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    गन्ने के साथ सहफसली खेती आमदनी बढ़ाने का बेहतर विकल्प : डीसीओ

    गन्ने के साथ सहफसली खेती आमदनी बढ़ाने का बेहतर विकल्प : डीसीओ

    शाहजहांपुर में होंगी 8274 हेक्टेयर शरदकालीन गन्ना बुवाई

    शाहजहांपुर।
    गन्ने के साथ सहफसली खेती किसानों की आमदनी बढ़ाने का बेहतर विकल्प बनकर उभर रही है। सहफसली खेती के लिए किसानों को समय समय पर जागरूक भी किया जा रहा है। यह बात जिला गन्ना अधिकारी खुशीराम ने कही। डीसीओ खुशीराम ने जानकारी देते हुए बताया कि इस वर्ष शरदकालीन गन्ना बुवाई का लक्ष्य आवंटित कर दिया गया है। जनपद शाहजहांपुर में गन्ने का रकबा 94000 हेक्टेयर से अधिक है जिसमे मात्र 10-15 प्रतिशत क्षेत्रफल ही शरदकालीन गन्ने से आच्छादित है। जबकि 90 प्रतिशत क्षेत्रफल में बसंत कालीन व ग्रीष्म कालीन गन्ने की खेती होती है। उन्होंने बताया कि 15 सितम्बर से 30 नवंबर के बीच का समय शरदकालीन गन्ना बुवाई के लिये सबसे उपयुक्त रहता है।

    इस दौरान गन्ना जमाव के लिये तापक्रम एवं आद्रता उपयुक्त रहती है। शरदकालीन गन्ने के साथ सहफसली के रूप मे तोरिया, आलू, मसूर, मटर, बांकला, गेंहू, धनिया, लहसुन, गोभी व अन्य फसले बोकर अधिक लाभ लिया जा सकता है। सहफसली खेती करने से किसान को अतिरिक्त आमदनी के साथ गन्ने की अच्छी पैदावार भी मिल जाती है। दलहनी फसलों को सहफसली के रूप मे उगाने से जमीन की उर्वरा शक्ति भी बढ़ती है। शरदकालीन गन्ने मे रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है जिसके कारण कीट एवं व्याधि का प्रकोप अधिक होता है तथा चीनी परता भी बढ़ जाता है। बुवाई के लिये एक से दो आँख के टुकड़े ही प्रयोग करे जिससे जमाव अधिक होता है। बुवाई के लिये 3 आँख के टुकड़ो की बुवाई बिल्कुल न करे। गन्ना बुवाई से पहले 2.50 किलोग्राम त्रिकोडर्मा, 75 किलोग्राम सडी हुई गोबर की खाद में मिलाने के साथ बीजशोधन अवश्य करे।

    फ़ैयाज़ उद्दीन  शाहजहाँपुर

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