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    कोविड 19 की गाइडलाइंस का पालन कर मनाया गया साबिर साहब का 752वां उर्स

    कोविड 19 की गाइडलाइंस का पालन कर मनाया गया साबिर साहब का 752वां उर्स

    मुरादाबाद. विश्वविख्यात दरगाह  साबिर साहब  एवं सूफी संतों की सरजमी पिरान कलियर शरीफ में मखदूम अलाउद्दीन अहमद साबिर रहमतुल्लाह अलैह का 752 वा उर्स चल रहा है साबिर साहब के 752 वें सालाना उर्स इस बार कोविड 19 के चलते मनाया है रहा है और दरबारे साबिर पाक से अकीदतमंदों के द्वारा मुल्क की हिफाजत और कोरोना वायरस जैसे महामारी बीमारी के लिए दुआएं की जा रही है.

    आज सुबह 10 बजे उर्स की सबसे बड़ी रस्म कुल शरीफ अदा की गई रस्म के बाद देश के अमनो अमन चैन और सकून के खैर के लिए सज्जादा नशीन शाह मंसूर एजाज साबरी एवं नायब सज्जादा नशीन शाह अली विश्व प्रसिद्ध दरगाह साबिर साहब कलियर शरीफ ने दुआ कराई उसके बाद सोशल डिस्टेंस का ख्याल रखते हुए और डब्ल्यूएचओ के मानक जो कोविड 19  के तहत बताए गए है.

    उनका ख्याल रखते हुए महफिल-ए-समा का आयोजन भी किया गया हालांकि इस बार  कोविड 19 के चलते बड़ी संख्या में जायरीन नही आ पाए वही कुल शरीफ में साबिर पाक से अकीदतमंदों का  आलम यह था कि दस बजे अदा होने वाली कुल शरीफ की रस्म में सुबह चार बजे से लोग जुटना शुरू हो गए थे। दरगाह परिसर पूरा भरने के बाद साबिर पाक के चाहने वाले बाहर बाजरों व सड़कों पर जहां तहां खड़े हो गए कुल शरीफ की रस्म शुरू होते ही तमाम जायरीन हाथ उठाकर मन ही मन में दरबारे साबरी में रो रोकर दुआएं मांगने लगे। जिसको जहां जगह मिली उसने वहीं साबिर पाक से अपनी फरियाद की।

    वही मीडिया से बातचीत करते हुए सज्जादा नशीन और  बहार से आने वाले जायरिनों और अकीदतमंदों ने बताया कि कलियर शरीफ दरगाह साबिर साहब का उर्स  रबी उल अव्वल का चांद दिखते ही साबिर साहब के उर्स का आगाज हो जाता है और चांद की 4 तारीख को बरेली शरीफ से पैदल जो झंडा आता है उसके बाद मेहंदी डोरी की रेशम शुरू हो जाती है और चांद की 7 रबी उल अव्वल तारीख को लंगर शुरू हो जाता है .

    8 तारीख को सुबह सूफी हज़रात के बिस्तर लग जाते हैं जहां उन्हें पहुंचा जाता है और फिर महफिले शुरू हो जाती हैं 12 रबी उल अव्वल को नबी सल्लल्लाहो वाले वसल्लम की वफात के दिन कुल शरीफ होता है उसके बाद दुआ होती है और 13 तारीख को मखदूम अलाउद्दीन अहमद  साबरी रहमतुल्ला अलेह का कुल शरीफ होता है इसी तरह 14 रबी उल अव्वल को साबिर पाक का ग़ुस्ल शरीफ होता है ग़ुस्ल शरीफ फजर की नमाज के बाद से शुरू हो जाता है  साबिर साहब की दरगाह पर देश-विदेश से जायरीन अपनी-अपनी आस्था लेकर आते हैं और रात में रुखसती की महफिले होती हैं यही सिलसिला 17 रबी उल अवल तक चलता रहता है ।

    वही साबिर साहब के 752  वे उर्स पर दरगाह साबिर पाक के सज्जादा नशीन अली शाह ने की और कहा कि साबिर साहब की दरगाह पर देश और विदेशों से जायरीन अपनी-अपनी आस्थाये  मन्नतें मुरादे लेकर आते हैं लेकिन इस बार  कोविड-19 के चलते  विदेश से जायरीन नहीं आ पाए हैं और इस बार कोरोनावायरस  जैसी महामारी बीमारी के कारण जो गाइडलाइन कोविड 19 के तहत शासन और प्रशासन की ओर से हमें दी गई है उसी के तहत हम लोग साबिर पाक का 752 वा उर्स मना रहे हैं  जिसमें तमाम सरकार द्वारा दी गई गाइडलाइन का पालन भी किया जा रहा है वही साबिर साहब के वसीले से दुआ की जा रही है कि  हमारे देश में अमन चैन और सुकून रहे और जो लोग विदेश से या बाहर से आने वाले जायरीन इस बार दरबारे साबिर में नहीं आ पाए हैं.

    साबिर साहब उनकी हाजिरी को वहीं से कबूल करें  और  मुल्क में फैल रही  कोरोनावायरस जैसी महामारी के खात्मे के भी दुआएं की जा रही हैं , वही सजदा नशीन ने अवाम से भी अपील की और कहा कि  सरकार द्वारा बताई गई गाइडलाइंस कर सभी पालन करें दरगाह परिसर में जो भी जायरीन दरगाह साबिर पाक की दरगाह करने के लिए अंदर आए वह मास्क लगाकर आए हाथों को अपने सेनीटाइज करके आए किसी भी प्रकार का कोई भी ऐसा कार्य ना करें  जिससे  हमारे देश में  कोरोनावायरस का आंकड़ा  बढ़ जाए वही सजादा नशीन सूफी इज्म को घटता देखकर वो हैरान है और सूफी इज्म को उठाने और बढ़ाने के लिए हर दरगाहो में बड़े पैमाने पर काम किए जा रहे हैं हिंदुस्तान में जितनी भी दरगाह हैं और उन दरगाह के जितने भी गद्दी नशीन हैं वह सूफी इज्म को उठाने का काम कर रहे है वही उन्होंने बताया कि 4 रबी उल अव्वल का चांद दिखते ही साबिर साहब के उर्स का आगाज हो जाता है और फिर 17 रबी उल अवल तक साबिर साहब का उर्स चलता है ।

    कमालुद्दीन, मुरादाबाद 

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