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    जिला शिक्षा अधिकारी, संचालक व प्राचार्य शिक्षा को व्यापार न बनाएं - परवेज अहमद

    जिला शिक्षा अधिकारी, संचालक व प्राचार्य शिक्षा को व्यापार न बनाएं - परवेज अहमद

    सालों से सरकारी स्कूलों में सरकार द्वारा दी जाने वाली राशि पर धांधली

    राजनांदगांव। भारतीय जनता पार्टी अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष परवेज अहमद पप्पू ने आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा जिले के स्कूलों को प्रतिवर्ष दी जाने वाली राशि शाला अनुदान राशि को जिला शिक्षा अधिकारी जिला, शिक्षा संचालक व प्राचार्य के द्वारा बंदरबांट किया जा रहा है।

    श्री अहमद ने आगे कहा कि साइंस विषय के नाम पर हर साल 25 हजार प्रत्येक स्कूल को राज्य  सरकार द्वारा राशि दी जाती है। ताकि वहां पढ़ने वाले बच्चों को साइंस विषय में लगने वाले सामानों की सुविधा उन्हें मिल सके और बड़े शर्म की बात है कि यहां सरकार द्वारा दी गई राशि को कुछ अधिकारी व प्राचार्य द्वारा धांधली किया जा रहा है। इसी प्रकार बोर्ड शिक्षा संचालन द्वारा 10वीं क्लास के बच्चों को 390 रुपये की फीस तय की गई है। जोकि वही कई स्कूलों में बच्चों से 450 रुपये फिस लिया जा रहा है शिक्षकों को विभाग द्वारा फॉर्म 16 हर वर्ष दिया जाता है जो कि अब फॉर्म 16 देने के लिए शिक्षकों से 500 रुपए मांग किया जाता है भ्रष्टाचारी अधिकारियों को पैसे ना देने पर शिक्षकों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है ।

    उन्होंने कहा कि हर साल शिक्षा विभाग द्वारा स्कूल की साफ सफाई स्कूल की पुताई एवं मरम्मत के लिए राज्य सरकार के द्वारा राशि दी जाती है शासकीय राशि का रंग रोगन के नाम पर शिक्षा विभाग शासकीय राशि का बंदरबांट कर रहे हैं। केंद्र सरकार और राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से विभिन्न प्रकार से योजनाएं संचालित कर रहे हैं तथा शिक्षा की गुणवत्ता पर शासन प्रशासन विशेष ध्यान दे रहे हैं । बच्चों को मिलने वाली सारी सुविधा को गंभीरतापूर्वक ध्यान भी दिया जा रहा है लेकिन शिक्षा विभाग राज्य सरकार के कंट्रोल में नहीं है इस कारण स्कूलों में प्राचार्य व शिक्षकों की आने जाने की भी कोई समय सीमा नहीं है अगर स्कूल में अनुशासन डिसिप्लिन नहीं है तो इसके लिए स्कूल प्राचार्य के साथ शिक्षा विभाग पूर्ण रूप से दोषी हैं शासकीय राशि को किस कदर शिक्षा विभाग व प्राचार्य द्वारा रंग,भवन व मरम्मत कार्य के लिए शाला विकास समिति के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों को विश्वास में लिए दुरुपयोग को उच्च स्तर से जांच करते हैं तो दूध का दूध और पानी का पानी हो सकता है किंतु यहां शासकीय राशि सदुपयोग को दुरुपयोग में बदलने के लिए स्कूल के प्राचार्य अपने मनमौजी मनमानी के कारण शिक्षा विभाग हमेशा सुर्खियों में रहते हैं किंतु शिक्षा विभाग भी प्राचारियों के प्रति कोई कार्यवाही नहीं करने के कारण शासकीय राशि को दुरुपयोग करने वाले प्राचारियों का हौसला बुलंद होते जा रहा है स्कूल खोलने से पहले सभी स्कूलों के प्राचार्य द्वारा साफ-सफाई व स्कूलों की पुताई की जाना चाहिए। अगर ऐसा ना होने पर सभी स्कूलों के प्राचार्य पर कार्रवाई करने उन्हें सस्पेंड करने के लिए प्रदर्शन किया जाएगा जिसके जवाबदार जिला शिक्षा अधिकारी होंगे।

    हेमंत वर्मा

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