजबूत बनाते हैं।

    एक अन्य मास्टर क्लास के दौरान जर्मन-स्विस फिल्ममेकर ब्रिगितिकोरनेत्ज्की ने कहा कि विज्ञान फिल्म निर्माण में अतिरिक्त मेहनत की जरूरत होती है, और हमें विषयों को तथ्यपरक रूप से प्रस्तुत करना होता है। इसके लिए धैर्य के साथ-साथ जुनून भी जरूरी है। कोरनेत्ज्की स्वयं वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी हैं, और वे समुदाय आधारित संरक्षण गतिविधियों को महत्वपूर्ण मानती हैं। उन्होंने कहा कि अपनी फिल्मों के माध्यम से मेरी कोशिश वैज्ञानिक संदर्भ से आम लोगों को जोड़ने की होती है। ब्रिगिति ने हाथियों पर विशेष रूप से अध्ययन किया है। उन्होंने बताया कि उनकी अगली फिल्म हाथियों और मनुष्य के टकराव एवं उनके सह-अस्तित्व पर केंद्रित है।

    इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल (आईआईएसएफ) के अभिन्न अंग के रूप में आईएसएफएफआई के इस छठवें संस्करण का आयोजन 25 दिसंबर तक चलेगा। फेस्टिवल के आखिरी दिन पुरस्कृत विज्ञान फिल्मों की घोषणा की जाएगी। आईआईएसएफ का आयोजन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर), पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, जैव प्रौद्योगिकी विभाग, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद तथा विज्ञान भारती द्वारा संयुक्त रूप से किया जाता है। इस बार विज्ञान महोत्सव का समन्वयन सीएसआईआर कर रहा है। आयोजन के लिए नोडल संस्थानई दिल्‍ली स्थित सीएसआईआर-नेशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ साइंस, टेक्‍नोलॉजी ऐंड डेवलपमेंट स्टडीज (निस्टैड्स) है। वहीं, आईएसएफएफआई-2020 का समन्वयनविज्ञान प्रसार द्वारा किया जा रहा है।

    विज्ञान प्रसार के वरिष्ठ वैज्ञानिक और आईएसएफएफआई के प्रमुख संयोजक निमिष कुमार ने कहा कि फिल्में एक ऐसा लोकप्रिय माध्यम हैं, जो विज्ञान जैसे गूढ़ विषयों को भी रोचक तरीके से प्रस्तुत कर सकती हैं। यही कारण है कि समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण के विकास और वैज्ञानिक चेतना के प्रसार में फिल्मों का महत्व निरंतर बढ़ रहा है।हाल के वर्षों में आईएसएफएफआई जैसे आयोजनों ने विज्ञान फिल्मों को प्रोत्साहित करने में अग्रणी भूमिका निभायी है।

    विज्ञान को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से आईएसएफएफआई इस बार वर्चुअल मंच पर आयोजित किया जा रहा है। मंगलवार को इसका उद्घाटन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ हर्ष वर्धन ने किया था। इस बार साइंस फिल्म फेस्टिवल में 60 देशों से 634 फिल्म प्रविष्टियां मिली हैं। इनमें से, 32 देशों की 209 फिल्मों को फेस्टिवल में प्रदर्शित किया जा रहा है। इनमें विज्ञान वृत्तचित्र, शॉर्ट फिल्में, एनिमेशन फिल्में और वीडियो शामिल हैं।

    (इंडिया साइंस वायर)


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