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    बिसवां में साहित्य सृजन मंच के संयोजन में विचार गोष्ठी आयोजित

    बिसवां में साहित्य सृजन मंच के संयोजन में विचार गोष्ठी आयोजित

    बिसवां (सीतापुर).
    हिन्दी दिवस की पूर्व सन्ध्या पर साहित्य सृजन मंच, बिसवाँ के संयोजन में एक विचार गोष्ठी का आयोजन हुआ। गोष्ठी में कवियों एवं साहित्यकारों ने हिन्दी की आवश्यकता और महत्व को रेखांकित करते हुए अपने विचार रखे।

     गोष्ठी को संबोधित करते हुए फतेहपुर के साहित्यकार एवं समीक्षक डॉ. शैलेष गुप्त 'वीर' ने कहा- "हिन्दी से भिन्न होकर हमारी अस्मिता का कोई मूल्य नहीं रह जायेगा। हमारे राष्ट्र में एक बहुत बड़े भूभाग में हिन्दी बोली और समझी जाती है। यह हमारे स्वाभिमान और सम्प्रभुता की भाषा है। परिवर्तन के इस युग में तकनीक का प्रभावी प्रयोग और रोज़गार के अवसर हिन्दी के विस्तार को विस्तृत आयाम प्रदान करेंगे। बोलचाल और लेखन में हिन्दी के प्रयोग में हम हिचकिचायें नहीं, बल्कि गर्व की अनुभूति करें।"

     साहित्यकार एवं साहित्य सृजन मंच के संस्थापक / अध्यक्ष संदीप मिश्र 'सरस' ने कहा- "आज़ादी के इतने वर्षों बाद भी निराशाजनक तथ्य यह है कि हम मातृभाषा हिन्दी को आधिकारिक रूप से राष्ट्रभाषा नहीं बना सके। हमें यह संकल्प लेना होगा कि हिन्दी को उसका वास्तविक मान दिलायेंगे। हिन्दी भारत की धड़कन है। आज का दिन हिन्दी के प्रति अधिक दृढ़-संकल्पित होने का दिन है। हिन्दी को अधिकारिक कार्यों में भी अधिकाधिक महत्व देना होगा।"

    प्रखर हिन्दी विश्लेषक मनोज श्रीवास्तव 'मधुर' ने विमर्श को आगे बढ़ाते हुए कहा कि "आज देश में हिन्दी और अंग्रेज़ी की लड़ाई में हिन्दी पीछे होती जा रही है। यह पिछले कई दशकों से निरन्तर होता आ रहा है। हिन्दी दुनिया की सर्वाधिक पूर्ण और वैज्ञानिक भाषा है। दुखद यह है कि हिन्दी के साथ अपने घर में ही परायों के जैसा व्यवहार हो रहा है।"

    कार्यक्रम प्रभारी कवि रामकुमार सुरत ने अपनी बात रखी- "आज चौदह सितम्बर को हिन्दी दिवस भारी उत्साह से हर जगह मनाया जाता है। आज के ही दिन 1949 को भारत की संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में गणराज्य भारत  की आधिकारिक भाषा के रूप में लिखी हिन्दी को अपनाया था। हिन्दी को प्रयोग और सम्मान निरन्तर बढ़ रहा है। प्राथमिक शिक्षा का माध्यम पूरी तरह से हिन्दी ही होना चाहिए।"

    इस अवसर पर सुकवि रामदास गुप्त ने कहा- "हिन्दी विश्व में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है। विभिन्न माध्यमों के साथ हिन्दी भाषा की बढ़ती लोकप्रियता ने हिन्दीभाषी लोगों को एक नयी संजीवनी दी है। हमें आश्वस्त होना चाहिए कि हिन्दी का भविष्य उज्ज्वल है।"

    वहीं मैगलगंज के युवा कवि शिवेन्द्र मिश्र ने कहा- "हमें हिन्दी के सम्मान के लिए प्रतिदिन अपने प्रयास ज़ारी रखने होंगे। युवाओं को अपनी हिन्दी के प्रति अधिक विश्वास दिखाने की आवश्यकता है। हिन्दी हमारे संस्कारों की भाषा है।"

    शरद कपूर / आलोक अवस्थी

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