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    अयोध्या: दीपोत्सव के लिए 8 राज्यों से पहुंच रहे है दिए, गोबर गोंद मिट्टी के बने दिए प्रयोग होंगे

    अयोध्या: दीपोत्सव के लिए 8 राज्यों से पहुंच रहे है दिए, गोबर गोंद मिट्टी के बने दिए प्रयोग होंगे

    अयोध्या. मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की धर्म नगरी अयोध्या में 13 नवंबर को आयोजित होने वाले दीपोत्सव में दीये जलाने को लेकर   देश के अलग-अलग शहरों से 70 हजार दीये इकट्ठा किए हैं.  कान्हा गौशाला के गोबर से बने 1 लाख दीयों से राम जन्मभूमि को रौशन करेगा. इस बार दीपोत्सव बीते 3 वर्षो की अपेक्षा कलरफुल  ढंग से मनाया जा रहा है.  अयोध्या के सभी मठ-मंदिरों को सजाने का काम चल रहा है.

     

     घर-घर में दीपक जले इसके लिए अपने पार्षदों के माध्यम से 2000 दीपक प्रति पार्षदों को देकर हर घर में दीपक जलाए जाने का कार्य किया जाएगा. इस बार के दीपोत्सव में सुंदरता लाने के लिए शहर के प्रत्येक प्रवेश मार्गों को लाइटिंग से डेकोरेट किया  जा रहा है.  इस बार के दीपोत्सव में 8 राज्यों से आएंगे दीये. दीपोत्सव में सभी जगह दीये जल सके और देशभर के हर राज्य और जिले से अयोध्या को दीपक मिल सके. इसके लिए 94.3 माई एफएम से सहयोग लेते हुए 8 राज्यों से 70 हजार दीयों का प्रबंध किया गया है. राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गोवा समेत आठ राज्यों से यह दीये 11 नवंबर को अयोध्या पहुंच जाएंगे.

     इस बार नगर निगम अपनी ही गौशाला के गोबर से इको फ्रेंडली दीपक बनाने का काम कर रहा है. इस कार्य में सहकार भारतीय संस्था सहयोग कर रही है. जो 1 लाख गोबर के दीये बना रही है. इन दीयों को राम जन्मभूमि परिसर सहित राम की पैड़ी में जलाया जाएगा. दीपक जलने के बाद मिट्टी के बने दीयों की उर्वरक क्षमता समाप्त हो जाती है. लेकिन गोबर गोंद और मिट्टी से बने दीपक बहुत जल्द मिट्टी में मिलकर खाद में परिवर्तित हो जाते हैं. इससे पर्यावरण संरक्षित होता है. इसके साथ ही जो महिलाएं गोबर से दीये बना रही हैं, उनका भी रोजगार बढ़ रहा है और उनको आर्थिक लाभ हो रहा है. 

    देव बक्श वर्मा, अयोध्या

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