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    अयोध्या: किसानों के खेत की मिट्टी का 1 साल से नहीं हो रहा मृदा परीक्षण

    अयोध्या: किसानों के खेत की मिट्टी का 1 साल से नहीं हो रहा मृदा परीक्षण

    अयोध्या। जनपद में किसानों की आमदनी दूनी करने के लिए कृषि विभाग द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही थी। किंतु देखा जा रहा है कि किसानों के खेत की मिट्टी की जांच, मृदा परीक्षण यानी सोयल टेस्ट किया जा रहा था। जिससे किसानों को यह पता चल जाता था कि उनके खेत में कितनी उर्वरक पडनी है। किंतु सरकार द्वारा 1 साल से ज्यादा समय बीत गया। किसानों के खेत की मिट्टी के नमूने नही लिए जा रहे हैं ।और न ही किसानों के खेत की मिट्टी की जांच, मृदा परीक्षण, सोयल टेस्ट हो रही है। प्रत्येक जिले में कई लाख रुपया लगाकर मिट्टी जांच के लिए मशीनें लगाई गई थी प्रयोगशालाए बनी है। मृदा परीक्षण विभाग भी बना है। किंतु मृदा परीक्षण नहीं हो रहा है। मशीनें धूल खा रही है। जिस कारण सरकार को प्रदेश में कई करोड़ रुपए का हानि उठाना पड़ सकता है। और किसान अंधाधुंध अपने खेत में उर्वरक का प्रयोग कर रहे हैं। क्योंकि उन्हें यह नहीं पता है कि उनके किस फसल में कितने उर्वरक पडनी है। ऐसे में सरकार के इस योजना पर कि किसानों के आमदनी दुगनी होगी उस पर पानी फिरता नजर आ रहा है।  

    इस बिंदु पर मृदा परीक्षण विभाग कुछ भी बताने से बचता है और कहता है कि योजना में परीक्षण कार्य नहीं हो रहा है। कार्ययोजना  नहीं आई है लक्ष्य व कार्य योजना आने पर परीक्षण के कार्य होंगे। लेकिन कब शुरू होगा इसको बता पाना संभव नहीं है।  मृदा के बारे में किसान समझे और जागरूक हो यह भी बात बताई जा रही है । 40 फीसदी किसानों के खेत प्रदेश में  बंजर होने की कगार पर है। इसमें प्रमुख  कारण है अत्यधिक रसायनिक खाद के उपयोग की वजह से प्रदेश के खेत बंजर हो रहे हैं। जिस कारण खेत में फसलों का उत्पादन कम हो जाता है  । गत वर्षो में   वैज्ञानिकों ने  मिट्‌टी की जांच  किया तो पाया कि जमीन अम्लीय हो गई है। इसी वजह से उत्पादन कम हो रहा है। प्रदेश की 40 फीसदी जमीन इससे प्रभावित हुई है। वैज्ञानिकों का कहना था कि जानकारी के अभाव में किसान मिट्‌टी का परीक्षण करवाए बिना ही खाद-यूरिया का इस्तेमाल करते हैं। अधिक उत्पादन के चक्कर में ज्यादा खाद का उपयोग करते हैं। इस वजह से उर्वरा शक्ति घट रही है।

    ऐसे में कृषि विभाग ने मिट्‌टी की  जांच के लिए  व्यवस्था की है।  प्रत्येक जिले में बड़ी लागत से मिट्टी की जांच, मृदा परीक्षण यानी सोयल टेस्ट की व्यवस्था किया गया है। जिसके लिए गांव का चयन करके कार्य योजना बना करके निशुल्क जांच कराई जाती है। विभाग की ओर से किसानों  के खेत की मिट्टी का मृदा परीक्षण कराने   से पता चल जाएगा कि मिट्‌टी की प्रवृति कैसी है। और किस प्रकार के खाद-यूरिया का कितनी मात्रा में उपयोग करना है। 

    किसानों को अपने खेतों की मिट्टी की जांच कराने के लिए शुल्क नहीं देना पड़ता । कृषि विभाग द्वारा मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालाओं में जांच की सुविधा निशुल्क उपलब्ध कराई गई थी। जांच के बाद किसानों को मृदा स्वाथ्य कार्ड   श निशुल्क वितरित किए जाते थे। 

     कृषि विभाग द्वारा किसानों को खेत से मिट्टी के नमूने लेने और जांच से होने वाले फायदे बताए जाते जाते थे।  मिट्टी की जांच के बिना फसल में उर्वरकों का इस्तेमाल करना बिना डाक्टर की सलाह से दवा का प्रयोग करने के समान है। पैदावार में बढ़ोतरी ज्यादा खाद देने की नहीं बल्कि संतुलित मात्रा से होती है।  ब्लॉक स्तर पर मिट्टी परीक्षण प्रयोग शाला खोली  गई है।  प्रयोगशाला में मिट्टी की जांच सभी किसानों को मुफ्त जांच की सुविधा दी जा रही है। मिट्टी की जांच रिपोर्ट के साथ ही हर खेत का मृदा स्वास्थ्य मिलना चाहिए। जिससे पता चलेगा कि आपके खेत मेंं किन तत्वों की कमी है। इस आधार संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग करने से पौधों की बढ़वार होगी।

       किंतु विगत 1 साल से ज्यादा का समय हो गया है। किसान के खेत की मिट्टी की जांच नहीं हो रही है और ना ही विभाग द्वारा नमूने लिए जा रहे हैं मशीनें धूल खा रही है जांच करने वाले कर्मचारी बेरोजगार होकर टकला खा रहे हैं इससे कई नुकसान हो रहा है एक तरफ मशीन खराब हो रही है दूसरी तरफ टेस्ट करने वाले कर्मचारी बेरोजगार हो गए हैं तीसरे किसानों के खेत की मिट्टी की जांच ना होने से अंधाधुंध उर्वरक का प्रयोग हो रहा है जिससे खेत में अम्लीय शक्ति बढ़ रही है और खेत बंजर हो जाएंगे।

    देव बक्श वर्मा
    आई एन ए न्यूज़ अयोध्या - उत्तर प्रदेश

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