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    अयोध्या राम नगरी में 39वां रामायण मेला सकुशल संपन्न

    अयोध्या राम नगरी में 39वां रामायण मेला सकुशल संपन्न 
    धर्म और संस्कृति एक दूसरे के पूरक हैं
    अयोध्या। भगवान श्री राम की धर्मनगरी अयोध्या में 39वां रामायण मेला रंगारंग कार्यक्रम के साथ  सकुशल संपन्ना  हो गया. रामकथा पार्क में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था.
     हमें भगवान के चरणों में ही मन लगाना चाहिए. दुनिया नश्वर है ,जो भगवान के चरणों का भागी बन जाता है वह लोक- परलोक दोनों को सुधार लेता है. यह विचार मणिराम दास जी की छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास शास्त्री ने व्यक्त किया. वह अयोध्या के सरयू तट स्थित राम कथा पार्क में 39वें रामायण मेला के समापन अवसर पर बतौर अध्यक्ष अपना उद्बोधन कर रहे थे।
    महंत कमलनयन दास ने कहा कि कोरोना काल में भगवान की कृपा व श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के आशीर्वाद से 39वां रामायण मेला संपन्न हो सका. उन्होंने कहा कि बेहतर प्रशासक के तौर पर जिला अधिकारी अनुज कुमार झा ने इसके लिए अनुमति दिया. हम सभी लोगों ने कोविड-19 के नियमों का  पालन  करते हुए रामायण मेला संपन्न हो सका. 
    अयोध्या संत समिति के अध्यक्ष और सनकादिक आश्रम के महंत कन्हैया दास रामायणी ने कहा कि भगवान श्री राम के अवतार से ही रावण का वध हो सका, जबकि हनुमान जी द्वारा लंका जलाए जाने से विभीषण की कोठी जलने से बची. रावण ने विभीषण पर विपक्ष से मिले होने का आरोप लगाकर उसे लंका से बाहर कर दिया. विनाश काल में बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है. रावण ने अपने ही भ्राता विभीषण को लंका से निकालकर अपने विनाश का मार्ग प्रशस्त कर दिया. 
     हमेशा ईश्वर की कृपा प्राप्ति के लिए प्रयास करना चाहिए. यह सब सीख हमें रामायण व रामायण मेला से ही मिलती है . अयोध्या सिद्धी की खान है. सरयू तट भगवान श्री राम की पावन बाल लीला की स्थली है. वर्तमान सरकार अयोध्या के विकास के लिए सब कुछ कर रही है.  
    रामायण राम शंकर दास ने कहा कि अयोध्या का विकास त्रेतायुगीन हो रहा है. यह सरकार अयोध्या धाम ही नहीं अयोध्या की 84 कोसी परिक्रमा क्षेत्र में विकास कर रही है. l इस अवसर पर रामायणी राम कृष्ण दास, हनुमान दास आदि प्रमुख रूप से मौजूद थे. कार्यक्रम का संचालन कमलेश सिंह ने किया.
    रामायण मेला समिति के प्रमुख पदाधिकारी नंद किशोर मिश्र पेड़ा महाराज ने रामायण मेले में सहयोग के लिए संतों महंतों प्रशासनिक अधिकारियों, मीडिया कर्मियों, सांस्कृतिक कलाकारों के प्रति सहयोग व्यक्त किया.  कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी रामायण मेला आप सभी के सहयोग से ही संभव हो सका है.
     महापौर ऋषिकेश उपाध्याय ने रामायण मेला के अंतिम संस्कृतिक संध्या का उद्घाटन किया. उन्होंने कहा कि धर्म और संस्कृति एक दूसरे के पूरक हैं. अयोध्या जहां एक ओर धर्म की ध्वजा है. वहीं श्री राम और रामायण कालीन के जरिए मानवता का संदेश देती है। 
    देव बक्श वर्मा, अयोध्या उत्तर प्रदेश

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