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    साक्षात्कार- गीतकार हसरत जयपुरी ने सुनाई लव स्टोरी

    साक्षात्कार- गीतकार हसरत जयपुरी ने सुनाई लव स्टोरी

    पत्रकारिता के दौरान एसी शख्सियतों के साक्षात्कार लेने का भी शुभ अवसर भी जिन्हें याद करके आज भी मन रोमांचित हो उठता है। एसी ही विभूति थे बालीवुड के महान गीतकार हसरत जयपुरी। जिन्होंने हिंदी फिल्मों को बेशुमार

    मधुर गीत दिए। वे 19 मार्च 1994 को सूरसदन में चित्रांशी द्वारा आयोजित याद ए फिराक आल इंडिया मुशायरे में पधारे थे। मुशायरा शुरू होने पर ही उनका आगमन हुआ तो सीधे मंच पर पहुंच गए। मंच पर विख्यात शायर कैफी आजमी भी मौजूद थे। पूरे मुशायरे का कवरेज अमर उजाला में लिख कर भेज दिया। अब हसरत जयपुरी शहर में आएं और उनका साक्षात्कार न हो, एसा नहीं हो सकता था। मैं व अन्य पत्रकार साथी मुशायरा खत्म होने तक उनका इंतजार करते रहे।

     मुशायरा खत्म होने के बाद हसरत जी मंच से उतरे तो उन्हें हम पत्रकारों ने घेर लिया। मैंने पूछ लिया कि आपकी एक लवस्टोरी बहुत चर्चित है।

      

    (चित्र 19 मार्च 1994 को याद ए फिराक आल इंडिया मुशायरे का है, जिसमें चित्रांशी के अध्यक्ष श्री केसी श्रीवास्तव,  श्री हसरत जयपुरी व कैफी आजमी जी की अगवानी कर रहे हैं।)

    यह सुनते ही उनके चेहरे की झुर्रियां गुलाबी पड़ गईं। चेहरे पर अजीब सी मुस्कान थिरकने लगी। वे बोले, युवावस्था में ही उनके मन में कविता के कीड़े कुलबुलाने लगे थे। अपने पड़ोस में रहने वाली एक युवती राधा से प्यार हो गया। उसके लिए कविता लिखी थी-ये मेरा प्रेमपत्र पढ़ कर, के तुम नाराज़ न होना। वे बोले, यह ध्यान नहीं कि कविता राधा को दी कि नहीं, लेकिन फिल्म निर्माता राज कपूर ने इसे अपनी फिल्म संगम (1964) में शामिल किया और यह गीत पूरे भारत में लोकप्रिय हो गया था। इसके बाद बोल राधा बोल संगम होगा कि नहीं, गीत में भी राधा के नाम का उपयोग किया।  

    इस प्रसंग को सुनाने के बाद ही वे ज्यादा देर तक नहीं रुके और सूरसदन के वीआइपी गेट की सीढ़ियों से चित्रांशी के अध्यक्ष श्रीकेसी श्रीवास्तव के कंधे का सहारा लेकर उतरे और कार से गंतव्य को रवाना हो गए। उनके साथ विख्यात शायर कैफी आजमी भी थे।

    श्री हसरत जयपुरी जी का यह प्रेम प्रसंग शुरू से चर्चा का विषय बना था, जिसे उन्होंने बड़े ही चटखारे के साथ हम लोगों को सुनाया था।

     

    जयपुर में जन्मे हसरत जयपुरी का नाम इकबाल हुसैन था।

    1940 में बस परिचालक की नौकरी के लिए मुंबई आ गए। वह मुशायरों में हिस्सा लेते थे। एक मुशायरे में, पृथ्वीराज कपूर ने जयपुरी की शायरी सुनी और अपने बेटे राज कपूर से उनके लिए सिफारिश की। राज कपूर उन दिनों शंकर जयकिशन के साथ एक संगीतमय प्रेम कहानी, बरसात (1949) की योजना बना रहे थे। जयपुरी ने फिल्म के लिए अपना पहला गीत जिया बेकरार है लिखा। उनका दूसरा गीत छोड़ गए बालम था।शैलेंद्र के साथ जयपुरी ने 1971 तक राजकपूर की सभी फिल्मों के लिए गीत लिखे। जयकिशन की मृत्यु के बाद तथा मेरा नाम जोकर (1970) और कल आज और कल (1971) की असफलताओं के बाद, राज कपूर ने अन्य गीतकारों और संगीत निर्देशकों की ओर रुख किया। राज कपूर शुरू में उन्हें प्रेम रोग (1982) के लिए वापस बुलाना चाहते थे, लेकिन बाद में एक और गीतकार, अमीर क़ज़लबाशके लिए राज़ी हो गए। कपूर ने आखिरकार उन्हें फिल्म राम तेरी गंगा मैली (1985 ) के लिए गीत लिखने के लिए कहा। बाद में, उन्होंने हसरत को फिल्म हिना (1991) के लिए तीन गाने लिखने के लिए भी आमंत्रित किया। जब साथी गीतकार शैलेन्द्र ने निर्माता के तौर पर फ़िल्म तीसरी कसम बनाई, तब उन्होंने जयपुरी को फिल्म के लिए गीत लिखने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने फिल्म हलचल (1951) के लिए पटकथा भी लिखी। गीतकार के रूप में उनकी आखिरी फिल्म हत्या: द मर्डर (2004) थी। अन्य तमाम लोकप्रिय गीत उन्होंने लिखे। 17 सिंतबर 1999 को उन्हें इस संसार से विदा ले ली। उन्होंने 300 से अधिक फिल्मों के लिए दो हजार से भी अधिक गीत लिखे थे।

    (जीवन परिचय इंटरनेट के आधार पर है।)

    आदर्श नंदन गुप्त...

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