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    श्रद्धांजलि सभा में दिवंगत शायर नसीम के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर हुई चर्चा

    श्रद्धांजलि सभा में दिवंगत शायर नसीम के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर हुई चर्चा

    शाहजहांपुर।
    मशहूर शायर ’नसीम’ शाहजहांपुरी को श्रद्धांजलि देने के लिए आज रविवार को मोहल्ला ताजू खेल स्थित सपा नेता सैयद रिजवान अहमद के आवास पर एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। जिसमे दिवंगत शायर नसीम के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर चर्चा की। सुबह दस बजे श्रद्धांजलि सभा का आगाज सैयद रिजवान अहमद ने तिलावते कुरआन से किया। हाफिज इस्लाम बरकाती ने नसीम शाहजहांपुरी की नात-ए-पाक पेश की। सभा की अध्यक्षता करते हुए जीएफ कालेज के सेवानिवृत्त फारसी विभागाध्यक्ष डा. आफताब अख्तर ने कहा कि नसीम शाहजहांपुरी ने उर्दू शायरी में बहुत शोहरत हासिल की। उनको ऐतबारूल मुल्क दिल शाहजहांपुरी का जानशीन होने का भी गौरव हासिल रहा। उन्होंने अपनी शायरी से एक युग पर प्रभाव छोड़ा है।

    प्रो. सैयद मोहम्मद नोमान ने कहा कि नसीम साहब का दिल हर बुराई से पाक था। वह अपने सीने में एक दर्दमंद दिल रखते थे। साहित्यकार शिक्षक सैयद मशहूद जमाल ने कहा कि नसीम साहब सिर्फ एक शायर ही नहीं बल्कि एक अंजुमन थे। उनके शानदार दौर को हमेशा याद किया जाएगा। नसीम शाहजहांपुरी के पुत्र शायर काजी वसीम मीनाई ने उनके जीवन के कई पहलुओं पर रोशनी डालते हुए कहा कि उनकी शायरी में समाज की सच्चाई की झलक मिलती है। उनके दो गजल संग्रह मौज-ए-नसीम, आईने में है आईना साज, और नात का संग्रह अल मदद अल मदद या नबी आदि प्रकाशित हुए हैं। उनका 29 अगस्त 20 को निधन हुआ था।
    शायर रौनक मुसव्विर ने नसीम की शायरी और फन पर विस्तार से रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि नसीम साहब को महान शायर अमीर मीनाई के सिलसिले के उस्तादुश्शोरा होने का भी फख्र हासिल था। राशिद हुसैन राही ने कहा कि शायर व लेखक अपनी लेखनी से सामाजिक कुरीतियों पर कुठाराधात करता है। और समाज को सच से रूबरू कराते हुए बेहतर समाज के निर्माण की प्रेरणा देता है। इसकी झलक हमें नसीम शाहजहांपुरी की शायरी में देखने को मिलती है। कार्यक्रम में डा. रशीद हुसैन असर, इशरत सगीर आदि ने नसीम साहब के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर अपने-अपने अंदाज में विचार रखे।

    इसके बाद शायर सागर वारसी, रौनक मुसव्विर, सरदार आसिफ, अजीम शाहजहांपुरी, रामपुर से आए शायर डा. जावेद नसीमी, असगर यासिर, आफताब कामिल, फहीम बिस्मिल आदि ने नज्मों के माध्यम से शायर नसीम को श्रद्धांजलि दी। संचालन मशहूद जमाल ने किया।  अंत में संयोजक सैयद रिजवान अहमद ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर मोहम्मद अहमद खां, मशहूद आफाक खां, डा. सैयद मुर्शिद हुसैन, महबूब हुसैन, आरिफ खां, नईम खां, अहसन जलील, मोहम्मद यूसुफ, सैयद ताज मियां, गुलाम गौस खां, हमीद खिजर, अफरोज अली, जफर जलील, मुफीज कादरी, हादी बशीरी, सैयद अरशद हुसैन, डा. आफाक अली आदि साहित्य प्रेमी मौजूद थे।
    फ़ैयाज़ उद्दीन, शाहजहाँपुर

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