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    कोविड -19 आपदा को प्राइवेट अस्पतालों ने बनाया कमाई करने का जरिया

    कोविड -19 आपदा को प्राइवेट अस्पतालों ने बनाया कमाई करने का जरिया
    रायपुर। राजधानी रायपुर के एमएमआई अस्पताल में नगरी के 73 वर्षीय प्रभुलाल भोयर  को उसके परिवार जन ने लकवा का उपचार करवाने एम.एम.आई अस्पताल 11 नव.को ले जाया गया। जंहा लकवा के उपचार के पूर्व कोविड टेस्ट किया गया और जांच कर उन्हें पाज़िटिव बताकर भर्ती कर लिया गया।                       17 नव.को उन्हे नेगेटिव ठहराकर छुट्टी दे दी। इसके बाद फिर 24 नव.को मरीज को ले जाया गया तो फिर से एक बार कोविड जांच करके पाज़िटिव ठहराकर भर्ती कर लिया गया और कुछ दिन बाद फिर नेगेटिव बता दिया गया।                         मरीज को जिस लकवा का इलाज कराने ले गये उसका ईलाज हो ही नहीं पाया और कोरोना जांच और पाज़िटिव -- नेगेटिव के चक्कर में मरीज को वेंटिलेटर में डालकर लाखों- लाखों रूपया ले लिया गया ।        
                  परिवार के प्रमुख की बिमारी को लेकर दुखित चिंतित परिवार वालों ने हर संभव उपाय अपनाते प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री टी.एस.बाबा के बंगले तक दस्तक देकर अपना दुखड़ा सुनाया और तब स्वास्थ्य मंत्री के बंगले से एक पत्र अस्पताल प्रबंधन को भेजा गया था , पर प्रबंधन ने स्वास्थ्य मंत्री के पत्र को कितनी संवेदना और गंभीरता से लिया, इसका इसी बात से अंदाजा लग जाता है कि आज वेंटिलेटर में पडे-पडे जीवन और मृत्यु से संघर्ष कर रहे प्रभुलाल के पुत्र इस बात को लेकर दुखित -चिंतित हैं कि वेंटिलेटर में पड़े हमारे पिताजी ठीक हैं भी या नहीं और इसी उहापोह में वो हताश निराश होकर यह चाह रहे हैं कि अब हम हमारे पिताजी को वेंटिलेटर से निकालकर हमको दे दिया जाये परन्तु अस्पताल प्रबंधन वेंटिलेटर पर रखे गये मरीज की वर्तमान हालत बताये बगैर यह कह रहा है कि पैसा दे दो और उन्हे ले जाओ।
                         अपने परिवार जन का प्राण बचाने की गये से पंहुचने वालों की भावना एवं लाचारी -मजबूरी भाड़ में जाए , प्राइवेट अस्पतालों को चाहिए बस - पैसा और पैसा।
                     एम. एम. आई. प्रबंधन अब आगे क्या-करता है लकवा का इलाज कराने लाये गये मरीज के परिजनों से लाखों रुपए की उगाही कर लेने के बाद और कितने पैसे की मांग करता है ॽ और परिवार जन उनकी मांग पूरा कर रहा है या नहीं और पैसे के लिए कंही मरीज को बंधक बनाकर तो नहीं रख लिया जायेगा। यह आशंका व्यक्त करते दूर में रहने वाले परिवार जन द्वारा दुख और चिंता जाहिर की जा रही है।

    गौरतलब है कि इसी तरह के एक अन्य मामले में एम्स प्रबंधक पर भारी लापरवाही का आरोप का एक वीडियो वायरल हुआ था, जो पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ था।
    हेमंत वर्मा

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