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    गोरखपुर को मिलेगी जलभराव से मुक्ति, 2000 करोड़ के 'मास्टर प्लान' को सीएम योगी ने दी मंजूरी

    गोरखपुर को मिलेगी जलभराव से मुक्ति, 2000 करोड़ के 'मास्टर प्लान' को सीएम योगी ने दी मंजूरी

    गोरखपुर।

    शहर में जलभराव खत्म करने के लिए 2000 करोड़ रुपये खर्च कर के ड्रेनेज सिस्टम को दुरुस्त किया जाएगा। इस क्रम में जलभराव दूर करने को बनने वाले मास्टर प्लान के लिए लेडार सर्वे का काम पूरा हो चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को गोरखनाथ मंदिर सभागार में सर्वे का पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन देखा।

    इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को कई जरूरी दिशा-निर्देश दिए हैं। सब कुछ सही तरीके से चला तो, सबसे ज्यादा जलभराव वाले इलाकों में वर्ष 2021 के अंतिम तक ड्रेनेज दुरुस्त करने का काम पूरा कर लिया जाएगा।



    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक महीने के भीतर डीपीआर प्रस्तुत करने के साथ ही इसमें शामिल विभागों के अलग-अलग कामों का निर्धारण कर पूरी रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा है। डीएम के. विजयेंद्र पांडियन के मुताबिक योजना में जीडीए, नगर निगम, लोक निर्माण विभाग, डूडा, बिजली विभाग समेत 10 से अधिक विभागों की सहभागिता होगी।

    प्रोजेक्ट समय से पूरा हो सके, इसलिए मुख्यमंत्री ने सभी की जिम्मेदारी तय करते हुए उन्हें तैयारी शुरू करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने तकनीकी सहयोग के लिए मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की भी मदद लेने का सुझाव दिया है। बैठक में कमिश्नर जयंत नार्लिकर, डीएम के.विजयेंद्र पांडियन, जीडीए उपाध्यक्ष अनुज सिंह समेत लोक निर्माण विभाग, बिजली, नगर निगम समेत कई विभागों के अफसर मौजूद रहे।


    नगर निगम को पंपों की क्षमता बढ़ाने के निर्देश...

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जल निकासी के लिए मिलकर कर कार्य करना होगा। नगर निगम को शहरी क्षेत्र के सभी वाटर पंपों की क्षमता बढ़ानी होगी। तरकुलानी रेगुलेटर का काम अगले मानसून से पहले पूरा हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि रामगढ़ ताल को सिल्ट मुक्त किया जाए। इससे रामगढ़ ताल के आसपास जलभराव की समस्या खत्म हो जाएगी।


    सर्वे पर खर्च हुए आठ करोड़ रुपये...

    लेडार सर्वे पर जीडीए और नगर निगम ने करीब आठ करोड़ रुपये खर्च किए हैं। सर्वे की जिम्मेदारी जियोनो कंपनी को दी गई है। कंपनी ने मास्टर ड्रेनेज प्लान के लिए हेलीकाप्टर के जरिए लेडार मैपिंग का काम किया है।


    शहर में 200 स्थानों पर होता है जबरदस्त जलभराव...

    नगर निगम ने जलभराव वाले 200 से अधिक स्थानों को चिह्नित किया है। इसके मुताबिक नाले-नालियों की लंबाई, चौड़ाई व ढलान में तकनीकी खामियां हैं। इस वजह से पानी का बहाव बाधित होता है। मानसूनी बारिश में अधिकतर मुहल्लों में कई-कई दिन तक पानी भरा रहता है। जलभराव से स्थायी निदान के लिए लेडार तकनीक से प्लान तैयार करने का निर्णय लिया गया था।


    लेडार मैपिंग करने वाली कंपनी को सर्वेक्षण, मैपिंग, डिजाइनिंग, परियोजना रिपोर्ट और टेंडर डाक्यूमेंट बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इस तकनीक में सर्वे, लेजर उपकरणों से किया गया है। लेडार मैपिंग में जीपीएस और स्कैनर का भी सहयोग लिया गया है। तकनीक, टोपोग्राफिक और बैथीमेट्रिक तकनीक पर आधारित है। टोपोग्राफिक तकनीक में इंफ्रारेड लेजर का उपयोग कर गहराई और दूरी की रिपोर्ट तैयार की जाती है। जबकि, बैथीमेट्रिक तकनीक से जलाशय की गहराई तथा उसमें सिल्ट (मिट्टी, बालू) की मात्रा नापी जा सकती है।


    ये है लेडार तकनीक...

    लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग तकनीक (लेडार) सर्वे की अत्याधुनिक प्रक्रिया है। सर्वेक्षण कर डिजिटल थ्री डी चित्रों के जरिए संरचना का एकदम सही अंदाजा लगाया जा सकता है। इससे जमीन की बनावट, सतह की ऊंचाई, पेड़-पौधों का फैलाव और क्षेत्रफल का सही अनुमान लगा कर प्लानिंग की जा सकती है।


    संजय राजपूत

    रीजनल एडिटर गोरखपुर

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