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    अयोध्या: किसानों के ऊपर पड़ रही दोहरी मार, गन्ना की फसल में रेड रॉट बीमारी का प्रकोप

    अयोध्या:  किसानों के ऊपर पड़ रही दोहरी मार, गन्ना की फसल में रेड रॉट बीमारी का प्रकोप

    अयोध्या। जनपद में गन्ना की फसल में एक के बाद दूसरी  बीमारियों कीटों का  प्रकोप बढ़ता जा रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार फसल चक्र अपनाना चाहिए । किंतु बढ़ती जनसंख्या के कारण किसानों की जोत इतनी कम हो गई है अब किसी तरह से जीविकोपार्जन कर रहे हैं। यदि फसल चक्र को अपनाएंगे तो फसलों को कहां बोएगे । यह किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या है । बताया गया कि पक्का बोइंग रोग के बाद गन्ने की फसल पर रेड रॉट (लाल सड़न) बीमारी के हमले ने किसानों की नींद उड़ा दी है। 15 नवंबर के बाद नया पेराई सत्र शुरू होने की संभावना है। रेड रॉट ने गन्ने की विकास यात्रा रोक दी है। किसान परेशान है कि विकास न होने से गन्ने की तौल पर अंतर आएगा। वजन घटने से लागत निकलना मुश्किल हो जाएगा। 

     किसानो के अनुसार इससे पहले पोक्का बोइंग रोग के हमले से किसानों ने दवा का छिड़काव कर किसी तरह फसल बचायी। अब रेड रॉट बीमारी के हमले से परेशान हैं। बीमारी के हमले से पहले तीसरी व चौथी पत्ती पीली होने से गन्ना की फसल सूखने लगती है। जिल में गन्ना फसल पर रेड रॉट का प्रकोप है। वहीं किसान प्रभावित गन्ने का क्षेत्रफल गन्ना विभाग से ज्यादा बताते हैं। जिस खेत में गन्ना फसल में यह बीमारी लगी है, उसमें किसान एक वर्ष तक गन्ना की बोआई न करने की सलाह गन्ना विभाग ने किसानों को दी है।

         जिला गन्ना अधिकारी एपी सिंह ने किसानों को गन्ना फसल बचाव के लिए रोगरोधी दवाओं का छिड़काव करने की सलाह दी है। उनके अनुसार जिस गन्ने के पौधे में यह रोग लगा है, उसे उखाड़ कर फेक दें। पांच से 10 ग्राम ब्लीचिग पाउडर मिट्टी डाल कर उस स्थान को ढक दें। खेत की मेड़बंदी को जिला गन्ना अधिकारी ने जरूरी बताया। कहा कि मेड़बंदी से सिचाई करते वक्त पानी दूसरे खेत में नहीं पहुंचेगा। दूसरे खेत में पानी पहुंचने से बीजाणु भी पहुंच जाएंगे।  किसान एक प्रजाति पर आश्रित न रहकर बदल-बदल कर गन्ने की प्रजाति की बोआई कर गन्ने की फसल को बीमारी से बचाएं।

     देव बक्श वर्मा, अयोध्या

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