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    अयोध्या में श्रीराम-विवाहोत्सव 19 दिसंबर को, बारात भी निकलेगी

    अयोध्या में श्रीराम-विवाहोत्सव 19 दिसंबर को, बारात भी निकलेगी

    अयोध्या। राम नगरी अयोध्या श्री सीताराम विवाहोत्सव के उल्लास में डूबने लगी है। इस बार श्रीराम विवाह उत्सव में भव्य श्रीराममंदिर निर्माण शुरू होने की खुशी भी बयां हो रही है। अयोध्या के मंदिरों में उत्सव को लेकर तैयारी तेज,  उत्सव को भव्यता देने के लिए साधु-संत भी पूरी तन्मयता से जुटे  मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम व जनक नंदिनी माता सीता के विवाह का मुख्य उत्सव अगहन शुक्ल पंचमी यानी की 19 दिसंबर को धूमधाम से मनाया जाएगा, इसी दिन रामनगरी के मंदिरों से भव्य रामबरात भी निकाली जाएगी।   

          विअहुति भवन में श्री सीताराम विवाह उत्सव की शुरूआत  विभिन्न अनुष्ठानों के मध्य हो जाएगी। इस मंदिर में विवाह उपासना की प्रधानता है, इसलिए मंदिर का नाम भी विअहुति भवन है। मंदिर के वर्तमान महंत वैकुंठ शरण बताते हैं कि 16 से अनुष्ठानों का प्रारंभ । इसके बाद राम जी का तिलक, किशोरी जी की हल्दी की परंपरा। विवाह पंचमी को भव्य रामबारात, विवाह का आयोजन   रामकलेवा के साथ महोत्सव का समापन हो जाता है।  19 दिसंबर को मंदिर से भव्य रामबरात निकाली जाएगी। इसके अलावा रामविवाह व रामकलेवा का आयोजन पूरे रस्मोरिवाज के साथ किया जाएगा। 

      वहीं रसिक पीठ लक्ष्मण किला में रामविवाह उत्सव की शान देखने लायक होती है। राम विवाह यहां केवल उत्सव के रूप में ही नहीं बल्कि आराध्य के साथ तादाम्य स्थापित कर उनके समीप जाने का माध्यम भी है। ऐसे में यहां उत्सव का चरम दिखाई देता है।



     रामलीला के साथ रामविवाह का उल्लास मंदिर में छलकने लगा है। दिन प्रतिदिन इस उल्लास का रंग गाढ़ा होता जाएगा। रसमोद कुंज में भी विवाह उत्सव का उल्लास छलक रहा है। यहां धार्मिक अनुष्ठानों के बीच कार्यक्रम शुरू कर दिए गए हैं।  अगहन शुक्ल पंचमी को श्री सीताराम विवाहोत्सव पूरे रीतिरिवाज के साथ भव्यता पूर्वक मनाया जाएगा। हनुमानबाग में भी रामविवाह को लेकर तैयारियां तेज हो गयी हैं।  मंदिर में रामकलेेवा, रामविवाह उत्सव का आयोजन भव्यता पूर्वक होता है साथ ही शाही अंदाज में रामबरात भी निकाली जाएगी।

    जानकी महल ट्रस्ट में रामविवाह उत्सव की भव्यता देखते ही बनती है। माता सीता के मायके के रूप में प्रचलित जानकी महल की स्थापना जानकी वर बिहार कुंज के रूप में की गई थी। दूल्हा-दूल्हन सरकार के रूप में विराजति युगल सरकार की नयनाभिराम जोड़ी की अष्टायाम सेवा उनके परिकर करते  जनकपुर की परंपरा में दूल्हा सरकार विवाहोपरांत कोहबर में ही लीला का दर्शन कराते हैं। मंदिर में भगवान के उत्थापन से लेकर रात्रि शयन तक आठो पहर की सेवा मधुर उपासना की ही रीति से की जाती है। 

        बताया कि 16 दिसंबर को रामार्चा पूजन के साथ ही उत्सव की शुरूआत हो गई है। 17 को फुलवारी लीला  जो विवाहोत्सव का मुख्य आकर्षण होती है। 18 को हल्दी तिलक एवं मेंहदी की रस्म तो 19 को रामबरात निकाली जाएगी। 20 दिसंबर को छप्पन भोग के साथ विवाह उत्सव का समापन होगा।

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    दशरथ महल में रामकथा की धूम....

    विवाहोत्सव के अवसर पर दशरथ महल में बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्रप्रसादाचार्य की अध्यक्षता में संचालित रामकथा के दूसरे दिवस कथाव्यास बाल भरत व्यास ने कहा कि भगवान श्रीराम का उद्देश्य मानव मूल्यों की स्थापन व मानवता का संदेश देने के लिए हुआ था। मात्र राक्षसों का वध ही उनके अवतार का उद्देश्य नहीं था उन्होंने मानवता के प्रतिनिध के रूप में समस्त सृष्टि के प्राणियों को मानवता का महत्व समझाया व दानवता का समूल विनाश किया। 

       मंदिर में प्रतिदिन रात्रि आठ से 11 बजे तक रामविवाह उत्सव पर आधारित रामलीला मंचन का भी आयोजन किया जा रहा है।

    देव बक्श वर्मा, अयोध्या उत्तर प्रदेश|

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