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    विवेक बैनारा ने जीएसटी में लगाई सेंध, लगभग 8 करोड़ की आईटीसी चोरी का मामला

    विवेक बैनारा ने जीएसटी में लगाई सेंध, लगभग 8 करोड़ की आईटीसी चोरी का मामला
    फर्जी फर्में बनाकर विवेक ने इनपुट टैक्स क्रेडिट(आईटीसी) के नाम पर की करोड़ों की हेराफेरी
    आगरा।
    जी हां, हम बात कर रहे हैं विवेक बैनारा की। जिसने आईटीसी के नाम पर जीएसटी प्रोसेस में सेंध लगाकर करीब आठ करोड़ की चोरी की है। यही नहीं, विवेक ने अपने परिवार वालों व परिचितों के नाम से फर्जी फर्में बनवाकर उन्हें पंजीकृत कराया और उसके बाद इनपुट टैक्स क्रेडिट(आईटीसी) के नाम पर करोड़ों की चोरी कर ली। विवेक बैनारा ने बड़े ही शातिर तरीके से इस काम को अंजाम दिया और जीएसटी प्रोसेस में सेंध लगाकर करोड़ों का चूना सरकार को लगा दिया। जिसमें से विनय आयरन फॉउंडरी फर्म ने 2.96 करोड़, बैनारा वाल्वस लिमिटेड ने 45 लाख, बैनारा बेअरिंग लिमिटेड ने 8.05 करोड़ की आईटीसी चोरी की है। यही नहीं इसके अलावा भी विवेक बैनारा ने अपने परिचितों को फर्जी फर्में बनाने की सलाह देकर उन्हें उकसाया और एक ही पते पर कई फर्जी फर्में बनवाईं। उसके बाद घर बैठकर ही फर्जी ई-वे बिल बनाए और सभी फर्जी फर्मों में फर्जी बिलों के माध्यम से बिक्री दर्शाकर सरकार की आंखों में धूल झोंकने का काम क़िया। ऐसी ही फर्मों के माध्यम से विवेक बैनारा ने अब तक करोड़ों की आईटीसी रिफंड करवाकर सरकार को चूना लगाया है। 

    वैसे तो केंद्र सरकार द्वारा टैक्स चोरी करने वालों को पकड़ने व ईमानदार व्यापारियों की सुविधा के लिए जीएसटी ऑनलाइन प्रोसेस शुरू किया था। जिसमें एक पैसे का भी हेरफेर कर पाना नामुमकिन लग रहा था लेकिन जिले में जीएसटी चोरी के एक ऐसे मामले का खुलासा हुआ है। जिसे जानकर बड़े से बड़ा तीरंदाज भी हैरत में पड़ जाए कि ऐसा कैसे हो गया। जीएसटी में इनपुट टैक्स क्रेडिट(आईटीसी) के नाम पर करोड़ों का रिफंड लेने वाले सनसनीखेज मामले का खुलासा हुआ है। इतना ही नहीं, इसमें जिले के एक हुक्मरान के शामिल होने की बात सामने आई है। जिन्होंने कागजों पर सेल और परचेज दिखाकर आईटीसी के माध्यम से करोड़ों का घपला कर दिया। जीएसटी जैसी ट्रांसपेरेंट प्रोसेस में भी इन्होंने सेंध लगा दी। इस पूरे मामले का सरगना विवेक बैनारा है।





    फोटो- जीएसटी आईटीसी में करोड़ों का फर्जी रिफंड लेने वाला विवेक बैनारा

    जिसने अपने साथियों को बोगस फर्मों को बनाकर उससे सरकारी रिफंड लेने की सलाह दी और वह इसमें कामयाब भी हुआ। विवेक बैनारा ने आदित्य, भानू जैसे न जाने कितने लोगों के नाम से फर्जी फर्में बनवाईं और आईटीसी के नाम पर सरकारी रिफंड में करीब 20 करोड़ का घोटाला किया। आगरा से लेकर मेरठ तक इस मामले के तार जुड़े हैं। जिन्हें विभाग खंगालने की कोशिश में जुट हुआ है।
    फोटो- जीएसटी विभाग द्वारा जारी बोगस फर्मों की सूची
    शायद यह देश में जीएसटी से जुड़ा सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा है। जिसमें लगभग 20 करोड़ के घपले की बात सामने आ रही है। हालांकि अभी पूरे मामले की जांच की जा रही है। सीबीआईसी की माने तो फर्जी अड्रेस और नाम के आधार पर फर्म बनाकर इन लोगों ने सिर्फ कागजों पर बिक्री दिखाई और आईटीसी के नाम पर करोड़ों रुपए रिफंड करा लिए। हालांकि इस मामले के खुलने के बाद अगस्त से विभाग ने आधार वेरिफिकेशन को अनिवार्य कर दिया है। जिसमें नई फर्म के रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन करने के बाद सेक्टर ऑफिसर उस अड्रेस पर जाकर जांच करने के बाद ही फर्म के रजिस्ट्रेशन को अप्रूव करेगा लेकिन इससे पहले ऐसा नहीं था। कई बार तो ऐसी फर्जी कंपनी और फर्जी खाते भी मिले, जिनके बारे में किसी को कुछ पता ही नहीं था, फिर भी आईटीसी के नाम पर सरकार द्वारा वे रिफंड लिए जा रहे थे।

