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    अयोध्या: दीपावली पर दीपों की परंपरा को दीपोत्सव ने एक बार फिर जीवंत कर दिया

    अयोध्या: दीपावली पर दीपों की परंपरा को दीपोत्सव ने एक बार फिर जीवंत कर दिया  

    दीपोत्सव ने बदली रामनगरी के कुम्हारों की जीवन शैली

    अयोध्या. मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम की धर्म नगरी अयोध्या इन दिनों  विकास के पथ पर अग्रसर है ! जहां पर  दीपोत्सव के कार्यक्रम की तैयारी जोरों से चल रही है! दीपोत्सव  कार्यक्रम से बहुतेरे लोगों की जीवनशैली बदल जाएगी! दीपोत्सव से तमाम लोगों को रोजगार मिल गया है!  आमदनी बढ़ गई है  जिससे उनका जीवन सुख में हो रहा है! दीपोत्सव के आयोजन में इस बार साढ़े पांच लाख दीप प्रज्वलित कर नया रिकार्ड बनाने की तैयारी है। इसको लेकर जिला प्रशासन के साथ ही अवध विश्वविद्यालय ने तैयारी शुरू कर दी है। इस आयोजन की जिम्मेदारी इस बार  डॉ.राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय को सौंपी गई है। इसी क्रम में कुलपति प्रो. रविशंकर सिंह ने दीपोत्सव स्थल का जायजा लिया। घाटों की तैयारी को देखा। कार्य में लगे जिम्मेदारों से संवाद किया। कार्यक्रम की सफलता की रूपरेखा तैयार की। 



    रामनगरी में होने वाले दिव्य दीपोत्सव ने कुम्हारों को  रोजगार दिया है। खासतौर से अयोध्या के जयसिंहपुर के 40 परिवारों की जिंदगी बदल गई है। इसकी जीवनशैली में परिवर्तन आ रहा है  साथ ही खानपान व रहन-सहन का स्तर भी  ठीक हुआ है। गांववासियों का मानना है कि दीपोत्सव ने उनके खत्म होते व्यवसाय को सिर्फ नहीं दिशा ही नहीं दी बल्कि उनके गांव के नाम को अतंरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है।

    शुरू से ही अयोध्या में होने वाले दिव्य दीपोत्सव को लेकर प्रदेश की सरकार पर करोड़ों का फालतू खर्च करने का आरोप लगता रहा है लेकिन अयोध्या की परिस्थितियां इसके बिल्कुल विपरीत है।

     अयोध्या में दीपावली पर खत्म हो रहे दीपों की परंपरा को दिव्य दीपोत्सव ने एक बार फिर से जीवंत कर दिया है। इसका लाभ अयोध्या के कुम्हारों को मिला है। इनके जीवन शैली में परिवर्तन आया है।

     अब तक तीनों दीपोत्सव में गांव के लोगों ने दीप तैयार किए हैं। साथ ही अन्य छोटे-छोटे समारोहों में भी इसी गांव के बने दीप जले हैं।इससे कुम्हारों को अर्थिक लाभ मिला है, साथ ही इनकी जीवन शैली  मैं सुधार हुआ है।  इस बात से इंकार नहीं है कि उनके दीपोत्सव ने उनके गांव को अंतरराष्ट्रीय पहचान दी है। साथ ही खत्म हो रही दीप की परंपरा को एक बार फिर से जीवित किया है।  इसका आर्थिक लाभ भी गांव के कुम्हारों को मिला है।

      पहले  लोग दीपों को बनाकर मार्केट में बेचते थे, यह कार्य आज भी जारी है लेकिन दीपोत्सव में दीपों की सप्लाई से उनके वर्ष भर के लंबित कार्य पूर्ण हो रहे हैं।

    इनमें गांव में  घरेलू संबंधी जरूरतें पूरी होती हैं।  गांव की आर्थिक स्थिति बेहतर होने से खानपान के स्तर में भी सुधार हुआ है।

    दीपोत्सव से अयोध्या के कुम्हारों के इकोनॉमिकल स्तर में बदलाव आया है  दीपोत्सव ने अयोध्या के गरीब तबके को बड़ी आर्थिक मदद पहुंचाई है। इसमें सिर्फ कुम्हार ही नहीं बल्कि किसान भी शामिल हैं।  कुम्हारों को दीपोत्सव से जहां नया जीवन मिला है वहीं फूल व सेठा की लकड़ी वाले किसानों को भी बड़ा फायदा पहुंचा है।  दीपोत्सव में पिछले वर्ष लगभग 40 से 50 लाख रुपये सिर्फ दीप पर खर्च हुए थे। इसमें दीप, बाती, तेल, सेठा की लकड़ी, मोमबत्ती सहित अन्य चीजें शामिल हैं।  इसमें सिर्फ तेल को छोड़ दिया जाए तो समस्त कार्य रामनगरी के गरीब लोग ही करते हैं। इससे लगभग 40 लाख की धनराशि सीधे गरीब वर्ग के लोगों के पास जाती है। इससे इन गरीब तबके के लोगों को फायदा तो होता ही है साथ ही अयोध्या की इकोनॉमिकल स्तर में भी सुधार हो रहा है।

      तीन वर्षों में यहां के कुम्हार दीप बनाने में मोटर युक्त चाक का प्रयोग करने लगे हैं। यह हाथ के चाक की अपेक्षा पांच गुना अधिक दीप तैयार करता है।  गांव में  दीप तैयार हो  रहे हैं।   कुम्हारों का कहना है कि इसमें एजेंसी के माध्यम से नहीं बल्कि सीधी सप्लाई की प्रक्रिया होनी चाहिए, जो कुम्हार जितना दीप बनाकर दे प्रदेश सरकार उनके खाते में उतनी ही धनराशि भेज दे।  अगर एजेंसी ने उनके गांव से दीप नहीं लिए तो सारे सपने टूट जाएंगे!

     देव बक्श वर्मा अयोध्या

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