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    अयोध्या: गांवों में पंचायत चुनाव की बहने लगी बयार, संभावित प्रत्याशियों का सोशल मीडिया पर शुरू हुआ प्रचार

    अयोध्या: गांवों में पंचायत चुनाव की बहने लगी बयार, संभावित प्रत्याशियों का सोशल मीडिया पर शुरू हुआ प्रचार

    अयोध्या. जनपद  में गांव गांव  में  पंचायत चुनाव की सरगर्मी शुरू हो गई है संभावित प्रत्याशी  अपना चुनाव प्रचार  सोशल मीडिया के माध्यम से  घर घर पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं  और लुभावने वादे अभी से  करना शुरू कर दिए हैं! पंचायत चुनाव  की तैयारियों में जुटे उम्मीदवार सोशल मीडिया पर  बधाईयों का  दौर अपना वोट साधने में नहीं चूक रहे हैं.

     त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कब होगा कुछ पता नहीं है  अनुमान लगाया जा रहा है  की मार्च-अप्रैल  में पंचायत चुनाव हो जाएंगे जैसा कि पंचायत चुनाव नवंबर दिसंबर 2020 में ही हो जाने थे किंतु कोरोना संकट के चलते पंचायत चुनाव की तैयारी नहीं हो सकी थी और ना ही चुनाव हो सके जिस कारण  पंचायत चुनाव कराने की तैयारियां अब शुरू हो गई है अनुमान लगाया जा रहा है कि मार्च-अप्रैल 2021 में चुनाव होंगे उसी के मद्देनजर गांव गांव में खासतौर से मलाईदार पद ग्राम प्रधान के लिए लोग एड़ी चोटी एक करना शुरू कर दिए हैं.

     अभी से ही संभावित प्रत्याशियों द्वारा सोशल मीडिया पर जमकर प्रचार प्रारंभ हो गया है. कोई शुभकामना संदेश दे रहा है तो कोई प्रतिदिन सुप्रभात और शुभ रात्रि करके अपने वोटरों को साधने में जूटा है. इतना ही नहीं कुछ ऐसे भी उम्मीदवार हैं जो गांव में विकास से संबंधित मुद्दा भी वायरल कर रहे हैं जिससे गांव में रहने वाले लोगों को अपने पक्ष में कर सकेंं. वैसे भी अभी तक जो माहौल देखने को मिल रहा है उससे एक बात तो स्पष्ट है की फेसबुक‚  व्हाट्सएप‚ टि्वटर पर लोग समूह बनाना शुरू कर दिया और अपना प्रचार प्रसार करने में जुटे हुए हैं.

    एक समय था जब पंचायत चुनाव के आते ही गांव के दीवारों पर वॉल पेंटिंग कराई जाती थी, उसके बाद घरों के दरवाजे पर और दीवारों पर प्रत्याशियों के पोस्टर चिपका दिए जाते थे ,यहां तक की विद्युत पोल और सरकारी  आवास भी इससे अछूते नहीं रहते थे!. लेकिन गुजरते दौर में पंचायत चुनाव के प्रचार में भी बदलाव देखने को मिल रहा है.  चुनाव कब कराया जाएगा यह निश्चित नहीं हुआ है लेकिन सोशल मीडिया पर प्रत्याशियों की सक्रियता बता रही है कि इस बार डिजिटल रूप से प्रचार करने की तरफ अधिक लोगों का रुझान है. ऐसा इसलिए भी किया जा रहा है क्योंकि डिजिटल मीडिया पर प्रचार करने का खर्च ना के बराबर है.

    अनुमान है कि आगामी पंचायत चुनाव  में युवाओं की एक अच्छी खासी भागीदारी देखी जाएगी! जानकारों का कहना है कि ग्राम प्रधान के कार्यकाल में आने वाले सरकारी खजाने के पैसे तथा तमाम सुविधाओं ने युवाओं को आकर्षित किया है. इस सिक्के का दूसरा पहलू यह भी है कि पढ़ाई लिखाई करने के बाद कहीं नौकरी न लग पाने या रोजगार न मिल पाने के कारण युवा वर्ग राजनीति की तरफ भी आकर्षित हो रहा है.  गंवई राजनीति में युवाओं की भागीदारी होने के चलते गांव का भी काफी अच्छा विकास हो सकता है. पंचायत चुनाव को लेकर रूपरेखा तैयार की जा रही  अगले साल अर्थात 2021 के अप्रैल या मार्च मार्च में यूपी में पंचायत चुनाव कराया जा सकता है! 

    देव बक्श वर्मा अयोध्या

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