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    सामने आया पुलिस का मानवीय चेहरा, दो बच्चियों के मामले में सूचना के बाद भी निष्क्रिय रही बाल अधिकार से जुड़ी संस्थाएं

    सामने आया पुलिस का मानवीय चेहरा, दो बच्चियों के मामले में सूचना के बाद भी निष्क्रिय रही बाल अधिकार से जुड़ी संस्थाएं

    गोरखपुर। अब इसे कलयुग कहिये या फिर गरीबी की मार जब एक मां ने अपने जिगर के दो टुकड़ों को समाज के दामन में लावारिस हाल में छोड़ दिया। शुक्रवार की शाम नगर निगम चौकी प्रभारी और पूर्व में कोतवाली थाने के बाल कल्याण अधिकारी रहे राम सिंह के मोबाइल पर काल आई कि जिला अस्पताल के रैन बसेरा में दो बच्चियां लावारिस हाल में पड़ी हैं। मौके पर पहुंचे उपनिरीक्षक मोहम्मद दानिश और कांस्टेबल शक्ति सिंह ने दोनों बच्चियों की हालत देखते हुए तत्काल अपने उच्चाधिकारियों को सूचित किया। इसके बाद चौकी प्रभारी राम सिंह ने लखनऊ से लगाए गोरखपुर के बाल अधिकारों के लिए जिम्मेदार तमाम सरकारी व गैर सरकारी संस्थाओं को फोन कर डाला लेकिन कहीं से कोई मदद नही मिली ।

    मौके पर पहुंचे उपनिरीक्षक और कांस्टेबल ने अपने कर्तव्यों का पालन करने के साथ मानवता की मिसाल भी पेश कर दिया। पुलिस के जवानों ने न सिर्फ दोनों बच्चियों को नए कपड़े, टॉफी, बिस्कुट और दूध मुहैया कराया बल्कि दोनों बच्चियों का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, चरगांवा में कोविड टेस्ट भी कराया। सब कुछ हो जाने के बाद चाइल्ड लाइन से जुड़े लोग कोतवाली थाने पर पहुंचे और दोनों बच्चियों को अपनी सुपुर्दगी में ले लिया। बहरहाल, इस मामले ने पुलिस के मानवीय चेहरे और बाल अधिकारों से जुड़ी सरकारी संस्थाओ का गैरजिम्मेदाराना व्यवहार सबके सामने रख दिया।

    अमित कुमार सिंह

    INA News गोरखपुर

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