    सी मामले में भाजपा से महानगर अध्यक्ष भानू महाजन पर 5.34 करोड़ रुपए की जीएसटी चोरी का आरोप है। जिन्होंने अपनी पत्नी के नाम पर जीवा इंटरप्राइजेज फर्म पंजीकृत है। इसी फर्म के सहारे भानू महाजन ने अब तक 5.34 करोड़ का जीएसटी रिफंड आईटीसी के रूप में ले लिया। खास बात यह है कि ये क्रेडिट्स आदित्य जैन की बोगस फर्मों की तरफ से जारी किए गए थे। ये वही आदित्य जैन है, जिसे कुछ महीने पहले 20 करोड़ की टैक्स चोरी के आरोप में हिरासत में लिया गया था। वर्तमान में भी आदित्य को हिरासत में ले लिया गया है और इसी बिनाह पर विवेक बैनारा, पारुल महाजन, भानू महाजन और शिवम भारद्वाज से भी पूंछतांछ की जाएगी। उक्त लोगों के नाम से भी कुछ बोगस फर्में रजिस्टर्ड कराई गई हैं। कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल करते समय भानू महाजन की पत्नी के नाम से पंजीकृत जीवा इंटरप्राइजेज का पता गलत मिला। जब टीम इस पते पर गयी तो उसे कुछ नहीं मिला। जो नंबर पड़ा मिला, उस पर कॉल की गई तो वह नंबर किसी महेश नाम के व्यक्ति ने उठाया और उसने कहा कि वह फर्म मालिक श्रीमती महाजन तक यह संदेश  पहुंचा देगा। इसके बाद भानू महाजन ने टीम के नंबर पर बात की और फर्म का पता सुल्तानगंज चौराहे व गणेश प्लाजा के नजदीक बताया लेकिन टीम फिर भी फर्म को नहीं ढूंढ पाई। इसके बाद भानू महाजन ने टीम से कोई बात नहीं की। उधर, जीएसटी इंटेलीजेंस डिपार्टमेंट के अधिकारियों ने अपने बयान में बताया कि आदित्य जैन ने विवेक बैनारा के कहने पर बोगस फर्म बनाई थी। अधिकारियों द्वारा दाखिल आरोप पत्र के अनुसार, आदित्य कुमार जैन को विवेक बैनारा ने अपने लिए बिल इंवॉयसिंग हेतु बोगस फर्म बनाने की सलाह दी थी। इसके लिए हर महीने उसे कुछ राशि देने का भी वायदा किया गया था। इससे पूर्व 2018 में विवेज बैनारा पर बड़ी कार्यवाही हुई थी, जिसकी जांच अभी जारी है। दूसरी तरफ, सीजेएम कोर्ट में पेश आरोप पत्र को पढ़ने के बाद कहा गया कि इतना सब होने के बाद भी भानू महाजन को अध्यक्ष कैसे बना दिया गया। राज्य कर, ग्रेड वन के अपर आयुक्त आरके श्रीवास्तव ने बताया कि अभी तक 89 बोगस फर्मों को पकड़ा जा चुका है और इनसे जुड़ी करीब 250 फर्मों की जांच अभी की जा रही है।
    फोटो- विवेक बैनारा
    इसके अलावा प्रकाश रावत ने बताया कि जब मामले की जांच के लिए जीएसटी के इंटेलिजेंस विभाग ने जांच शुरू की तो पैरों के नीचे से जमीन खिसका देने वाले तथ्य सामने आए। माने, इन अपराधियों की जड़ें काफी गहरी निकलीं। ऐसी कई फर्मों के रजिस्ट्रेशन मिले, जो असल में कहीं हैं ही नहीं। आगरा में टीम ने छापा मारकर फर्जी बिल बनाते हुए आदित्य जैन को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। इसके पास से भारी मात्रा में कई कंपनियों के नाम लिखे फर्जी जीएसटी बिल, ई-वे बिल, रबर स्टैम्प, लॉग इन आईडी और पासवर्ड सहित इस काम के लिए रखे गए कंप्यूटर बरामद किए गए। जानकारी मिली कि एक मोटे अनुमान के तौर पर आदित्य ने करीब 20 करोड़ का चूना जीएसटी विभाग को लगाया है। इसके साथ फर्जी बिल बनाकर आईटीसी के माध्यम से रिफंड लेने के मामले में कौन-कौन सी फर्में शामिल हैं, इसकी भी गहनता से जांच की जा रही है। आगरा निवासी आदित्य जैन ने  अपनी पत्नी, बहन और खुद अपने नाम पर अलग-अलग फर्में बनाई थीं, जिनकी बिक्री सिर्फ कागजों तक ही सीमित थी लेकिन इसका रिफंड वह लगातार सरकार द्वारा ले रहा था। इस प्रकार से आदित्य ने करीब 20 करोड़ का चूना जीएसटी विभाग को लगाया है।

    डीजीजीआई टीम को मिली शिकायत के अनुसार, आदित्य के घर जाकर जब छापेमारी की गई तो आदित्य ने खुद बताया कि अनिता जैन उसकी पत्नी है और वह स्वयं अपनी पत्नी के नाम से पंजीकृत विद्या ऑटो पार्ट्स और बहन आशा जैन के नाम से पंजीकृत नेमीनाथ सेल्स कॉर्पोरेशन फर्मों को संचालित करता है। उक्त दोनों फर्में एक ही जगह पंजीकृत मिलीं। इन सब मामलों में विवेक बैनारा की भूमिका मुख्य रही क्योंकि विवेक ने ही आदित्य को ऐसी फर्में बनाने के लिए सलाह देकर उसे उकसाया था।

    विजय लक्ष्मी सिंह
    एडिटर इन चीफ
    आईएनए न्यूज़ एजेंसी 

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