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    अयोध्या: 14 साल से बन रहे अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम के निर्माण में करोड़ो का घोटाला

    अयोध्या: 14 साल से बन रहे अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम के निर्माण में करोड़ो  का घोटाला

    अयोध्या।
    अयोध्या जनपद में डॉ. भीमराव अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय क्रीड़ा संकुल के निर्माण में साढ़े  करोडो  रुपये के गबन का मामला प्रकाश  मे आया है। जलनिगम की कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज (सीएंडडीएस) यूनिट-44 के परियोजना प्रबंधक  की तहरीर पर तीन अभियंताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। तीनों अभियंता सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
          अयोध्या जनपद के पूराकलंदर थाना क्षेत्र के डाभासेमर में डॉ. भीमराव अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय क्रीड़ा संकुल का निर्माण चल रहा है। स्टेडियम की स्वीकृति वर्ष 2006 में हुई थी। वर्ष 2018 तक इस परियोजना को पूरा हो जाना था, लेकिन निर्माण की सुस्त रफ्तार की वजह से अभी तक परियोजना अधूरी है। हालांकि कुछ इंडोर गेम यहां शुरू हो गए हैं, जहां शहर के लोग अभ्यास के लिए आते हैं। अब इस परियोजना में लगे अभियंताओं की ओर से गोलमाल किए जाने का प्रकरण सामने आया है। परियोजना के कर्मचारियों की मिलीभगत से निर्माण कार्य में आवश्यकता से अधिक सामग्री खरीदी गई और उसका समायोजन तक दस्तावेजों में दर्ज नहीं किया गया।  परियोजना प्रबंधक ने अपने कर्मचारियों पर 5.30 करोड़ गबन का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया है। परियोजना प्रबंधक ने भी निर्माण के लिए खरीदी गई सामग्री के बारे में जानकारी आरोपियों से मांगी, लेकिन वह जानकारी मुहैया नहीं करा सके।

           परियोजना प्रबंधक का आरोप है कि यूनिट के तीन जूनियर इंजीनियर  ने मिल कर तीन चरणों में दो करोड़ 50 लाख, दो करोड़ 30 लाख व 47 लाख का सामान खरीदा, जो आवश्यकता से अधिक था। इसका समायोजन आज तक नहीं कराया गया है। तीनो जूनियर इंजीनियर  सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं। थानाध्यक्ष पूराकलंदर  ने बताया कि परियोजना प्रबंधक की तहरीर पर तीनों आरोपियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर मामले की छानबीन की जा रही है।
     ज्ञातव्य हो कि अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम  2006 से निर्माणाधीन है और इसको बन कर  तैयार हो जाना था किंतु 14 साल का समय बीत जाने के बाद अभी तक अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। जिसका कोई पुरुषाहाल  नहीं है। तब से कई सरकारें आई गई जरूरत से जयादा खर्चा हुआ किंतु जितना धन खर्चा हुआ है उस अनुपात में काम नहीं हुआ है।


     देव बक्श वर्मा, अयोध्या

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