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    आलू के अच्छे उत्पादन हेतु सम-सामयिक महत्व के कीट एवं रोगों का उचित समय पर नियंत्रण अत्यन्त आवश्यक

    आलू के अच्छे उत्पादन हेतु सम-सामयिक महत्व के कीट एवं रोगों का उचित समय पर नियंत्रण अत्यन्त आवश्यक
    शाहजहाँपुर। जिला उद्यान अधिकारी  राघवेन्द्र सिंह ने बताया है कि  प्रदेश मे आलू के अच्छे उत्पादन हेतु सम-सामयिक महत्व के कीट एवं रोगों का उचित समय पर नियंत्रण अत्यन्त आवश्यक है। आलू की फसल अगेती व पिछेती झुलसा रोग के प्रति अत्यन्त संवेदनशील होती है, प्रतिकूल मौसम विशेषकर बदलीयुक्त बूंदा-बांदी एवं नम वातावरण मे अगेती/पिछेती झुलसा रोग का प्रकोप बहुत तेजी से फैलता है तथा फसल को भारी क्षति पहुंचती है।
    ऐसी परिस्थितियों मे उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग, उ0प्र0 द्वारा इस विज्ञप्ति के माध्यम से आलू उत्पादकों को सलाह दी जाती हैं कि आलू की अच्छी पैदावार सुनिश्चित करने हेतु रक्षात्मक दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।
    अगेती झुलसा रोग के प्रकोप निचली पत्तियों से प्रारम्भ होता है, जिसके फलस्वरूप गहरे भूरे/काले रंग के कुण्डलाकार छल्लेनुमा धब्बे बनते हैे, जो बाद में बीच में सूखकर टूट जाते है। प्रभावित निचली पत्तियाॅ सूख कर गिर जाती है। इन धब्बों के बीच में कुण्डलाकार आकृति दिखाई देती है। 
    पिछेती झुलसा रोग के प्रकोप से आलू की फसल को विशेष क्षति होती है। इस रोग से पत्तियाॅ सिरे से झुलसना प्रारम्भ होती है जो तीव्रगति से फैलती है और 2 से 4 दिनों के अन्दर ही सम्पूर्ण फसल नष्ट हो जाती है। बदलीयुक्त 90 प्रतिशत से अधिक आर्द्र तावावरण एवं कम तापक्रम पर इस रोग का प्रकोप बहुत तेजी से होता है। आलू की फसल को अगेती व पिछेती झुलसा रोग से बचाने के लिए जिंक मैंगनीज कार्बामेट 2.0 से 2.5 कि0ग्रा0 को 800 ली0 पानी मे घोलकर प्रति हे0 की दर से पहला रक्षात्मक छिड़़काव बुवाई के 30-45 दिन बाद अवश्य किया जाये। रोग के नियन्त्रण हेतु दूसरा एवं तीसरा छिड़काव काॅपर आक्सीक्लोराइड 2.5 से 3.0 किग्रा अथवा जिंक मैंगनीज कार्बामेट 2.0 से 2.5 किग्रा में से किसी एक रसायन का चयन कर 800-1000 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर की दर से 10-12 दिनों के अन्तर पर करें। दूसरे एवं तीसरे छिड़काव के साथ ही माॅहू कीट का नियंत्रण आवश्यक है, क्योंकि इसके प्रकोप से आलू बीज उत्पादन प्रभावित हो सकता है। अतएव दूसरे व तीसरे छिड़काव में फफूंदनाशक के साथ कीटनाशक रसायन जैसे डायमेथोएट 30 ई0सी0 या मिथाइल-ओ-डेमेटान 25 ई0सी0 1.00 लीटर अथवा मोनोक्रोटोफास 36 ई0सी0 750 मि0ली0 को प्रति हेक्टर की दर से मिलाकर छिड़काव किया जाना चाहिए।

    फ़ैयाज़ उद्दीन, शाहजहाँपुर

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