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    मुझको महफिल में भी तन्हाई का एहसास है क्यों, काश ये बात कोई सोचने वाला होता- साग़र वारसी

    मुझको महफिल में भी तन्हाई का एहसास है क्यों, काश ये बात कोई सोचने वाला होता- साग़र वारसी

    मिशनशक्ति : मदरसा नूरूलहुदा मे शायरो ने छात्राओं का गीत-ग़ज़लो से किया उत्सावर्धन

    शाहजहाँपुर। मिशन शक्ति के अंतर्गत रविवार को मदरसा नूरूलहुदा बिजलीपुरा में चल रहे जागरूकता कार्यक्रम में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ शायर सागर वारसी ने की। शायरों ने अपने गीत-गजलों से छात्राओं का उत्साहवर्धन किया।

    मदरसा सभागार में आयोजित काव्य गोष्ठी का आगाज छात्रा नूर फातमा ने नात-ए-पाक से किया। गोष्ठी में सागर वारसी ने तरन्नुमी अंदाज में कुछ यूं सुनाया-

    मुझको महफिल में भी तन्हाई का एहसास है क्यों।

    काश ये बात कोई सोचने वाला होता।।

    इकबाल हुसैन फूल मियां ने गजल के माध्यम से कहा-

    मुझको मंझधर में तजुरबा ये हुआ।

    काम आती है मां की दुआ किस कदर।

    राशिद हुसैन राही ने यूं गुनगुनाया-

    हमें अब तो राही यही लग रहा है।

    कि हम उसके बिन अब अधूरे रहेंगे।।

    युवा शायर इशरत सगीर इशरत ने सुनाया-

    पुर सुकून बातों से दर्द खींचने वाले।

    आदती की सूरत में इक दवा भी होते हैं।।

    शायरा गुलिस्तां खान ने नारी शक्ति का उत्साह कुछ यूँ बढ़ाया-

    मैं इंकलाब लिखूंगी तू बेड़ियां लिखना।

    मैं सुर्खियों में रहूंगी तू खामियां लिखना। 

    कवि लालित्य पल्लव भारती ने प्रेम-प्रीत की बात इस तरह कही-

    गीत मुझे भी गा लेने दो, उसके बाद चला जाऊंगा।

    कुछ पहचान बना लेने दो, उसके बाद चला जाऊंगा।।

    प्रधानाचार्य इकबाल हुसैन उर्फ फूलमियां ने अतिथि शायरों का बैच लगाकर स्वागत किया। संचालन राशिद हुसैन राही ने किया। कार्यक्रम में मुख्य अनुदेशक सबिहा सुल्ताना, सुबूही खान, नाहीद बेगम, तमहीद बेगम, मुईन खां, शारिक अली, साजिद खां, कामरान हुसैन, हाफिज जाहिद, मुबीन खॉ, अब्दुल कादिर खां, निफासद खां आदि मौजूद थे।

    फ़ैयाज़ उद्दीन, शाहजहाँपुर

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