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    जल संग्रहण करने हेतु जल संचयन के कार्यों को सरकार की प्राथमिकता

    जल संग्रहण करने हेतु जल संचयन के कार्यों को सरकार की प्राथमिकता

    सीतापुर.
    जिलाधिकारी अखिलेश तिवारी ने बताया कि मा0 मुख्यमंत्री जी द्वारा भविष्य हेतु जल संग्रहण करने हेतु जल संचयन के कार्यों को सरकार की प्राथमिकता में सम्मिलित किया गया है। इस क्रम में मा० जल शक्ति मंत्री डा0 महेन्द्र सिंह द्वारा भी प्रदेश के समस्त जनपदों के समस्त शासकीय, अर्द्धशासकीय भवनों तथा स्कूल-कालेजों के भवनों पर अनिवार्य रूप से रूफटाप रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली की स्थापना के निर्देश दिये गये है।
     उन्होंने बताया कि जल संचयन को व्यापक जन सहभागिता के द्वारा जन आन्दोलन का रूप दिये जाने की आवश्यकता है। अतएव इसमें समस्त नागरिकों से सक्रिय योगदान की अपेक्षा है। अतः समस्त व्यवसायिक प्रतिष्ठानों/औद्योगिक इकाइयों/गैर सरकारी संगठनों एवम् कृषकों इत्यादि से अनुरोध है कि अपने-अपने कार्य क्षेत्रों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली स्थापित करते हुये जल संचयन के कार्य प्रभावी रूप से किए जाएं। ग्रामीण क्षेत्रों में महात्मा गाँधी राष्ट्रीय रोजगार गारन्टी योजना के अन्तर्गत भी व्यक्तिगत एवम् सार्वजनिक स्थलों पर जल संचयन के विविध कार्य किए जा रहे है। जिसमें गाँव के शासकीय विद्यालयों पर रूफटाप रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली की स्थापना तथा लाभार्थी कृषक के खेत में तालाब, रिचार्ज पिट, इत्यादि कार्य सम्मिलित है। इस हेतु खण्ड विकास अधिकारी से सम्पर्क किया जा सकता है। जल संचयन कार्यों हेतु सुलभ डिजाइन भूगर्भ जल विभाग की वेबसाइट upgwd.gov.in मनरेगा की वेबसाइट  www.nerga.nic.in अथवा जनपद के भूगर्भ जल विभाग/लघु सिंचाई विभाग से प्राप्त कर नई तकनीकि के आधार पर  कृषक भाई, आम नागरिक, औद्योगिक इकाईयाँ तथा गैर सरकारी संगठन इस विधि को अपना सकते है।

     इसी क्रम में भूमि संरक्षण अधिकारी ने अवगत कराया है कि जनपद की कम उपजाऊ एवं भूमि क्षरण समस्या से ग्रसित ग्राम पंचायतों का चयन वाटर शेड के आधार पर करके लगभग 1223 हे0 एवं वित्तीय 215 लाख के सापेक्ष कुल 13 परियोजनाओ मे 31 अगस्त तक मनरेगा योजनान्तर्गत लगभग 518.0 हे0 क्षेत्र का उपचार एवं वित्तीय 44.86 से लगभग 23318 मानव दिवस सृजित कर अप्रवासी/मनरेगा मजदूरों को संकट के समय मे रोजगार के अवसर प्रदान करते हुए वर्षा के दौरान होने भूमि कटान/क्षरण को रोका गया साथ ही वर्षा से प्राप्त जल को मनरेगा योजना द्वारा सृजित की गयी परिसम्पत्तियों के माध्यम से भूमि में नमी की मात्रा बढ़ाते हुए भूगर्भ जल स्तर को घटने से भी रोका गया।
     इसके साथ-साथ वर्षा द्वारा बहकर ले जाने वाली मिट्टी के साथ पोषक तत्वों को रोककर उपज मे भी वृद्धि का प्रयास किया गया है। विभिन्न परियोजनाओ मे रोजगार के अवसर उपलब्ध कराते हुए लगभग 120 हे0 कन्टूर बंन्धी/326 हे0 मार्जिनल/पेरी फेरल 72 हे0 अवरोध बांध (चेक डेम) की परिसम्पत्तियाँ सृजित की गयी है।

    शरद कपूर
      सीतापुर

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