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    बैतूल: महिला रसोइयों को 5 माह से नहीं मिला मानदेय

    बैतूल: महिला रसोइयों को 5 माह से नहीं मिला मानदेय

    मध्यान्ह भोजन में बनाती है खाना , महिला रसोइयों ने सड़को पर थाली बजा कर मांगी भीख, निकाली रैली सौंपा ज्ञापन

    बैतूल| मध्यान्ह भोजन बनाने वाली महिला रसोइयों को पिछले पांच माह से मानदेय नही से परेशान रसोइयों ने शहर में भीख मांग कर प्रदर्शन किया और प्रशासन को ज्ञापन सौंपा । बैतूल में अटल सेना बैतूल व भारतीय रसोईया महिला स्व सहायता संघ के तत्वावधान में मुख्यमंत्री के नाम से मघ्यान्ह भोजन में कार्यरत महिलाओं को 5 माह से रूका हुआ मानदेय देने की मांग को लेकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। राजेन्द्र सिंह चौहान का कहना कि रसोईयों को विगत 5 माह से मानदेय नहीं मिला है जबकि स्कूल शिक्षक से लेकर हर कर्मचारियों का वेतन हर माह के प्रथम सप्ताह मिल जाता है। जो उचित है परन्तु इन गरीब महिलाओं का क्या दोष है जो इन्हें मानदेय नहीं मिल रहा है।

    इन महिलाओं ने लॉक डाउन में एक गांव से दूसरे गांव तक जाकर बच्चों को घर-घर राशन ले जाकर दिया। समूह ने अपने पास से भाड़ा लागाकर सोसायटी से राशन लाया समूह को भी मानदेय स्वरूप प्रोत्साहन राशि मिलनी चाहिए। आज भी रसोईया बहने स्कूल की साफ-सफाई के लिए शिक्षकों द्वारा बुलाने पर जाती हैं। बाग-बगीचे का भी काम कर रहीं हैं। ये हर शासकीय कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों का वेतन आपके द्वारा दिया गया फिर 65 रूपए रोज से स्कूल में भोजन बना रही। इन महिलाओं के साथ अत्याचार क्यों हो रहा है । गांव-गांव में आंगनाड़ी में खाना बना रही बहनों का मानदेय देना भूल गए। जो अभी भी काम कर रहीं हैं। 

    मध्यान्ह भोजन से जुड़ी बहनों के पास भीख मांगने के अलावा कोई काम नहीं बचा है। ज्ञापन में उल्लेख है कि इन गरीब और मेहनतकश महिलाओं पर दया करते हुए इन्हें मानदेय शीघ्र दिलवाया जाए। समिति सदस्यों ने कहा कि भले हम को मानदेय नहीं मिला फिर भी हमने जो भी भीख माग कर 245 रूपए एकत्रित किए हैं वह कोरोना सहायता कोष में जमा करवाना चाहते हैं। क्योंकि हमारे अंदर मानवता अभी भी जीवित है।

    अटल सेना प्रमुख राजेंद्र सिंह का कहना है कि महिला रसोइयों के साथ पक्षपात हो रहा है उन्हें पिछले 5 माह से मानदेय नहीं मिला इसलिए आज उन्होंने भीख मांग कर प्रदर्शन किया| महिला रसोइया जयंती का कहना है कि मध्यान्ह भोजन का हम लोग खाना बनाते हैं और मात्र दो हजार रुपये मिलते हैं उससे गुजारा नहीं होता लेकिन पिछले 5 माह से वह भी नहीं मिले हैं इससे परिवार के सामने बहुत परेशानी खड़ी हो गई है|

    बैतुल से शशांक सोनकपुरिया की खास रिपोर्ट

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