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    टैंट में तख्त पर बैठकर लिया अनुराधा पौंडवाल का इंटरव्यू

    टैंट में तख्त पर बैठकर लिया अनुराधा पौंडवाल का इंटरव्यू

    दो मई 1997, कोठी मीना बाजार मैदान। यहां देवी जागरण का आयोजन किया गया था, जिसमें विख्यात गायिका अनुराधा पौंडवाल और उनकी बेटी कविता पौंडवाल भजन प्रस्तुत करने आईं थीं।

    कार्यक्रम न होने की अफवाह फैला दी गई। निर्धारित राशि उन्हें नहीं दी गई। कार्यक्रम संकट में आ गया था। इस दौरान संकटमोचन के रूप में उभर कर आए डाक्टर सोप कंपनी के डायरेक्टर श्री अशोक जैन। उन्होंने कमान संभाली और अपने स्तर पर पूरी व्यवस्था की। श्री जैन के पिताजी श्री पदमचंद जैन की इच्छा के अनुसार अनुराधा पौंडवाल का प्रवास भी उनके जयपुर हाउस स्थित आवास पर कराया गया था।
    कार्यक्रम बहुत शानदार रहा। अमर उजाला में इसके कवरेज के लिए तत्कालीन सिटी इंचार्ज श्री एसपी सिंह जी ने मुझे भेजा था। उसके प्रारंभिक कार्यक्रम की कवरेज मैंने फोटो जर्नलिस्ट श्री जगदीश को लिख कर दे दी। बाकी कवरेज में श्री एसपी सिंह जी को फोन पर नोट करा दी। अब बारी थी इंटरव्यू की। कार्यक्रम सहयोगी डा.मधुरिमा शर्मा व श्री अशोक जैन ने इंटरव्यू की व्यवस्था की। टेंट में पीछे ग्रीन रूम तो था नहीं, पीछे टैंट में तख्त पर ही उनका इंटरव्यू लिया।इस दौरान वरिष्ठ चित्रकार प्रो अश्विनी शर्मा भी मौजूद थे।
    इसके बाद अनुराधा जी व कविता जी कई बार आगरा आईं और उनका कवरेज किया, साक्षात्कार लिए, लेकिन यह पहला साक्षात्कार हमेशा याद रहेगा।कविता पोंडवाल ने कमलानगर की जनकपुरी में मेरे द्वारा संपादित स्मारिका जन जन के प्रभु श्री राम का विमोचन 2013 में किया था।
     
    अनुराधा जी ने बातचीत के दौरान बताया कि उन्होंने कभी संगीत नहीं सीखा। यह ऐसी कला है जो किसी के सिखाने से नहीं आती। खुद को समर्पित होना पड़ता है। इसे संवारने के लिए रात-दिन अभ्यास करना पड़ता है, तब जाकर मंजिल के करीब पहुंचते हैं। मैं आज भी उसी तरह अभ्यास करती हूं जैसा शुरुआती दौर में करती थी।

    एक प्रश्न के जबाव में उन्होंने बताया था कि कार्यक्रम कैसा भी हो छोटा या बड़ा, तैयारी पूरी गंभीरता से करती हूं। मुझे तो हर जगह मेरा सर्वश्रेष्ठ ही कार्यक्रम देना है। मैंने टेक्नोलॉजी को खुद पर हावी नहीं होने दिया। आज के दौर में ज्यादातर सिंगर सिर्फ टेक्नोलॉजी की बदौलत ही चलते हैं। टेक्नोलॉजी के भरोसे आप ज्यादा समय तक नहीं चल सकते। उनका कहना था कि संगीत सिर्फ पेशा ही नहीं बल्कि मेरी जीवन शैली है। मेरी रुह है, मेरी आत्मा है। मुझे गज़ल गाने में थोड़ी झिझक होती है पर गीत और भजन गाना ज्यादा पसंद है।

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    श्री अशोक जैन (डॉकटर सोप  ) को श्रद्धांजलि

    इस कार्यक्रम में सहयोगी रहे श्री अशोक जैन का निधन अभी हाल ही में हो गया। दो दशकों में उनसे कार्यक्रमों में कई बार मुलाकात हुई। फिल्म प्रोड्यूसर श्री रंजीत सामा के सभी कार्यक्रमों में वे मिल जाते थे। बहुत ही मिलनसार व्यक्ति थे। कोरोना काल से पहले इन्क्रडेबिल इंडिया फाउंडेशन की एक मीटिंग में उनसे अंतिम मुकालात हुई थी। उन्हें मैं श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। अनुराधा पौंडवाल के इकलौते पुत्र आदित्य पौंडवाल का भी पिछले दिनों निधन हो गया। उन्हें भी मैं श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूं।   

    आदर्श नंदन गुप्त

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