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    नशीली दवा बनी सस्ते में नशा करने का साधन

    नशीली दवा बनी सस्ते में नशा करने का साधन

    युवक कम पैसे में तीव्र नशा की इच्छा रखते हैं, नशीली दवाओं के  गिरफ्त में युवा अंधकार की तरफ अग्रसर

    अयोध्या।

    कहा जाता है कि नशा, नाश की जननी है । नशा कई तरह के हैं । गांजा भांग अफीम चरस शराब आदि है। किंतु इससे हटकर जो नशीली दवा इंजेक्शन का प्रयोग युवा कर रहे हैं सबसे खतरनाक वह है। इस बात को जानते हुए भी लोग नशा करने से बाज नहीं आ रहे हैं वर्तमान समय में सबसे ज्यादा युवा पीढ़ी नशे के गिरफ्त में आ गई है। नशीली दवा सस्ते में नशा करने का साधन बन गया है। युवक कम पैसे में तीव्र नशा करने की इच्छा रखते हैं। और ऐसे में उनकी आवश्यकता पूरी हो जाती है। किंतु युवा अपने को यह नहीं समझ पाते हैं कि हम किस रास्ते पर जा रहे हैं। और मेरा भविष्य का क्या होगा? यद्यपि यह सब जानते हैं कि नशा अंधकार की तरफ ले जाता है ।
    युवा पीढ़ी अब नशे की गिरफ्त में आकर गुमराह हो रही है। कई युवा ऐसे रास्ते पर चल पड़े हैं, जिसका अगला पड़ाव सिर्फ अंधकार है। शहर एवं ग्रामीण इलाकों की बाजारों में नशीली दवाइयों का कारोबार तेजी से पांव पसार रहा है। झुग्गी झोंपडि़यों से लेकर बंगलों तक नशे का नेटवर्क फैला हुआ है। अधिकतर युवा इसे फैशन एवं रईसों का शौक मानकर फंस रहे हैं। कारोबारी फायदे के लिए कुछ व्यापारी इस काले कारोबार में लगे हुए हैं। अपना धंधा चला रहे हैं और युवाओं के हमदर्द भी बने हैं।

    सहयोगी की भूमिका ग्रामीण और शहर क्षेत्रों  बाजारों में स्थित मेडिकल स्टोर भी है जिन पर तरह-तरह की सस्ती और सेहत पर बेहद नुकसान पहुंचाने वाली नशीली दवाइयां नशीले इंजेक्शन उपलब्ध रहते हैं। नशा करने वाले युवा पैसे के अभाव में स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव डालने वाली इन दवाओं तथा नशीले इंजेक्शन का सेवन कर रहे हैं। और अपने सेहत को खराब करने के साथ साथ गलत संगत में पड़कर खुद के साथ-साथ अपने परिवार को भी मुसीबत में डाल रहे हैं और अपराधी बनने की राह पकड़ रहे है।  यह कारोबार तेजी के साथ फैल रहा है।  नशा करने वाले युवक कम पैसे में तीव्र नशा की इच्छा रखते हैं कोरोना संकट आने के बाद आर्थिक संकट से परेशान नशा करने वाले युवकों के लिए नशीली दवा और इंजेक्शन सस्ते में नशा करने का साधन बन गया है नशा करने वाले युवक एकांत जगह देखकर जंगल झाड़ी बाग बगीचों में  खेत में अपने हाथों से खुद को इंजेक्शन लगा लेते है। थोड़ी  देर में ही उनको पूरा नशा हो जाता है। आंखें लाल हो जाती हैं चेहरों पर हल्की सी सूजन आ जाती है। एक बार नशा करने पर उसका असर कुछ   घंटे तक रहता है । मेडिकल स्टोर संचालक एक दो बार तो मना करते हैं फिर पैसे के लालच में आकर वह भी दवा और इंजेक्शन दे देते हैं। जिसका सेवन कर युवाओं का जीवन नर्क बन जाता है। धीरे-धीरे इसका असर व्यापक होता जा रहा है जल्दी ही इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो इस नशे के कारोबार के व्यापक दुष्परिणाम सामने आ सकते हैं । इस नशे के कारोबार से युवाओं का जीवन तो नर्क हो ही रहा है जिले में अपराध भी तेजी के साथ बढ़ रहे हैं! अब देखने वाला विषय यह है की जिम्मेदार स्वास्थ महकमा इस नशे के गोरखधंधे के खिलाफ कब कढ़ाई के साथ कार्रवाई करता है और कब इस काले कारोबार को ठप करवा पाता है।

    देव बक्श वर्मा अयोध्या

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