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    इंसानियत में विश्वास रखने वालों की उर्दू भाषा किसी जाति विशेष की नहीं- वरिष्ठ साहित्यकार डॉ जनार्दन राय

    इंसानियत में विश्वास रखने वालों की उर्दू भाषा किसी जाति विशेष की नहीं- वरिष्ठ साहित्यकार डॉ जनार्दन राय 

    बलिया। अंजुमन  तरक्की उर्दू की बलिया इकाई के तत्वावधान में द्वारा आयोजित विश्व उर्दू दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह में पूर्वांचल के वरिष्ठ साहित्यकार  डॉ जनार्दन  राय ने कहा उर्दू सारे विश्व में इंसानियत की  ऐसी भाषा है, जिसमें कई भाषाओं का संगम है उन्होंने उर्दू के उत्थान के लिए किए जा रहे प्रयासों  की सराहना करते हुए कहा की उर्दू मे जो समर्पण का भाव मिलता है  और जिसकी बदौलत दुनिया में इंसानियत मैं विश्वास रखने  वालों की भाषा होने के साथ एक दूसरे की भावना को समझने का सरल माध्यम है।

    कामरेड , राम कृष्ण एडवोकेट

     वही मशहूर शायर जाकिर हुसैन ने बड़े अच्छे लहजे में अपनी  गजल में उर्दू  भाषा के बारे में बड़े अच्छे ही अंदाज में सुनाया  के  उर्दू है जिसका  हमारी जुबान है खुद अपने आप में ही हिंदुस्तान है।

    वही बेसिक शिक्षाधिकारी शिवनारायण सिंह ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि उर्दू हम लोगों की भाषा है हम सभी आए दिन विभिन्न प्रकार के दिवस क्यों मनाते हैं, परंतु दिवस का सामाजिक स्तर पर क्या प्रभाव होता है इसका आकलन करना भूल जाते हैं ।

     इसी तरह उर्दू भाषा के साथ होता रहा है कि हमने दीपोत्सव तक करते रहे हैं लेकिन हमने कभी उसका असर सामाजिक ढांचे पर कितना पढ़ रहा है इसका आकलन नहीं किया आज आवश्यकता है की उर्दू दिवस मनाने के बाद इसके विकास और उत्थान में हम सभी मिलकर योगदान करें और समय-समय पर उसका आकलन करें कि इसका मआशरे ,पर कितना असर पड़ा है और कितना शेष है ,उर्दू के एक ऐसी भाषा है इसमें विभिन्न भाषाओं का समावेश एक साथ मिलता है।

    डा0 जनार्दन राय ( वरिष्ठ साहित्यकार)

    जिसमें से बहुत सारे शब्द संविधान से लेकर राजस्व के अभिलेखों में प्रयोग होता रहा है।आज आवश्यकता है कि हम सभी मिलकर संकल्प लें के उर्दू के विकास को घर-घर तक पहुंचाने में अपना योगदान करेंगे तब जाकर विश्व उर्दू दिवस की सार्थकता समाज में नजर आने लगेगी इसके पूर्व जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी सीमा पांडेय ने विश्व उर्दू दिवस के अवसर पर अपने विचार व्यक्त किए।

    मशहूर शायर ( जाकिर हुसैन )

    समारोह के दौरान अंजुमन तरक्की उर्दू के जिलाध्यक्ष डॉक्टर नुरुल होदा लारी ने उर्दू भाषा के उत्थान में योगदान के लिए सात सूत्रीय एजेंडा प्रस्तुत किया जिसका उपस्थित लोगों ने दोनों हाथ उठाकर सब समर्थन किया। वही कामरेड रामकिशन एडवोकेट डे अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा उर्दू को समझने और जानने के लिए भारतीय समाज की व्यवस्था को भी समझना होगा।

    इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार डॉ जनार्दन राय डॉक्टर देव नाथ चतुर्वेदी डॉ एम इलियास डॉक्टर मजहर आज़मी डॉक्टर हैदर अली कामरेड रामकिशन आदि ने संबोधित किया समारोह की  अध्यक्षता  डॉक्टर नुरुल हुदा लारी ने  तथा संचालन डॉक्टर अब्दुल्लअव्वल ने किया।

    आसिफ हुसैन जैदी


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